खबर भ्रामक है, न सदमें से मौत हुई और न मैं निकाला गया : अंशु दीक्षित

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अमर उजाला, लखनऊ में कार्यरत रिपोर्टर अंशु दीक्षित ने भड़ास4मीडिया को फोन कर सूचना दी कि उनके बारे में जो खबर ''संपादक ने पत्रकार को नौकरी से निकाला, सदमे ने ले ली ससुर की जान''प्रकाशित की गई है, वह पूरी तरह भ्रामक है. उनके ससुर की मौत उन्हें कथित तौर पर नौकरी से निकाले जाने के सदमें से नहीं हुई है बल्कि उनकी पहले से तबीयत खराब थी और उनका इलाज चल रहा था.

अंशु ने कहा- मुझे नौकरी से कतई नहीं निकाला गया है और न ही मेरी संपादक से कोई अनबन है. अंशु का कहना है कि अमर उजाला में किसी को भी खड़े खड़े निकाले जाने की परंपरा नहीं रहा है. ज्यादा से ज्यादा ट्रांसफर हुआ करता है. पर मैं आज भी यहां अमर उजाला में काम कर रहा हूं. कुछ लोगों ने भ्रामक खबर फैलाई है. इस खबर से मेरी नौकरी पर आंच आ सकती है. खबर छापने से पहले मुझसे पूछा तक नहीं गया. यह गलत बात है. इस खबर के खिलाफ मैं साइबर क्राइम में केस दर्ज कराऊंगा.

इस प्रकरण पर भड़ास4मीडिया का कहना है कि घटना की सूचना मिलने के बाद भड़ास4मीडिया की तरफ से अंशू दीक्षित के मोबाइल पर फोन किया गया पर उनका फोन स्विचआफ था. अमर उजाला, लखनऊ के संपादक पंचोली को भी फोन किया गया पर उन्होंने फोन नहीं उठाया. रही बात अमर उजाला, लखनऊ आफिस में संपादक पंचोली और रिपोर्टर अंशू के बीच अनबन की और नौकरी से निकाले जाने की तो भड़ास4मीडिया ने इस बारे में लखनऊ के अपन सोर्सेज से बात कर घटना की पुष्टि की व विस्तृत जानकारी ली. साथ ही यह खबर पूर्वांचलदीप डाट नेट पर भी प्रकाशित हुई थी, जिससे घटना होने की पुष्टि हुई. इसी आधार पर खबर का प्रकाशन किया गया. अब जब अंशू दीक्षित ने खुद फोन कर पूरी स्थिति स्पष्ट की है तो उनका पूरा वर्जन प्रकाशित कर दिया गया है. रही बात साइबर क्राइम में केस दर्ज कराने की तो उसका स्वागत है. इस देश में हर किसी पीड़ित को लोकतांत्रिक तरीके से न्याय पाने का हक है और इस हक का भड़ास4मीडिया सम्मान करता है.


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