यूपी पुलिस की गुंडई : पत्रकार को घर से ले जाकर फर्जी मामले में फंसाया

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हरदोई जिले के पाली थाने की पुलिस ने राष्‍ट्रीय सहारा अखबार के एक पत्रकार को घर से घसीट कर ना सिर्फ सरेआम उसकी पिटाई की, बल्कि उसे बचाने आई माँ और बहन को भी नहीं बख्शा. पत्रकार का कुसूर सिर्फ इतना था कि पाली कसबे में अवैध रूप से हो रहे स्मैक और गोकशी के कारोबार की खबर उसने अपने अखबार में प्रकाशित की थी.

कहते हैं कि खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे, जब पुलिस इन अवैध धंधों को नहीं रोक पाई, या यूँ कहें कि पुलिस उनसे अच्छी खासी रकम वसूल करती है, इसलिए जान बूझकर उनके संरक्षण में स्मैक और गोकशी का धंधा फल फूल रहा है. अब आपको बताते हैं कि पूरा वाकया है क्या? पिछले कुछ दिनों से पाली कस्‍बे में अवैध रूप से पुलिस की मिली भगत से बिक रही स्मैक और गोकशी की खबर राष्ट्रीय सहारा अखबार में स्थानीय संवाददाता शोभित मिश्र ने कई बार प्रकाशित की थी, चुकी पाली पुलिस को इन अवैध कारोबारियों से महीने में अच्छी खासी रकम मिलती है और अख़बार में छपने से ना सिर्फ उनकी छवि धूमिल होती है, बल्कि अधिकारियों के संज्ञान में भी आ जाती है,  इसलिए पाली पुलिस ने उक्त पत्रकार के घर पर धावा बोलकर उसकी जमकर पिटाई की और थाने ले जा कर बंद कर दिया.

जिला स्तर पत्रकारों ने जब अधिकारियों से इसकी वजह पूछी तो पहले तो उन्होंने बताया कि उक्त पत्रकार स्मैक का धंधा करता है और स्मैक सहित पकड़ा गया है. बाद में पत्रकारों के हस्तक्षेप से पुलिस ने उसे स्मैक में तो नहीं बंद किया लेकिन सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में जेल भेज दिया. आरोप पत्र में ये भी लिखा कि उक्त पत्रकार ने सिपाही की वर्दी फाड़ दी, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि घर पर दबिश देने गए सिपाही ने वर्दी पहनी ही नहीं थी और दूसरी सबसे ख़ास बात ये कि साढ़े छह फीट के देवेन्द्र यादव नामक सिपाही की दुबले पतले और चालीस किलो वज़न वाले पत्रकार ने सिपाही की वर्दी कैसे फाड़ दी, यह किसी की समझ में नहीं आ रहा है. जबकि पुलिस ने यही आरोप लगाया है.

सबूत के तौर पर साथ में वो फोटो भी दिया जा रहा है,  जिस में साढ़े छह फीट का सिपाही बिना वर्दी में शोभित को उसके  घर से खींच कर एवं मारपीट कर जबरन अपने साथ ले जा रहा है, जिसका विरोध उसकी माँ और बहन कर रही हैं, जो कि स्वाभाविक है. किसी शख्स को सादे कपडे़ पहने हुए कोई घर में घुस कर मारे पीटे और जबरन अपने साथ ले जाये तो घर वाले तो विरोध करेंगे ही. फिलहाल शोभित मिश्र जेल में है और उसकी ज़मानत अभी नहीं हुई है, लेकिन इस सारे मामले की जानकारी हरदोई के एसपी को दिए जाने के बावजूद ईमानदार कहे जाने वाले एसपी ने भी अपने थानेदार का ही पक्ष लिया, और दोषी पुलिस कर्मी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. इस घटना को लेकर जिले के पत्रकारों में खासा रोष है. कई पत्रकार संगठनों ने पीड़ित पत्रकार को न्याय दिलाने के लिए लडाई लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है.

हरदोई से आमिर किरमानी की रिपोर्ट.


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