कवि सम्‍मेलन में जागरण, बरेली के पत्रकारों ने सुनाई लात-घूंसों की कविता

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: अपडेट : दारू के नशे में जमकर हुई आपस में मारपीट : अब तक पत्रकार कलम से लड़ाई लड़ने के लिए जाना जाता था, पर दैनिक जागरण, बरेली में कलम के साथ लात-घूंसा संस्‍कृति भी पनप गई है. यह शायद उसी पेड़ का फल है जिसे चन्‍द्रकांत त्रिपाठी उगाकर गए हैं. वाकया सोमवार रात की है. दैनिक जागरण बरेली में अपना 22वां स्‍थापना दिवस मना रहा था. बिशप मंडल इंटर कॉलेज में कव‍ि सम्‍मेलन का आयोजन किया गया था. इसमें मुख्‍य महाप्रबंधन एएन सिंह, संपादकीय प्रभारी अवधेश गुप्‍ता समेत जागरण के तमाम वरिष्‍ठ लोग मौजूद थे.

मंच के ठीक पीछे कुछ लोगों की दारू पार्टी भी चल रही थी. इसी दारू पार्टी में जनरल डेस्‍क पर काम करने वाले रमेश चंद्र राय, इनपुट हेड पवन सक्‍सेना समेत कई और कर्मचारी मौजूद थे. पीने के दौरान ऑफिस के काम की भी बातें हो रही थीं. हंसी-मजाक हो रहा था, छींटाकशी भी हो रही थी. इसी बीच वरिष्‍ठ सहयोगी रमेश चंद्र राय ने रिपोर्टिंग में भेजे जाने पर नाराजगी जाहिर की. उन्‍हों ने कुछ आरोप भी लगाए जिससे पवन सक्‍सेना तिलमिला गए तथा रमेश पर हाथ छोड़ दिया. इसके बाद तो रमेश पर पवन सक्‍सेना के लोग बुरी तरह टूट पड़े.

सूत्रों ने बताया कि रमेश राय पर पवन सक्‍सेना के अलावा नरेश गंगवार, यशवीर सक्‍सेना, दीप शर्मा तथा कानपुर भेजे जा चुके प्रवीण शर्मा ने मिलकर हमला बोल दिया. प्रवीण कानपुर से आए हुए थे. मारपीट के साथ खूब गाली ग्‍लौज भी की गई. रमेश राय को बुरी तरह मारापीटा गया. इस दौरान वहां काफी हो हल्‍ला हुआ. किसी तरह दूसरे लोगों ने रमेश राय को बचाया. उनको काफी अंदरूनी चोटें आईं. वो दो दिनों से कार्यालय भी नहीं जा रहे हैं. यह पूरी घटना वरिष्‍ठ लोगों की मौजूदगी में हुई. यह तो रही मारपीट होने की घटना. अब आपको बताते हैं अंदर की असली कहानी.

रमेश चंद्र राय जनरल डेस्‍क पर कार्यरत थे. परन्‍तु उन्‍हें वहां से हटाकर रिपोर्टिंग में लगा दिया गया. 52 की अपनी उम्र में रमेश राय ने कभी रिपोर्टिंग नहीं की थी, लिहाजा रिपोर्टिंग में भेजे जाने से वे नाराज थे. पर नौकरी के चलते किसी तरह रिपोर्टिंग की जिम्‍मेदारी संभाल रहे थे. इसी बीच जनरल डेस्‍क पर कार्यरत श्‍यामेन्‍द्र कुशवाहा किसी दुखद घटना के बाद छुट्टी लेकर इलाहाबाद स्थित अपने घर गए हुए थे. तब रमेश चन्‍द्र राय को रिपोर्टिंग के साथ श्‍यामेन्‍द्र के काम भी जिम्‍मेदारी अस्‍थाई रूप से संभालने को कह दिया गया. यह रमेश चंद्र राय को नागवार गुजरा.

रमेश ने दोहरी जिम्‍मेदारी निभाने से इनकार करते हुए इसकी शिकायत संपादक से की तथा सवाल उठाया कि इनपुट तथा आउटपुट में तैनात पवन सक्‍सेना तथा श्‍याम सुन्‍दर भाटिया काम नहीं करते हैं, बेवजह उन्‍हें परेशान करने की कोशिश की जा रही है. हालांकि कभी सीकेटी के खास रहे पवन, जो आजकल न्‍यूज एडिटर अवधेश गुप्‍ता के खास हैं, की सेहत पर इस शिकायत का कोई असर नहीं पड़ा परन्‍तु इसके बाद से ही पवन सक्‍सेना और उनके लोग रमेश राय से खफा चल रहे थे. और इन लोगों को 22 वें स्‍थापना दिवस पर हाथ आजमाने का मौका मिल गया, जिससे ये लोग चूके नहीं.

सबसे शर्मनाक बात तो यह रही कि इस सम्‍मेलन में कई प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे, जो जागरण के पत्रकारों की हरकत देखकर सन्‍न रहे गए. इस संदर्भ में जब पवन सक्‍सेना का पक्ष जानने के लिए फोन किया गया तो उन्‍होंने कॉल रिसीव नहीं किया, जिससे उनका पक्ष नहीं जाना जा सका. वहीं जब रमेश राय से इस मारपीट की जानकारी ली गई तो उन्‍होंने घटना की पुष्टि तो की लेकिन ज्‍यादा कुछ बताने से इनकार कर दिया. अब देखना है कि प्रबंधन इस मामले में लीपापोती करता है या कोई कार्रवाई करता है क्‍योंकि सारा मामला वरिष्‍ठों के सामने घटित हुआ है.

इस घटनाक्रम के बारे में प्रवीण शर्मा का कहना है कि रमेश राय पर हमला करने वालों में उनका नाम गलत जोड़ा गया है. वे उस कवि सम्मेलन वाले कार्यक्रम में जरूर थे पर उनका इस विवाद से कोई लेना-देना नहीं. प्रवीण का कहना है कि भड़ास4मीडिया पर उनका नाम प्रकाशित कर उनकी छवि को खराब करने की कोशिश की गई है, जो गलत है.


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