सहारा के अपहरणकर्ता स्ट्रिंगर को ढूंढ़ रही है सूरत पुलिस

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गुजरात के मीडिया जगत से सूचना है कि एक राष्ट्रीय चैनल के स्ट्रिंगर पर अपहरण का मामला दर्ज हुआ हैं. मामला गुजरात के सूरत शहर का है.  यहाँ पिछले कई साल से सहारा समय में बतौर स्ट्रिंगर कम करनेवाले क्रितेश पटेल पर शहर के महीधरपूरा पुलिस थाने में अपहरण और छिनैती का मामला दर्ज किया गया हैं.  बताया जाता है कि क्रितेश पटेल सहारा समय के साथ-साथ सूरत के एक लोकल चैनल मित्र चैनल में भी बतौर क्राईम रिपोर्टर काम करते हैं.

महिधरपुरा पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार मित्र चैनल में बतौर कैमरामैन नौकरी करनेवाले अबरार मोहम्मद इस्माई ने कुछ दिन पहले मित्र चैनल छोड़कर एक अन्य लोकल न्यूक चैनल जीटीपीएल में नौकरी करना शुरू कर दिया. जिससे मित्र चैनल के लोगों ने उस पर कैमरा चोरी का आरोप लगाया और गत 02 मई 2011 के दिन उसका अपहरण कर मित्र चैनल के कार्यालय ले गये,  जहाँ उसकी जमकर पिटाई कर दी. अपहरण करनेवालों में प्रकाश वाला, क्रितेश पटेल, हितेश धोलिया और प्रवीन गोरक्रिया के नाम प्राथमिकी दर्ज करवाते हुए कहा गया है कि अपहरणकर्ताओं ने रिवाल्वर की नोंक पर उसे अपने साथ ले गये थे और बाद में उसे बहुत पीटा.

अपने बेटे के अपहरण को लेकर कई बार अबरार की माँ ने स्थानीय पुलिस शिकायत दर्ज करने चाही लेकिन किसी भी तरह कि ठोस कार्यवही नहीं हो रही थी,  ऐसे में अबरार कह माता ने गुजरात हाई कोर्ट में अपील करने के बाद हाई कोर्ट के आदेश के बाद इनपर एफआईआर दर्ज हुआ हैं. गौरतलब है की क्रितेश पटेल के पास अपना लाइसेंसी रिवाल्वर है. ऐसे में उनपर बंदूक कि नोंक पर अपहरण करने की बात भी पुलिस अब गंभीरता से ले रही है और क्रितेश पटेल सहित उसके अन्य तीनों साथियों की तलाश में जुट गयी है.

अपहरणकर्ता स्ट्रिंगर को बचाने में जुटे कई राष्ट्रीय चैनल के संवाददाता-स्ट्रिंगर : एक राष्ट्रीय चैनल के ऊपर अपहरण और छिनैती का मामला गुजरात में इन दिनों चर्चा का विषय बन गया हैं. पिछले कई दिनों से पुलिस की गिरफ्त से बाहर इस स्ट्रिंगर को बचाने में उसके आका अब आगे आ रहे हैं और बताया जाता है कि सूरत से लेकर अहमदाबाद तक इन रिपोर्टरों ने लॉबिंग कर रखी है. ऐसे में उसकी गिरफ़्तारी को लेकर माहौल काफी गर्म है. हर राज्यों या सेंटरों की तरह ही यहाँ भी नेशनल चैनल के पत्रकारों का दो अलग-अलग ग्रुप हैं, जो सीधे तौर पर एक दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हैं. इनकी प्रतिद्वंदिता इस कदर भी है कि बस चले तो वे एक दूसरे को चैनल की नौकरी तक से निकलवा दें. हाल ही में एक रीजनल चैनल के पत्रकार को विरोधी ग्रुप ने एक षड़यंत्र के तहत बाहर का रास्ता दिखा दिया हैं.

इस गुट के मुखिया कि बात करें तो जानकर ताज्‍जुब रह जायेंगे कि स्टार न्यूज, जी न्यूज, टाईम्स नाऊ, सीएनएन-आईबीएन, सीएनबीसी आवाज़, न्यूज एक्स, युटीवी-आई न्यूज चैनलों के अलावा कई अख़बार और याहू न्यूज की स्ट्रिंगरशिप इनके पास ही है.  सूरत में मिनी नोएडा बनानेवाले पटेल परिवार में इतने चैनल होने के बॉवजूद भी मंशा यही होती है कि किसी बाहरी शख्‍स जो उनके गुट में न हो उसे टिकने न दिया जाए. गुट के मुखिया की मनमानी के चलते कई स्ट्रिंगरों ने उनसे किनारा करना मुनासिब समझा और तो कई जो उसके एहसान तले दबे हुए हैं या यूँ कह लें कि उसकी काबिलियत पर अपना नाम देकर राष्ट्रीय चैनल में जगह पाने वाले लोग आज भी उसकी चाटुकारिता में लगे पड़े हैं. जिस में टीआरपी में नंबर एक की दावेदारी रखनेवाला चैनल का स्ट्रिंगर भी शामिल हैं,  जो कुछ साल पहले तक शादियों में फोटोग्राफी करता था और एक दिन गुट के मुखिया के पास कैमरा न होने की वजह से उसे अपने काम के लिए बुलाया गया,  बस क्या था उसका नसीब जग उठा और 'जंगल में नाचा मोर देखा किसने' कहकर उसे इस चैनल का स्ट्रिंगर बनवा दिया.

तब से लेकर अबतक वो उसी भरोसे के अपनी सेवा में रहते हैं.  इतना ही नही इस स्ट्रिंगर ने भी अपने गुरु की तरह सीख लेते हुए कई न्यूज एजेंसी की स्ट्रिंगरशिप अपने और अपने बेटे के नाम से ले रखा है. इसी भरोसे की कड़ी में क्रितेश पटेल का नाम भी शामिल है,  जिसने अपने चाटुकारिता के बल पर सहारा समय का स्ट्रिंगर बनाने का गौरव प्राप्त किया हैं और यही कारण है कि उसके गुरु के लिए भी यह साख की बात बन गयी है कि आखिर किसी भी तरह से उसे अपहरण के मामले से कैसे दूर करें. बताया जाता है कि गुरु ने अहमदाबाद में बैठे अपने आकाओं से इसके लिए सिफारिशें शुरू कर दी है. चूँकि गुजरात हाई कोर्ट के आदेश से मामला दर्ज हुआ है,  ऐसे में आकाओं को भी पसीना छूट रहा है. खैर देखना यह होगा कि सहारा समय प्रबंधन अपने इस बहादुर स्ट्रिंगर के खिलाफ कोई कार्रवाई करता भी है या नही.. या आका सब संभाल लेंगे?

गुजरात पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर.


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