खल गया वर्ल्‍ड कप फाइनल के दिन दुबे जी का अस्‍वस्‍थ होना

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31 मार्च की सुबह। मैं करीब नौ बजे सुनील दुबे जी से मिलने उनके होटल मारवाड़ी आवास गया था। मिलते ही सबसे पहले उन्होंने भारत को सेमीफाइनल जीतने की बधाई दी। मैं और हमारे एक मित्र जबतक वहां रहे भारत की जीत और फाइनल मैच की संभावनाओं की ही दुबे जी चर्चा करते रहे। उन्होंने दावे के साथ कहा था कि भारत फाइनल अवश्य जीतेगा। पर फाइनल के दिन ही दुबे जी का अस्वस्थ हो जाना खल गया।

सुनील दुबे जी कि जितनी पकड़ पत्रकारिता में रही है उससे कम पकड़ क्रिकेट में नहीं। हिन्दुस्तान में वह जबतक संपादक रहे हिन्दुस्तान की क्रिकेट टीम को उत्साहित करते रहे। पटना में मीडिया क्रिकेट कप के दौरान हिन्दुस्तान का हर मैच देखने वह पहुंच जाते और फील्ड के बाहर से ही इस उम्र में भी इस तरह चिल्लाकर अपनी टीम को उत्साहित करते मानो किसी युवा की क्रिकेट के प्रति दीवानगी हो।

सुनील दुबे

वर्ष 2007 में हिन्दुस्तान ने जब मीडिया क्रिकेट कप जीता तो सुनील दुबे पूरे समय एचटी मीडिया के अधिकारियों के साथ मैदान में मौजूद रहे और ताली बजाबजाकर अपने खिलाडियों को उत्साहित करते रहे। विश्व कप क्रिकेट के प्रति भी सुनील दुबे काफी उत्साहित थे और उन्होंने कुछ पत्रकार साथियों के साथ टीवी पर पूरा मैच देखने का प्रोग्राम बनाया था। पर फाइनल के दिन ही उनका अस्वस्थ हो जाना उनके शुभचिन्तक क्रिकेट प्रेमियों को क्लीन बोल्ड कर गया। सुनील दुबे जी के सैकड़ों शुभचिन्तक और क्रिकेट प्रेमी जिन्होंने भारत की जीत पर जश्न मनाने कार फैसला लिया था, अपना फैसला बदल दिया। पर जश्न तो होगा ही पर वह सुनील दूबे जी के पूरीतरह ठीक होने और फिर से नयी पीढ़ी को मार्गदर्शन देने को तैयार होने के बाद।


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