ब्‍लैकमेलिंग के आरोप में तीन फर्जी पत्रकार गिरफ्तार

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अवैध गर्भपात का स्टिंग ऑपरेशन करने का डर दिखाकर 10 लाख रुपये की उगाही करने के इल्जाम में तीन युवकों को गिरफ्तार किया गया है. तीनों युवक फर्जी पत्रकार बताए जा रहे हैं. इससे पहले ये संसद सदस्यों और गैस एजेंसी के मालिकों से ब्लैकमेलिंग के चक्कर में भी गिरफ्तार किए गए थे.

पूर्वी दिल्ली में कोंडली इलाके में 'राज मेडिकल एंड मैटरनिटी सेंटर' है. इस सेंटर की मालकिन राजरानी के भाई विजेंदर कुमार ने क्राइम ब्रांच को कंप्लेंट देकर बताया कि कुछ लोग उन्हें ब्लैकमेल कर 10 लाख रुपये देने के लिए कह रहे हैं. ब्लैकमेलर्स ने फोन पर उन्हें बताया कि एक वेबसाइट पर जाकर अपना स्टिंग ऑपरेशन देख लें. जब विजेंदर ने उस वेबसाइट पर जाकर देखा तो उस पर खोजी पत्रकार पंकज गुप्ता की ओर से स्टिंग ऑपरेशन 'कलयुग के भगवान' दिखाने का दावा किया गया था. इस मामले को उछालने से रोकने के लिए 10 लाख रुपये की डिमांड की जा रही थी. विजेंदर ने कुछ फोन टैप भी कर लिए.

विजेंदर ने क्राइम ब्रांच से संपर्क किया. पुलिस की सलाह पर उन्होंने 6.5 लाख रुपये देने की डील फाइनल कर ली. पहली किस्त के तौर पर आश्रम इलाके में 50,000 रुपये देना तय हुआ. इंस्पेक्टर अरविंद यादव, एसआई सुखबीर मलिक आदि पुलिसकर्मियों ने ट्रैप लगाकर दो मुलजिमों को रकम लेते हुए गिरफ्तार कर लिया. उनके नाम हैं पंकज गुप्ता (26) निवासी त्रिलोकपुरी और राजनारायण तिवारी (33) निवासी हसनपुर जेजे कॉलोनी. दोनों के बयान के बाद राजीव पटेल (31) निवासी हसनपुर जेजे कॉलोनी को भी पकड़ लिया गया. इन लोगों के कब्जे से 50,000 रुपये, उगाही के लिए कॉल करने में इस्तेमाल पांच सेलफोन, स्टिंग ऑपरेशन में इस्तेमाल चाबी के छल्ले में छिपा कैमरा, पेनड्राइव, 'दिल्ली टुडे न्यूज नेटवर्क' और 'युनाइटेड समाचार एजेंसी' के पहचान पत्र और बाइक जब्त की गई.

डीसीपी के मुताबिक, पंकज इस रैकेट का सरगना है. वह राजीव और राजनारायण के साथ मिलकर अपना उगाही रैकेट चलाता है. ये लोग खुद को फ्रीलांस पत्रकार बताते हैं. राज मेडिकल एंड मैटरनिटी सेंटर के पास गर्भपात कराने का रजिस्ट्रेशन है. इन लोगों ने इस सेंटर में एक लड़की को साथ ले जाकर गर्भपात के लिए बातचीत की थी और उस बातचीत को सीक्रेट कैमरे से रेकॉर्ड कर लिया था. बातचीत में सेंटर की ओर से क्राइम ब्रांच को कोई गैरकानूनी बातचीत नहीं मिली.

पंकज ने 2005 में गोरखपुर यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली आकर अपना रैकेट तैयार किया था. सबसे पहले उसने उजाला न्यूज के तथाकथित सीईओ संजय तिवारी के साथ मिलकर गैस एजेंसियों के वेंडरों के हाथों गैस चोरी की रिकॉर्डिंग कर उनसे उगाही करना शुरू किया था. उस मामले में संजय तिवारी को आनंद विहार, आंबेडकर नगर और तिमारपुर में गिरफ्तार किया गया था.  पंकज को तिमारपुर में गिरफ्तार किया गया था.

उसके बाद इन्हें 2007 में संसद सदस्यों से ब्लैकमेलिंग की कोशिश में गिरफ्तार किया गया था. इस रैकेट ने सांसदों से मिलकर खुद को आदिवासी मामले के मंत्री का स्टाफ अफसर बताते हुए प्लानिंग कमिशन को करोड़ों रुपयों का एक प्रस्ताव भेजने का झांसा दिया. उसने सांसदों को बताया था कि प्रस्ताव मंत्रालय की ओर से भेजा जाएगा, जिस पर सांसदों को महज दस्तखत करने होंगे. उसके एवज में सांसदों को पांच पर्सेंट कमिशन का वादा किया जा रहा था. सांसदों ने पुलिस कंप्लेंट कर दी, जिसके बाद इन लोगों को गिरफ्तार किया गया था. साभार : नवभारत टाइम्‍स


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