बसपा के जोनल कोआर्डिनेटर ने आदेश दिया- मीडिया के लोगों को कार्यकर्ता बाहर खदेड़ दें

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: यूपी के शाहजहांपुर जिले के खुटार कस्बे की घटना : दुत्‍कारने के बाद भी नहीं माने मीडिया वाले : उत्‍तर प्रदेश के शाहजहांपुर जनपद के खुटार कस्बे में बसपा वालों ने मीडिया को जमकर दुत्‍कारा लेकिन इसके बाद भी उन्‍हें अपनी तौहीन महसूस नहीं हुई। बाद में बसपा नेताओं ने उन्‍हें बाहर भगाने का फरमान तक जारी कर दिया। किसी भी अखबार ने इस खबर को नहीं छापा। बल्कि सभी ने बसपा की शान में कसीदे काढे हैं।

23 जून को खुटार में बसपा का कैडर कैंप था। मिनी मुख्‍यमंत्री के रूप में चर्चित नसीमुददीन सिददीकी को कैडर कैंप को संबोधित करना था। यहां सुबह से ही मीडिया का जमावाड़ा था। दिन में 11 बजे खुटार आने के बाद सिददीकी सीधे करतार पैलेस पहुंचे। वहां कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करने के बाद बाहर निकलते समय स्‍वतंत्र भारत के पत्रकार ने उनसे उपचुनाव के समय किए गए वायदे याद दिलाए तो वह बिफर पड़े और पत्रकार को अंट शंट कहते हुए गाड़ी में बैठकर कर कैडर कैंप में चले गए। वहां पहुंचते ही उन्‍होंने मंच से घोषणा करवा दी कि मीडिया के लोग कैडर कैंप से बाहर चले जाएं।

मीडिया के कुछ लोग मौके से खिसक लिए तो कुछ बेशर्मी से डटे रहे। इस दौरान कुछ ने फोटो खींचने का प्रयास किया तो जोनल कोआर्डिनेटर सुनील चित्‍तौड़ ने माइक से निर्देश दिए कि मीडिया के लोगों को कार्यकर्ता बाहर खदेड़ दें। इसके बाद कार्यकर्ताओं की मीडिया के लोगों से नोकझोक भी हुई। खास बात यह रही कि इतनी बेइज्‍जती होने के बाद भी चौथा स्‍तंभ कहलाने वाले मीडिया के लोगों ने इस बारे में एक भी लाइन खबर लिखने की जरूरत नहीं समझी। बल्कि सभी अखबारों ने कैडर कैंप में नसीमुद्दीन के बयान को प्रमुखता से छापा।

बताया जाता है कि कुछ पत्रकार कैडर कैंप की खबरों का बहिष्‍कार करना चाहते थे लेकिन जिला कार्यालय और संपादक की ओर से निर्देश जारी किए गए कि खबर पूरी और प्रमुखता से भेजी जाए। उसके बाद स्‍थानीय पत्रकारों के बसपा विरोध का हौंसला झाग की तरह बैठ गया। संपादक को इससे मतलब नहीं है कि उनके स्‍थानीय संवाद सूत्र जूता, लात खाएं या गालियों से नवाजे जाएं। उन्‍हें यह देखना है कि सरकार पूरे पेज के विज्ञापन जारी करती है, कहीं ऐसे में उल्‍टी खबर छपने से इस पर असर न पड़ जाए। ऐसे में लल्‍लो चप्‍पो तो करनी ही होगी। अखबारों की इस नीति से मीडिया कर्मी आहत हैं।


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