जागरण ने मान लिया कि ऑफिस में आपराधिक साजिश होती है!

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विनोद भारद्वाज : प्रबंधन ने मेरे साथ छल भी किया है : न्‍याय सीधे रास्‍ते नहीं मिला तो छीनने में भी पीछे नहीं हटूंगा : मैं यूपी के डीजीपी करमवीर सिंह के साथ-साथ देश-प्रदेश की सभी जांच एजेंसियों, मीडिया और देश के प्रबुद्ध वर्ग के सामने तथ्‍यात्‍मक रूप से इस पूरे मामले पर कुछ तर्क रखना चाहता हूं ताकि उनके सोचने और जांच करने का मार्ग पूरी तरह से प्रशस्‍त हो सके.

दुनिया में सिर्फ तीन तरह के एविडेंस होते हैं, जिनमें आई एविडेंस, डाक्‍यूमेंटरी एविडेंस और परिस्थितिजन्‍य एविडेंट होते हैं. दुनिया की कोई भी जांच एजेंसी इन्‍हीं के आधार पर अपराधों का खुलासा करती है. मैं खुद भी मूल रूप से 14 साल तक एक क्राइम रिपोर्टर रहा हूं. ऐसा कैसे हो सकता है कि खुद से जुड़े इतने गंभीर मामले को उठाने से पहले मैंने इन तीनों तर्कों और सबूतों की कसौटी पर ना परखा हो.

29 जुलाई को डॉक्‍टर परमार बिना बुलाए ऑफिस में मेरे पास आए और मेरे सहकर्मियों के सामने मुझे अपनी दवा खाने के लिए लगातार प्रेशर डालते रहे. तमाम तर्क-वितर्क के बावजूद वे अपनी जिद पर अड़े रहे कि मैं उनकी दवा जरूर खांऊ. वे हर हाल में मुझे अपनी दवा खिलाने पर अमादा थे, इस घटना के आई एविडेंस मेरे पास हैं.

30 जुलाई को डॉक्‍टर परमार अचानक दवा लेकर ऑफिस में आए और मेरे सहकर्मियों के सामने ही मुझे दवा देकर दबाव डालते रहे कि मैं दस दिन तक हर हाल में दवा को खांऊ और अगर फिर भी फायदा ना हो तो ऑपरेशन करा लूं. इस बात के भी आई एविडेंस मेरे पास हैं. गौर करने की बात ये है कि इससे पहले मैंने उनकी दवा कभी नहीं ली और ना ही उन्‍होंने कभी मुझे दवा दी. मैं उनसे हमेशा सिर्फ एक्‍यूप्रेशर कराता था.

31 जुलाई को ना चाहते हुए भी मैंने उनकी दवा की पहली डोज ली और इसके 30 मिनट के अंदर ही मुझे बेहोशी और मेंटल डिसआर्डर की कंडिशन में हॉस्‍पीटलाइज करने की जरूरत पड़ गई. इस बात के भी आई एविडेंस और डाक्‍यूमेंटरी एविडेंस मेरे पास हैं. ये भी सौ प्रतिशत सच है कि लैब की रिपोर्ट में डॉक्‍टर परमार द्वारा दी गई पीने की दोनों दवाओं में एक्‍यूट नारकोटिक्‍स ड्रग्‍स पाए गए.

हम सभी कांसपिरेसी की बात भूल जाएं और सिर्फ उपरोक्‍त्‍ा फैक्‍ट्स पर बात करें तो डाक्‍टर परमार आईपीसी के सेक्‍शन 276 के दोषी हैं. ये नॉन-बेलेबल यानी गैर-जमानती अपराध है. इतना एविडेंस के बाद डॉक्‍टर परमार के खिलाफ एसटीएफ को रिपोर्ट दर्ज करके उसे पुलिस के हवाले कर देना चाहिए था.

-  डॉक्‍टर राज परमार ही बताते कि मुझे दवा खिलाने के लिए उन्‍हें किसने कहा और किसने उनको दवा बनाकर दी, लेकिन डीजीपी के तमाम प्रयासों और वादों के बावजूद आज तक डॉक्‍टर के खिलाफ रिपोर्ट नहीं लिखी गई. आखिर क्‍यूं?

-  आखिर वे कौन लोग हैं जो नहीं चाहते कि रिपोर्ट दर्ज हो, डाक्‍टर पकड़ा जाए और कोई पूछताछ हो पाए?  यदि ऐसा हो जाता तो इस घटना के पीछे के सभी राज खुद ही खुल जाते. लेकिन आखिर किन लोगों ने ऐसा नहीं होने दिया?

- वे कौन लोग हैं जो डीजीपी के बार-बार आदेशों पर भी भारी पड़ गए और आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई?

- जीजी नर्सिंग होम के उन डॉक्‍टरों के बयान एसटीएफ ने आज तक नहीं लिए जिन्‍होंने मेरा ट्रीटमेंट किया था ? आखिर क्‍यूं?

- एसटीएफ ने आज तक उन गवाहों के बयान क्‍यूं नहीं लिए जिन्‍होंने एफिडेविट दिए थे?

- डाक्‍टर राज परमार से आज तक कोई पूछताछ क्‍यूं नहीं की गई?

यही सारी बातें हैं जो चीख-चीख कर कहती हैं कि इस कांसपिरेसी के पीछे ताकतवर लोगों का हाथ है. इन लोगों के खिलाफ मेरे पास अकाट्य परिस्थितिजन्‍य एविडेंस हैं. मैं किसी भी खुले मंच पर किसी भी जांच एजेंसी के सामने अपने आरोपों को सिद्ध करने के लिए तैयार हूं. जागरण प्रबंधन की खामोशी, कायदे कानूनों और नैतिकता को ताक पर रखकर मंजूर किया गया मेरा इस्‍तीफा खुद में एक बड़ा सबूत है, जिसे एक्‍सेप्‍ट कर प्रबंधन ने ये मान लिया कि उनके ऑफिस में आपराधिक साजिश होती है और ये भी मान लिया कि प्रबंधन ने मेरे साथ छल किया.

तथ्‍य और सबूत तो मेरे पास इस से भी ज्‍यादा हैं लेकिन प्रयास ये है कि क्‍या ऊपर दिए गए सारे तथ्‍य इस बात के सबूत नहीं कि कुछ लोगों ने अपने पद और ताकत के बूते इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं होने दी.

न्‍याय पाना हर किसी का अधिकार है और मेरा भी. अभी तो मेरे सामने न्‍याय पाने के तमाम रास्‍ते खुले हुए हैं, लेकिन जब मुझे ऐसा लगेगा कि लोग मेरे न्‍याय पाने के अधिकार पर डकैती डाल रहे हैं तो मैं उन्‍हें चेतावनी देता हूं और बता देना चाहता हूं कि मैं उन लोगों में से नहीं, जो अन्‍याय और अत्‍याचार के सामने घुटने टेक देते हैं. इसलिए सारे लोग ये समझ लें कि यदि सीधे रास्‍ते से न्‍याय नहीं मिलेगा तो मैं न्‍याय को छीनने में भी पीछे नहीं हटूंगा. और इस सब के लिए डीजीपी करमवीर सिंह, एसटीएफ के आईजी सुवेश कुमार सिंह और सीओ नित्‍यानंद राय सीधे कानूनी तौर पर जिम्‍मेदार होंगे.

पूरा मामला जानने के लिए यहां क्लिक करिए : जागरण में ये भी होने लगा, डीएनई की जान लेने की कोशिश


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