न्यूज एक्सप्रेस आफिस में आलोक तोमर की याद में स्मृति सभा

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आलोक तोमर ऐसे पत्रकार थे जिनका साहित्य, संगीत और विचार तीनों से गहरा संबंध था और इसने उनकी पत्रकारिता को एक नई पहचान दी। पिछले ढाई तीन दशकों में अपनी रिपोर्टिंग के दम पर अगर किसी पत्रकार ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनायी है तो वे अकेले आलोक तोमर रहे। वे जीवन पर्यंत सक्रिय रहे जो कि एक पत्रकार के लिए बहुत जरूरी चीज होती है।

वरिष्ठ पत्रकार आलोक तोमर की याद में न्यूज़ एक्सप्रेस के दफ्तर में आयोजित एक स्मृति सभा में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गयी। पत्रकारों ने आलोक तोमर से जुड़े अपने अपने संस्मरण सुनाए और उनके बेबाक विचार और धारदार लेखनी को आने वाली पीढ़ी के लिए अमूल्य धरोहर बताया।

न्यूज़ एक्सप्रेस टीम के प्रमुख मुकेश कुमार ने कहा कि आलोक तोमर रिपोर्टिंग में उभरने वाले ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने अपनी अलग शख्सियत बनायी। भाषा के स्तर पर उनकी रिपोर्ट में मानवीय संवेदनाओं के पुट से उसकी पठनीयता काफी बढ़ जाती थी। आलोक तोमर के जीवन से जुड़े कई प्रसंगों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनका दिमाग हरदम सक्रिय रहता था जहां रचनात्मक स्तर पर हमेशा कुछ न चलता रहता था।

सुमंत भट्टाचार्या ने कहा कि आलोक तोमर अपनी पत्रकारिता में साहित्य का छौंक लगाकर रिपोर्ट में एक अलग तरह की खूशबू पैदा कर देते थे। यह बात अपने आप में अनोखी है क्योंकि आमतौर पर साहित्य को पत्रकारिता के विपरीत माना जाता है। आलोक तोमर के सहृदयता की मिसाल देते हुए उन्होंने कहा कि उनमें गजब का टीम स्पिरिट था। वह हमेशा अपने जूनियर की हौसला अफजाई करते थे और यही वजह है कि हर कोई खुद को उनसे जुड़ा महसूस करता था।

इस मौके पर आशीष मिश्र, पंकज शुक्ला और दिनेश कांडपाल ने भी आलोक तोमर से जुड़े कई संस्मरण सुनाए। स्मृति सभा में कहा गया कि आलोक तोमर में हर वक्त कुछ नया करने का जज्बा होता था। वे हमेशा लीक से अलग हट कर चले और अपनी शर्तों पर पत्रकारिता की। अपनी इसी खासियत के चलते आलोक तोमर ने ताउम्र नई नई चुनौतियों का सामना किया। उनके लेखन में एक अजीब सी आक्रामकता था जिसके कारण उनकी शैली सहज तौर पर अलग नजर आती थी। प्रेस विज्ञप्ति


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