रो पड़ा ईटीवी, उनका डीफीट चला गया

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प्रणयडीफीट नहीं रहा... प्रणय मोहन का ये शब्द ईटीवी से जुड़ा शख्‍स शायद ही कभी भूल पाये,  मुझे भी जब खबर मिली तो मेरे पास शब्द नहीं थे,  कुछ थे तो सिर्फ आँखों में आंसू... ऐसा पहली बार हो रहा है चंद सालों में... जब ईटीवी, हैदराबाद से पत्रकारों के बीमार, हार्ट अटैक या फिर अचानक मौत की खबर सुनने को मिलती है.

प्रणय दा की खबर सुन कर विश्वास नहीं हुआ, मानो पल में सब कुछ ख़त्म सा हो गया हो,  सहसा विश्वास नहीं हुआ, प्रणय दा काफी सालों से ईटीवी में थे. उनकी उम्र अभी 42 साल की थी. परिवार में एक बिटिया 'चिड़िया' जो कक्षा दो में पढ़ती है और पत्नी है.  प्रणय लखनऊ के रहने वाले थे.  उनके पिता के यूपी में वरिष्‍ठ आईएएस थे और ऑल इंडिया रेडियो दिल्‍ली में डिप्‍टी डाइरेक्‍टर जनरल के पद से रिटायर हो चुके हैं.

आज हमारे आंसू थम नहीं रहे थे, बस रोये जा रहा था...  प्रणय जी के चाहने वाले,  जो आज दूसरे शहर में रहते है,  उन्हें मैंने फ़ोन किया, लेकिन मैं बस रोये जा रहा था,  कुछ कहने की हिम्मत नहीं हो रही थी...  प्रणय दा का नाम जुबां पर नहीं आ रहा था, वो बस पूछे जा रहे थे क्या हुआ,  क्यों रो रहे हो, मेरे मुंह से निकला डीफीट नहीं रहा.

प्रणय मोहन कुछ दिनों से 'ए' शिफ्ट में चल रहे थे, रोज़ मुलाक़ात हो जाती थी, बस से उतरते, चाय की प्याली के साथ, कैंटीन में नास्ते पर या लिफ्ट में या फिर बुलेटिन ख़त्म होने के बाद पकर के बाहर या 4:20  की बस के छूटते वक़्त...  डीफीट यारों का यार था,  डीफीट जो बोलता था दो टूक बोलता था...  डीफीट सच्ची बात बोलता था...  डीफीट हर फिक्र धुएं में उड़ा देता था...  मुश्किल घड़ी में हर कोई डीफीट को याद करता था...  डीफीट चिड़ियाँ बन कर उड़ गया... आज डीफीट की जगह कोई नहीं ले सकता... गुलाबी नगरी ने जब डीफीट की मौत की खबर सुनी, तो वह भी रो पड़ा...  हैदराबाद का 'डीफीट' चला गया.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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