निशंक सरकार ने घोटालों का पर्दाफाश करने वाले पत्रकार का घर कुर्क कराया

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उत्तराखंड में मीडियाकर्मियों का दमन जारी है. पत्रकार से राजनेता बने और फिर सीएम की कुर्सी पर आसीन हुए रमेश पोखरियाल निशंक की सरकार में दर्जन भर पत्रकारों को येनकेन प्रकारेण परेशान किया गया है. सबसे ज्यादा अगर कोई पत्रकार सताया गया है और सताया जा रहा है तो वे हैं उमेश कुमार. एनएनआई न्यूज एजेंसी के संचालक उमेश ने निशंक सरकार के कई घोटालों का पर्दाफाश किया.

स्टर्डिया घोटाला, हाइड्रो घोटाला, श्रावंती गैस एनर्जी घोटाला... इन घोटालों का खुलासा करने और इन घोटालों की समुचित जांच न होने के चलते कोर्ट का सहारा लेने वाले उमेश कुमार को निशंक सरकार के अफसर तरह तरह से परेशान कर रहे हैं. उमेश और उनके परिजनों पर कई झूठे आरोप लगाए गए, मुकदमें लिखे गए, मकान-दुकान ध्वस्त किए गए और ताजी सूचना है कि उमेश कुमार के घर की कुर्की कर ली गई है. उमेश के घर के सारे सामान को जब्त कर लिया गया है. एक गैर जमानती वारंट के मामले में निशंक सरकार ने कोर्ट से फटाफट कुर्की आदेश लेकर कुर्की की कार्रवाई कर डाली.

जिस मामले में एनबीडब्लू जारी है, उसी प्रकरण में कोर्ट ने मसूरी देहरादून डेवलपमेंट अथारिटी को नोटिस करके पूछा है कि आखिर किस आधार पर एफआईआर लिखी गई. हाईकोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बावदूज अफसरों ने कुर्की की कार्रवाई करने में बहुत तेजी दिखाई. उमेश कुमार ने भड़ास4मीडिया से बातचीत में कहा कि वे निशंक सरकार के प्रताड़ना के शिकार लंसे समय से हैं लेकिन फिर भी वे झुकेंगे नहीं. घोटालों का खुलासा जारी रखा जाएगा और सरकारी तंत्र से मंजबूती से लड़ूंगा. एक नहीं, दस कुर्की भी कर लें तो भी हमारे इरादे कमजोर न होंगे. सरकार की जितनी चाहे ताकत लगा ले, पर इन दमन के आगे हम झुकने वाले नहीं हैं.

उल्लेखनीय है कि अभी कुछ दिनों पहले लखनऊ के एक पत्रकार को उत्तराखंड की पुलिस गिरफ्तार कर ले आई थी. उस पत्रकार पर राज्य के एक सूचना अधिकारी ने ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया था. उमेश कुमार को भी परेशान करने के वास्ते उत्तराखंड की पुलिस ने कई बार उन्हें दिल्ली में घेरा लेकिन उमेश हाथ न आए. एक बार तो उमेश की घेराबंदी करके उत्तराखंड पुलिस की एसटीएफ ने कार से उनकी कार में टक्कर भी मार दी थी पर उमेश अपनी कार के साथ वहां से चकमा देकर निकल लेने में सफल रहे.


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