पत्रकार सिम्मी की जान लेने वाले को दो साल जेल की सजा

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बुधवार को चंडीगढ़ जिला अदालत द्वारा लापरवाही से वाहन चलकार प्रतिभावान पत्रकार और युवा कवि सिम्मी मरवाहा (24 वर्षीय, अविवाहित) की जान लेने के आरोप में गुरजीत सिंह निवासी गांव त्‍यूड तहसील खरड़ जिला मोहाली को 2 वर्ष कैद और 10 हजार रुपए जुर्माना अदा करने की सज़ा सुनाई गई।

सिविल जज जूनियर डिवीजन संजय कुमार शर्मा की अदालत द्वारा दिए गए फैसले में कहा गया कि गुरजीत सिंह को आईपीसी की धारा 279 के तहत 6 माह कैद, धारा 304ए के तहत 2 वर्ष कैद कुल 2 वर्ष कैद भुगतनी होगी और 10 हजार रुपए जुर्माना अदा करना होगा। अगर वह 10 हजार रुपए नहीं अदा करता है तो उसे महीने की और सज़ा काटनी पड़ेगी। धारा 279 के तहत 6 माह कैद और 304ए के तहत 2 बरस कैद की सज़ाए एक साथ चलेगी।

साढ़े 8 बरस, 5 जज, 74 सुनवाईयां- थाना सेक्टर 36 चंडीगढ़ द्वारा एफआईआर नंबर 99,  तिथि 22 मार्च 2003 को दर्ज किए गए इस केस को साढ़े 8 वर्षों तक चली सुनवाई के दौरान 5 जज सुरिंदर भारद्वाज, जसविंदर सिंह, ए एस शेरगिल, अमनदीप कौर और संजय कुमार शर्मा ने 74 सुनवाईयों में पूरा किया।

ऐसे हुआ था हादसा- हादसे वाले दिन सिम्मी काइनैटिक होंडा चलाकर, फुल कवर फेस हेलमेट पहने हुए सेक्टर 20 स्थित अपने सिटी चैनल चंडीगढ़ के कार्यलय जा रही थी। सुबह 9:40 बजे जब वह सेक्टर 42,43,52,53 बस स्टैंड चौंक चंडीगढ़ रोड पर पहुंची तो आरोपी बस चालक गुरजीत सिंह एपीजे स्कूल मुंडी खरड़ की बस लेकर उसके पीछे आ रहा था, लापरवाही और तेज रफ्तारी से बस चला रहे गुरजीत ने बस को सिम्मी के पीछे आते हुए सीधा ही उसके ऊपर चढ़ा दिया था। जिस कारण सिम्मी का निधन हो गया था। गौर हो कि जिस एपीजे स्कूल मुंडी खरड़ की बस ने सिम्मी को रौंदा वह भारतीय स्वतंत्रा संग्राम के लिए जाने जाते कामरेड जगदीश चंद्र के रिश्तेदार और स्कूल मालिक जसबीर चंद्र का है।

सज़ा तो मुझे मिली- सिम्मी की मां और हिंदी, पंजाबी साहित्य जगत की विख्यात हस्ती कवियत्री राजिंदर रोज़ी ने कहा कि बेटी के जाने के बाद से जो सज़ा उनको बीत चुके साढ़े 8 वर्षो से मिल रही है, वह तो उनकी अंतिम सांस तक जारी रहेगी। गौर हो कि सिम्मी ने भास्कर पत्रकारिता अकादमी भोपाल एमपी से पत्रकारिता की ट्रेनिंग ली थी। जिसके बाद वह दैनिक भास्कर चंडीगढ़ और फिर जी न्यूज ग्रुप के सिस्टर सिटी चैनल चंडीगढ़ के साथ जुडी।


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