प्रदीप संगम अचानक ऐसे चले जाएंगे, यकीन नहीं हो रहा

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स्व. प्रदीप संगमअपनी एक आनलाइन प्रोफाइल में पत्रकार प्रदीप संगम ने खुद के बारे में लिखा है- ''working for human rights, world peace, media rights, public intrest issues. member National union of journalists India, age- 50 yrs. active in journalism since 30 yrs. Occupation- Assitant Editor, Hindustan Media VL.''

आगे उन्होंने अपने बारे में बताया है कि वे  दैनिक जागरण, बिजनौर टाइम्स, विश्व मानव, उदय भारत, मेरठ समाचार, प्रभात और आकाशभारती जैसे अखबारों-संस्थानों में काम कर चुके हैं. इन्हीं प्रदीप संगम का निधन हो गया. दिल्ली का मीडिया जगत सदमें में हैं. किसी को यकीन नहीं हो रहा कि प्रदीप संगम अचानक ऐसे चले जाएंगे. प्रदीप के करीबी और नजदीकी लोग सदमें में हैं. मौत कब कहां किस रूप में आ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता. यहां हम प्रदीप संगम द्वारा लिखित एक फिल्म समीक्षा और साइबर खतरे पर एक लेख प्रकाशित कर रहे हैं. साथ ही कुछ तस्वीरें.

2011 में मंडराएंगे नए साइबर खतरे

प्रदीप संगम

जैसे-जैसे इंटरनेट की पहुंच और प्रभाव में वृद्धि हो रही है वैसे-वैसे उससे जुड़े खतरे भी नए-नए रूप में सामने आ रहे हैं। आने वाले वर्ष 2011 में इस खतरे के और बढ़ने की आशंकाएं अभी से जताई जा रही हैं। इस बारे में साइबर सुरक्षा से जुड़ी कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी आगाह किया है। इनके मुताबिक इंटरनेट प्रयोक्ताओं के सामने आने वाले प्रमुख खतरों में ज्यादातर ऐसे हैं जिनके मुकाबले का अभी तक कोई पुख्ता इंतजाम भी नहीं है।

जिन सामने आने वाले सम्भावित साइबर खतरों के प्रति आगाह किया गया है उनमें खास तौर पर चार क्षेत्रों की बाबत संकेत दिए गए हैं। सबसे ज्यादा डर के बारे में जानकारी देते हुए एक नई शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि मोबाइल डिवाइसेज का चलन बढ़ने और उनमें 3जी और वाईफाई की सुविधा वाले उपकरणों के जरिए सबसे संगीन मुसीबत सामने आने की चेतावनी दी गई है।

जॉर्जिया टेक इनफॉर्मेशन सिक्यूरिटी सेंटर की वार्षिक रिपोर्ट की मानें तो नेट सक्षम मोबाइल उपकरणों पर साइबर अपराधियों की सक्रियता नई-नई और लुभावनी एप्लीकेशन्स के साथ हो सकती है। गौरतलब है कि इनके जरिए अहम जानकारियां जुटाना, चुराना और उनका दुरुपयोग करना कहीं आसान हो गया है और इससे कई संस्थानों और देशों की सुरक्षा इंतजामों के ऊपर साइबर खतरा मंडराता दिख रहा है।

बैठ सकते हैं नेटवर्क सिस्टम : आज जिस तेजी से सारी दुनिया में एक बड़े नेटवर्क में तबदील हो रही है उसके कारण साइबर अपराधों का खतरा भी बढ़ रहा है। सुरक्षा को लेकर चौकस करती साइबर सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार नए इंटरनेट कनेक्शन्स के साथ-साथ विभिन्न संस्थान भी आपस में जुड़ रहे हैं, कार्यालय, स्कूल और कॉलेज आपस में जुड़ रहे हैं। इनमें एक ही व्यवसाय से जुड़े लोग परस्पर प्रतिद्वंद्विता निजी व्यापारिक हितों के लिए दूसरे के यहां अवांछित और अनाधिकृत घुसपैठ करने की ताक में रहेंगे।

जीटीआईएसएस की रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य संस्थानों और अस्पतालों पर भी साइबर हमले होने की संभावना काफी प्रबल है। वजह यह है कि स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों को लेकर भी खासी स्पर्धा है। रक्षा संबंधी क्षेत्रों में खास तौर पर साइबर खतरे बढ़ने की आशंका जताई गई है। हाल में कई देशों में सरकारी साइटों को हैक करने की घटनाएं सामने आई हैं जिनकी नए वर्ष में ज्यादा सक्रियता रहने की आशंका है।

बोटनेट आक्रमण : इसी प्रकार बोटनेट हमले के तहत किसी मलवेअर को बेहद सुनियोजित तरीके से किसी भी देश या संस्थान के बड़े नेटवर्क पर प्रेषित कर पूरे सिस्टम को प्रभावित किया जा सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार 2011 में इस तरह के हमले पहले से अधिक संख्या में अमल में लाने की तैयारियां होने के सुराग हाथ लगे हैं। इसमें अहम बात है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के साइबर अपराधी अब काफी उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनके द्वारा सार्वजनिक किए गए हानिकारक सॉफ्टवेयर अभी से चलन में आ रहे हैं।

मोबाइल फोन से भी गंभीर खतरे : मोबाइल फोन पर आज इंटरनेट एक्सेस आम बात हो चुकी है और करोड़ों लोग अब लाखों की संख्या में एप्लीकेशनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ढेर सारी मुफ्त एप्लीकेशनें डाउनलोड के लिए उपलब्ध है, परंतु इनमें से कई एप्लीकेशनें बेहद असुरक्षित भी होती हैं। खास तौर पर यदि प्रयोक्ता सुरक्षा जाँच किए बगैर उन्हें अपने मोबाइल में इंस्टॉल कर लेता है तो वे जी का जंजाल अपने लिए ही नहीं दूसरे संपर्ककर्ताओं के लिए भी बन सकती हैं। इनसे साइबर अपराधियों के लिए मोबाइल डिवाइजों तक पहुंच बनाना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान हो गया है। इससे निजी और गोपनीय जानकारियों तक साइबर अपराधियों की उनकी पहुंच कायम हो रही है।

जीटीआईएसएस की रिपोर्ट में कहा गया है कि साइबर अपराध से निपटने के लिए अब परम्परागत तौर-तरीकों को  छोड़ कर नए तरीकों को आक्रामक ढंग से लागू करना होगा, वरना इसके घातक परिणाम सामने आने तय हैं। वैसे भी साइबर अपराध मामले में एशियाई ताकतें विश्व में तीसरे नंबर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कर रहीं हैं। पिछले दिनों अपने यहां गृह राज्यमंत्री ने राज्यसभा को यह जानकारी देते हुए कहा था कि सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अनुसार अमेरिकी कंपनी सिमैन्टेक द्वारा जारी रिपोर्ट में भारतीय साइबर अपराधी ही पाँचवें क्रम पर सक्रिय हैं। ऐसे में भारत के लिए यह खतरा ज्यादा गंभीर हो सकता है।

कुछ नामी सर्च इंजन भी इस आरोप से घिरे हैं कि वे लोगों की व्यक्तिगत जानकारी का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें गूगल के दो कोड नाम भी चर्चा में हैं एक गूगल प्लस वन तथा फेसबुक को मात देने के लिए एमराल्ड सी का नाम लिया जा रहा है। ये दोनों नाम सम्भावित या दुष्प्रचारित भी हो सकते हैं, पर इतना तय है कि सोशल नेटवर्क साइट्स के बीच स्पर्धा भी किसी बड़े इंटरनेटी खतरे की वजह बन सकती है।

दूसरी तरफ गूगल साइट्स के प्रयोक्ताओं को कुछ अनजाने और अवांछित पॉप अप इसे एक्सेस करते हुए नज़र आए जो संदिग्ध रूप से सिस्टम को हैंग भी कर रहे थे। बाद में लोगों की शिकायत पर गूगल ने इसे बंद कर दिया। बहुत संभव है कि यह किसी और की करतूत या गलती से शुरू हो गया हो, परंतु इतना तय है कि गूगल नए नाम से कोई एप्लिकेशन जरूर तैयार कर रहा है। जानकारों का तो यह कहना है कि कि गूगल अपनी क्लाउड कम्प्यूटिंग सेवा को और बेहतर बनाना चाहता है और यह उसका भी एक भाग हो सकता है। बहरहाल, आने वाले साल में इंटरनेट प्रयोक्ताओं को अपनी सुरक्षा के लिए अतिरिक्त चौकसी बरतनी ही होगी।

प्रकाशन तिथि: 24 दिसम्बर, 2010

Source: http://hi.shvoong.com/how-to/computers-and-internet/2091039-2011-%E0%A4%AE-%E0%A4%AE-%E0%A4%A1%E0%A4%B0-%E0%A4%8F/#ixzz1Ob5jMlbH

फिल्म समीक्षा : दम मारो दम

प्रदीप संगम, नई दिल्ली

कहानी : गोवा में ड्रग माफियाओं के राज और उससे जूझने के इर्द-गिर्द बुनी गई कहानी में एसीपी विष्णु कामथ (अभिषेक बच्चन) ऐसा पुलिस अफसर है, जो सिर्फ गांधी (नोटों पर छपे हुए) के लिए जीता है, पर जब उसका खुद का परिवार दुर्घटना में मारा जाता है तो वह जमीर के लिए जीता है। माइकल बारबोसा वह माफिया है जिसे कोई नहीं जानता। उसे पकड़ने की जिम्मेदारी कामथ को दी जाती है। इसी के बीच में कॅरियर के लिए माफियाओं के जाल में आने वाले चेहरे भी हैं। लॉरी (प्रतीक) जो विदेश में पढ़ना चाहता है, पर ड्रग माफियाओं के जाल में फंस जाता है। बिपाशा एयर होस्टेस बनना चाहती है और एक माफिया की रखैल बन जाती है। बिस्किट (आदित्य पंचोली) भी माफियाई चेहरा है। जॉकी (राणा डग्गूबत्ती) लॉरी को बेकसूर मानता है और उसे बचाने के लिए कामथ के साथ जुड़ जाता है। अंत में कामथ ड्रग सरगना तक पहुंचते हुए आखिरी मोड़ पर मारा जाता है।

निर्देशन

रोहन सिप्पी ने सभी कलाकारों से बेहतर काम लिया है। पात्रों के परिचय से इंटरवल तक वे कमाल दिखाते हैं। पर उसके बाद लगता है जैसे फिल्म पर उनका नियंत्रण नहीं रहा। फिल्म में कट्स ज्यादा हैं और इससे दर्शक का मोह भंग होता है।

अभिनय

अभिषेक बच्चन ने बड़ी बेतकल्लुफी के साथ सहज अभिनय किया है। उनकी डॉयलॉग डिलीवरी पर पापा अमिताभ का असर अब ज्यादा आने लगा है। बिपाशा की सेक्स अपील का दोहन भरपूर हुआ है और वे खुद को साबित भी करती हैं। दीपिका का गाना नशीला है पर टिकाऊ अहमियत वाला नहीं। प्रतीक ने खुद को प्लस किया है। विद्या और गोविंद नामदेव को कुछ खास मौका ही नहीं मिला।

गीत-संगीत

प्रीतम का संगीत कामचलाऊ है। पूरी फिल्म में बैकग्राउंड संगीत और उसमें भी पंचम दा का दम मारो दम.. ही कुछ बांधता है।

क्या है खास

बिना लेक्चर दिए फिल्म युवाओं को भटकने से बचने की प्रेरणा दे जाती है।

क्या है बकवास

बेवजह परोसे गए कुछ सेक्सी दृश्य, जिन्होंने सिर्फ ए सर्टिफिकेट ही दिलवाया है। फिल्म का असर या दर्शकों के लिए अतिरिक्त आकर्षण कतई नहीं बढ़ाया।

पंचलाइन

तमाम कोशिशों और मसालों के बावजूद फिल्म औसत से ऊपर नहीं उठ पाई है।

हिंदुस्तान अखबार में प्रकाशित


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