पत्रकार नेता अजय मुखर्जी के पिता एवं स्‍वतंत्रता सेनानी विशेश्‍वर मुखर्जी का निधन

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काशी मजदूर आंदोलन के पुरोधा, स्वतंत्रता सेनानी व बामपंथी विचारक विशेश्वर मुखर्जी का 92 वर्ष की अवस्था में 22 अगस्त को चाहमेमा (घुघरानी गली) स्थित उनके आवास पर हृदयगति रुकने से निधन हो गया। वाराणसी जिला प्रशासन के प्रतिनिधियों ने मुखर्जी के आवास जाकर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के गोदौलिया स्थित कार्यालय होती हुई उनकी शवयात्रा मणिकर्णिका घाट पहुंची, जहां उनके पुत्र एवं समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन के मंत्री अजय मुखर्जी ने मुखाग्नि दी।

विशु दा के नाम मशहूर व पूर्वांचल के श्रमिक आंदोलन के जनक रहे विशेश्वर मुखर्जी ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध लड़े गये जनयुद्ध के मजबूत सिपाही थे। सन 1921 में शिमला में जन्मे कामरेड मुखर्जी की आरंभिक शिक्षा देवघर में हुई। इसके बाद वे काशी आये तो यहीं के होकर रह गए। देश को आजाद कराने की भावना से ओत प्रोत कामरेड मुखर्जी ने सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कालेज में शिक्षा प्राप्त करने के दौरान स्कूल परिसर में तिरंगा फहराकर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़ाई शुरू की तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1939 में जब उन्‍होंने पहली बार जेल यात्रा की तो उस समय वो इंटर के छात्र थे। जेल में श्रीप्रकाश जी, डा.  राधाकृष्ण, सम्पूर्णानंदजी के सानिध्‍य ने उन्‍हें और तपा दिया। श्री मुखर्जी पेरोल पर इंटर की परीक्षा देकर प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए। इसके पश्चात वो 1942 व 1944 में भी स्वाधीन भारत के लिए जेल गए। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से विधि की डिग्री हासिल करने वाले कामरेड मुखर्जी ने प्राप्त शिक्षा को मजदूर हितों के लिये समर्पित कर दिया।

पूर्वांचल में मजदूरों को संगठित करने के साथ ही उनके हितों की लड़ाई में सम्पूर्ण जीवन बितानें वाले कामरेड मुखर्जी ने वाराणसी में 1945 में इक्का-तांगे वालों का संगठन खड़ा कर ट्रेड यूनियन की शुरुआत की। इसके बाद जलकल कर्मचारी यूनियन, सिनेमा स्टाफ कर्मचारी यूनियन, दुकान व वाणिज्य कर्मचारी यूनियन, बिजली कर्मचारी यूनियन आदि को स्‍थापित किया तथा मजदूरों के हकों के लिए लड़े। विशु दा ने श्रमिक सम्स्याओं पर संबोधन हेतु रूस, बेल्जियम, चीन, जर्मनी, चेकोश्लोवाकिया, पोलैंड, हंगरी व ब्रिटेन की कई बार यत्रा की। छात्र जीवन से ही भारतीय कमुनिस्ट पार्टी से जुड़े श्री मुखर्जी पार्टी में कई प्रमुख पदों पर रहने के साथ ही अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन के सचिव भी रहे।

संघर्षपूर्ण जीवन के प्रतीक के रूप में पहचान बनाने वाले कामरेड मुखर्जी के निधन से श्रमिक आंदोलन को हुई क्षति अपूरणीय है। कामरेड विशेश्वर मुखर्जी के निधन की खबर मिलते ही श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों का तांता लगा रहा। श्रमिक संगठन, बुद्धजीवी, साहित्यकार, पत्रकार, अध्यापक, व्यापारी, अधिवक्ताओं व समाजसेवियों ने उनके आवास पर पहुँचकर अपने प्रिय पथ प्रदर्शक के अं‍तिम दर्शन किये और श्रद्धा सुमन अर्पित किये। उनकी अंतिम यात्रा 23 अगस्त को अपराह्न में उनके आवास से शुरू हुई। उनके अंतिम संस्‍कार में विधायक श्यामदेव राय चौधरी 'दादा', विधायक अजय राय, एडीएम सिटी एमपी सिंह, आज प्रेस के प्रबंधक अमिताभ चक्रवर्ती व शशिकांत त्रिपाठी, काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष योगेश गुप्ता, प्रेस क्लब के अध्यक्ष विकास पाठक, वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ भट्टाचार्या समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे। कामरेड मुखर्जी अपने पीछे पुत्र अजय मुखर्जी व एक पुत्री, नाती पोते पोती सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गए है। (इनपुट : क्‍लाउन टाइम्‍स)


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