आरटीआई डालने पर पत्रकार को डीएफओ ने बता दिया माओवादी

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छत्‍तीगढ़ के कोरबा में डीएफओ ने एक पत्रकार को इसलिए माओवादी बना दिया क्‍योंकि उसने आरटीआई से उसके भ्रष्‍टाचार के बारे में जानकारी मांगी थी. डीएफओ डीएम को लिखे पत्र में पत्रकार को माओवादी और तस्‍कर बता कर कार्रवाई की मांग की. जांच में जब सारे आरोप झूठे पाए गए तो डीएम ने शासन से डीएफओ की शिकायत की. पर उसे सजा मिलने की बजाय बेहतर पोस्टिंग मिल गई.

प्रेम गुप्‍ता कोरबा से प्रकाशित मूलमंत्र के संपादक हैं. उन्‍होंने आरटीआई के तहत वन विभाग में चल रहे भ्रष्‍टाचार की जानकारी मांगी थी. जानकारी देने की बजाय डीएफओ हेमंत पाण्‍डेय ने जिलाधिकारी को पत्र लिखा कि प्रेम गुप्‍ता, जो अपने को पत्रकार बताता है, वो माओवादी गतिविधियों तथा जंगली जानवरों की तस्‍करी में संलिप्‍त है.

पत्र मिलने के बाद जिलाधिकारी आरपीएस त्‍यागी ने तत्‍कालीन एसपी रत्‍नलाल डांगी को इस मामले की जांच करने के लिए कहा. पुलिस ने पूरे मामले की जांच के बाद पाया कि प्रेम गुप्‍ता पर लगाए गए सारे आरोप गलत हैं. उन्‍होंने अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंप दी. इसके बाद मैंने भी उक्‍त डीएफओ के खिलाफ डीएम से कार्रवाई करने करने के लिए लिखित आवेदन दिए. इसके बाद डीएम ने डीएफओ के खिलाफ शासन को पत्र लिखे.

गुप्‍ता बताते हैं कि डीएम के पत्र के बावजूद कार्रवाई करने की बात तो दूर फारेस्‍ट विभाग ने उक्‍त भ्रष्‍ट डीएफओ को कोरबा से भी बढि़या पोस्टिंग करके बिलासपुर भेज दिया. प्रेम आज भी माओवादी होने के आरोप लगाए जाने को याद करके सहम जाते हैं. नीचे मिड डे में इस मामले में प्रकाशित शहर खान की रिपोर्ट.

'Tainted' DFO brands RTI applicant Maoist

Sahar Khan in Raipur

IT'S A classic case of recrimination by the bureaucracy to thwart an applicant's attempts to expose its wrongdoings though the RTI Act. A tainted district forest officer ( DFO) in Korba, near Raipur, accused the editor of a local Hindi daily of being a Maoist when the latter sought details of his office.

The DFO, who is accused of corruption and was approached for the information, complained to the collector instead of providing the information.

The editor of Moolmantra was shocked to learn that he was suspected of being a Maoist.

' Prem Gupta, who claims to be a mediaperson, appears to be involved in Maoist activities and has been smuggling of wildlife... strong deterrent action ( should) be taken against him,' DFO Hemant Pandey stated in his letter.

Collector RPS Tyagi immediately asked the district police to ' thoroughly investigate the matter. The SP, however, found the allegation baseless. ' After inquiry, the charges couldn't be proved,' former district police chief Ratanlal Dangi said.

' I appealed to the district collector for taking punitive action against the DFO, who was already served three notices by the state's economic offences wing. He had caused huge loss to the state exchequer. On my application, the collector recommended action against the officer,' Gupta said, pointing out that he never got the information he had sought from the DFO. Rather than punishing Pandey after the collector's letter, the state's forest department has handed him a better posting in Bilaspur. When reached for his comments, Pandey was not willing to clear the air on the issue. साभार : मेल टुडे


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