छायावादी कवि जानकी वल्‍लभ शास्‍त्री का निधन

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हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार और वयोवृद्ध कवि आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री का ह्मदय गति रुक जाने से आज रात बिहार के मुजफ्फ़रपुर जिले में निधन हो गया. वह 96 वर्ष के थे. शास्त्री जी का अंतिम संस्कार शुक्रवार को दोपहर में होगा. शास्त्री के निधन के साथ ही छायावाद साहित्य और कविता की लगभग साढ़े नौ दशक से निरंतर कायम एक अध्याय का अंत माना जा रहा है.

वयोवृद्ध कवि के करीबी लोगों ने बताया कि करीब दो माह से शास्त्री जी बीमार चल रहे थे. दो सप्ताह पूर्व ही उन्हें श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एसकेएमसीएच) लाया गया था जहां से इलाज के बाद वह वापस अपने घर 'निराला निकेतन' वापस लौट गए थे. उनके परिवार में पत्नी छाया देवी और एक पुत्री है.

बिहार सरकार ने आचार्य शास्त्री को राजेन्द्र शिखर सम्मान और उत्तर प्रदेश सरकार ने भारत भारती सम्मान प्रदान किया था. भारत सरकार की ओर से उन्हें 2010 में पद्मश्री देने की घोषणा की गयी थी परंतु आचार्य ने इसे ठुकरा दिया था. छाया उनकी प्रसिद्ध रचना है.शास्त्री जी ने कई उपन्यास, कहानियां, गद्य पुस्तकें लिखी हैं. इनमें रूप-अरूप, तीर-तरंग, मेघगीत, तमाशा आदि कई पुस्तकें काफी लोकप्रिय हुईं.


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