मुरादाबाद के कई पत्रकारों के खिलाफ दंगा भड़काने की जांच

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मुरादाबाद में पिछले दिनों भड़के दंगों के मामले में प्रशासन कुछ पत्रकारों की भूमिका की जांच करा रहा है. इसमें इलेक्‍ट्रानिक मीडिया एवं प्रिंट मीडिया दोनों माध्‍यमों के कुछ पत्रकारों की जांच कराई जा रही है. वैसे इन पत्रकारों का कहना है कि प्रशासन अपनी गलती छुपाने के लिए जानबूझकर उन्‍हें फंसाने की साजिश रच रहा है. वह अपनी नाकामी हम पत्रकारों पर थोपने की कोशिश कर रहा है.

इस संदर्भ में आईबीएन7 के रिपोर्टर फरीद शम्‍सी ने आरोप लगाया है कि उन्‍हें फंसाने की कोशिश एडीएम सिटी अवनीश कुमार रच रहे हैं. इस बारे में अवनीश कुमार से बात की गई तो उन्‍होंने कहा कि दंगों के दौरान कुछ पत्रकारों की भूमिका संदिग्‍ध थी. इनकी जांच कराई जा रही है. इनकी अफवाहों की वजह से हालात और बिगड़े, फंसाने जैसी बात कोई बात नहीं है. जांच चल रही है. इधर आईबीएन7 के पत्रकार फरीद शम्‍सी ने भड़ास को पत्र भेजकर अपना पक्ष रखा है. नीचे फरीद शम्‍सी का पत्र.

मुझे फंसाने की साजिश रच रहे हैं एडीएम सिटी : फरीद शम्‍सी

मैं ने हमेशा किसी भी न्यूज को कवर करने से पहले देश और अपने शहेर के बारे में सोचा है,  इस सब के बाद मुझे मिला क्‍या एक इल्जाम कि मैंने मुराबाद में दंगा भड़कया और ये सब मुझे इस लिये मिला कि मैं एक मुसलमान रिपोटर हूं.  दिनांक 08 अगस्त 2011 को मुरादाबाद के थाना कटघर क्षेत्र की पुलिस चौकी दस सराय के पास कांवरियों ने शाम पांच बजे से संभल जाने की ज़िद को लेकर पुल पर जाम लगा रखा था,  जब मुरादाबाद प्रशासन ओर पुलिस ने उन्हें वहां जाने से रोका तो वो हंगामा करने लगे और बडे़-बडे़ ट्रक पर साउण्‍ड सिस्टम लगाकर जयन्तिपुर के सामने मुस्लिम आबादी की तरफ गली नंबर एक रहमत नगर में जाने लगे,  तो वहां खडे़ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इसका विरोध किया, तब वहां मौजूद एसपी सिटी पियूष ने कांवरियों को नई परंपरा डालने से रोक दिया.  इस पर वहां खडे़ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पुलिस का सम्मान किया और उन्हें मुबारकबाद दी.  इस को देख कर वहां मौजूद कांवरियों को लगा कि ये तो उनका अपमान हो गया है,  तो उन्हों ने गली नंबर एक रहमत नगर के सामने खडे़ होकर धर्मिक नारेबाज़ी की,  जिस पर पुलिस ने नारे लगा रहे लोगों पर हल्‍का बल प्रयोग कर उन्हें वहां से खदेड़ दिया.

इसी दोरान रात आठ बजे और नौ बजे के बीच कांवरियों का एक बेड़ा वहां से डेक बजाते हुये गुजरा तो वहां खडे़ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इसका विरोध किया और जब बेडे़ को लोगों ने डेक बंद नहीं किया तो किसी युवक ने बेडे़ पर पत्थर मार दिया. मैंने अपने आसपास देखा तो मुझे कांवरियों के बेडे़ के साथ सिर्फ एक पुलिसकर्मी दिखा. मैं ने मौके की नजाकत को देखते हुये तुरंत सीएनईबी, मुरादाबाद के रिपोर्टर इजहार नबी से मुस्लिम टोपी लेकर अपने सर पर पहना और हंगामा कर रहे मुस्लिम समुदाय के लोगों को समझाया कि वो इस तरह की घटिया हरकत न करें और ये बात ठीक नहीं है. और मैंने वहां खडे़ कुछ लोगों से कहा कि आप इन्हें यहां से निकलने मे मदद करें तो वहां खडे़ कुछ लोगों मेरे साथ दो किलोमीटर तक पैदल चलकर उन्हें वहां से सुरक्षित निकाला और जब हम लोग वापस रहमत नगर की तरफ जाने के लिये मुडे़ तो हमें वहा एलआईयू मुरादाबाद में तैनात सुनील कुमार मिले और उन्हों ने हमें मुबारकबाद दी कि हमने बहुत अच्‍छा काम किया है. और वो हमारे पीछे-पीछे आ रहे थे.  उन्हों ने ने सब देखा कि कैसे हमने  कांवरियों की मदद की.

इधर जब हम रहमत नगर गली नंबर एक पहुंचे तो देखा माहौल एकदम शांत था. मैं और इजहार नबी वहां खड़े एसपी सिटी पीयूष और एडीएम सिटी अवनीश कुमार से बातचीत कर ही रहे थे कि इसी बीच वहां एक अजनबी युवक आया और मुझे इशारे से अपने पास बुलाकर कहने लगा कि वहां से थोडी दूरी पर एक फर्म अपर इंडिया के आगे खड़ी मुस्लिम समुदाय की गाडि़यों में कांवरिये आग लागा रहे है.  इस पर मैं ने दौड़ कर वहां खडे़ एसपी सिटी पीयूष कुमार और  एडीएम सिटी अवनीश कुमार से कहा कि आप वहां पुलिस को भेजिए वहां कुछ लोग गाडि़यों में आग लागा रहे हैं,  अगर वो कामयाब हो गये तो माहौल बिगड़ जायेगा,  लेकीन वहां खडे़ एडीएम सिटी अवनीश कुमार ने कहा कि वहां कुछ नहीं है लोग बस माहौल खराब करना चाहते हैं.  मैंने उनसे कहा कि आप जानो ये खबर सही है या गलत.  वो दोनों अधिकारी मुस्कराते हुये आगे बढ़ गए.  उसके दस मिनट बाद मैं और एसएचओ थाना कटघर जब अपर इंडिया फर्म के पास पहुंचे तो देखा कि कुछ लोग वहां खड़ी गाडि़यों में आग लगा रहे हैं.

मुस्लिम समुदाय के लोगों की गाडि़यों में आग लगाने की खबर जब फैली तो मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी वहां खड़े एक ट्रक में आग लगा दी.  हालात बिगड़ते गये और फिर प्रशासन ने मुरादाबाद में धारा 144 लगा दी.  अब नौ अगस्त को समस्त हिंदू दलों ने मुरादाबाद में धारा 144 लगे होने के बावजूद दस सराय क्षेत्र मे जनसभा करनी शुरू कर दी और इस सभा में मौजूद शिवसेना के लड़कों ने वहां से गुजर रही कारों पर पथराव किया.  उस वक़्त खुद मुरादाबाद के ज़िलाधिकारी समीर वर्मा और डीआईजी जनसभा स्थल से दो सौ मीटर की दूरी पर पुलिस चौकी दस सराय में थे और जनसभा स्थल पर मौजूद एक हजार लोगों की भीड़ में एसपी सिटी पीयूष कुमार और एडीएम सिटी अवनीश कुमार खड़े थे, जबकि यह गलत था क्‍योंकि मुरादाबाद में धारा 144 लगी हुई थी,  लेकिन इस सबके बावजूद वो सब लोग इन अधिकारियों के सामने खडे़ होकर इनका मजाक उडा रहे थे.

इस सबकी शिकायत जब मैं ने डीआईजी मुरादाबाद से की और कहा कि अगर एडीएम सिटी मेरी बात मानकर अपर इंडिया पर पुलिस फोर्स भेज देते तो आज मुरादाबाद में इतनी आग नहीं लगती.  बस ये बात पता नहीं कैसे एडीएम सिटी को हो गई कि मैं ने उनकी शिकायत डीआईजी से की है और इससे नाराज होकर उन्‍होंने एक पटवारी और तहसीलदार से मेरे और स्‍टार न्‍यूज के रिपोर्टर उबेद के खिलाफ झूठी और बेबुनियाद रिपोर्ट बनाकर उत्‍तर प्रदेश शासन को हमारे खिलाफ जांच के लिए भेज दी, जबकी वो ये भूल गये कि हमारे पास कैमरे में सब कुछ रिकार्ड रहता है और अब ये तो जांच के बाद ही पचा चलेगा कि कौन सच्‍चा और कौन झूठा है. फिलहाल तो मुझे ये लगता है कि एडीएम सिटी अपनी गर्दन बचाने के लिए हमारी गर्दन फंसाना चाहते हैं, लेकिन उन्‍हें ये नहीं पता कि झूठ के कभी पांव नहीं होते.

फरीद शम्‍सी

रिपोर्टर, आईबीएन7

मुरादाबाद


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