ईटीवी प्रबंधन ने प्रणयजी के साथ ठीक नहीं किया

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प्रणय जी का व्‍यक्तित्‍व इतना बड़ा था कि इटीवीयन्‍स ने सामर्थ्‍य के अनुसार बहुत किया. पहले बारह घंटे में प्रणय जी के आवास पर 17000 रुपये इकट्ठे हो चुके थे, लेकिन आधी रात को मैनेजमेंट ने बताया कि ताबूत के लिए 20000 रुपये लगेंगे. फिर आनन-फानन में डेस्‍क से भी मदद की मांग हुई. जहां से तुरंत 2000 आया और कई साथियों से मिलाकर कुल 43, 500 रुपए इकट्ठे किए गए, जो जरूरत से ज्‍यादा था.

परन्‍तु दुख इस बात का है कि ईटीवी प्रबंधन ने इसके लिए एक पैसा तक नहीं दिया सिवाय टिकट के. ईटीवी प्रबंधन ने आधिकारिक तौर पर एक आदमी को भी लखनऊ भेजना मुनासिब नहीं समझा. खैर तीन लोग साथ गए. इससे पहले पोस्‍टमार्टम जल्‍द करने के लिए ईटीवीयन्‍स ने दिल्‍ली तक संपर्क साधा. कानून मंत्री वीरप्‍पा मोइली के पीए ने कहा कि इस काम के लिए रामोजी ही काफी हैं, लेकिन ईटीवी प्रबधंन ने रामोजी के पीए का नम्‍बर तक उपलब्‍ध नहीं करवाया. जिस संस्‍था को प्रणय जी ने अपने जीवन के 7 साल दिए उसके मालिक के बेवकूफी पर क्‍या कहेंगे.

जिस संस्‍था को अपने ही लोगों के नहीं रहने की खबर ब्रेक करने में आठ घंटे लग गए समझिए की उस संस्‍था में दीमक लग चुकी है. वो भी तब ब्रेक हुआ जब जयपुर से फ्लैश आया. दूसरे दिन भी जो स्‍टोरी चली वो साथियों के मोबाइल से खिची गई तस्‍वीरें थीं. बाद में लखनऊ से लाइव मांग कर किया गया. जो आदमी हर आदमी के हित के लिए संस्‍था से लड़ता रहा, संस्‍थान ने उसे कुछ नहीं दिया. जो भी हुआ ईटीवीयन्‍स ने किया और कम नहीं किया.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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