ताबूत के किराए के लिए चंदा जुटाया ईटीवी के साथियों ने

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यशवंतजी, कल की खबर से बुरी है ये खबर. रात के 12 बजे के करीब जब सारी दुनिया से खबरें आनी बंद हो गईं थी. फ्लैश और टिकर पर बैठने वालों की उंगलियां भी थम गई थीं. तभी एक घटना घटी. प्रणयजी का शव 12 घंटे से हैदराबाद में कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर रहा था, लेकिन उसके बाद भी उसको ले जाने के लिए एक अदद ताबूत के किराए का इंतजाम नहीं हो सका.

साउथ के मर्डोक कहे जाने वाले रामोजी राव के सिपहसालार ताबूत के लिए पैसे देने से हाथ खड़े कर चुके थे. वे तीन करीबियों का एयर टिकट तो दे रहे थे, लेकिन ताबूत का 20,000 रुपये किराया देने के लिए ना कह चुके थे. डेस्‍क पर काम कर रहे करीबियों से दोस्‍तों ने मदद की गुहार लगाई. सभी हिंदी चैनलों से जुड़े लोगों ने अपने सामर्थ्य के मुताबिक पैसे दिए. तब तक तारीख बदल चुकी थी. 24 की जगह 25 हो गया था और कहा गया कि मंडे को साम्राज्‍य की तिजोरी में से 20,000 रुपये दे दिए जाएंगे.

इस वाकये के बाद मैं खुद डिटेल पता करने की स्थिति में नहीं था. पर 15 घंटे बाद जिस तरीके से ईटीवीयन्‍स ताबूत के किराए के लिए चंदा करने को विवश थे, वो पत्रकारों की दशा को बयान करने के लिए काफी है. अभी कुछ दिन पहल रिलायंस के एक अधिकारी को झारखंड में नक्‍सलियों ने मार दिया था, तुरंत उसके शव को हेलीकॉप्‍टर भेज कंपनी ने मंगवा लिया था. पत्रकारों को ऐसी किस्‍मत नसीब नहीं. पता नहीं अंत में किसके पैसे से ताबूत का किराया भरा गया.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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