बीबीसी संवाददाता को तीन साल की सजा

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ताजिकिस्तान में एक अदालत ने बीबीसी संवाददाता उरिनबॉय उस्मानोव को एक प्रतिबंधित इस्लामी संगठन की गतिविधियों में लिप्त होने का दोषी घोषित किया है. अदालत ने उस्मानोव को हिज़्ब उत-तहरीर की गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में तीन साल की जेल की सज़ा सुनाई मगर राजकीय माफ़ी के तहत तुरंत उन्हें रिहा करने का आदेश भी दे दिया.

जून में गिरफ़्तार किए गए उस्मानोव ने आरोपों से इनकार किया है और बीबीसी ने ज़ोर देकर कहा है कि वह बतौर पत्रकार सिर्फ़ अपना काम कर रहे थे. जून में उनकी गिरफ़्तारी के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी काफ़ी आलोचना हुई थी और बीबीसी ने इस फ़ैसले की कड़ी निंदा की है. अधिकारियों ने उस्मानोव पर आरोप लगाया था कि उन्होंने ताजिक पुलिस को हिज़्ब उत-तहरीर के सदस्यों का ब्यौरा मुहैया नहीं कराया. वहीं उस्मानोव का कहना था कि हिज़्ब उत-तहरीर के कामकाज पर रिपोर्टिंग करते समय उनकी सिर्फ़ उस संगठन के सदस्यों से मुलाक़ात हुई थी.

सहायता : बीबीसी ने इस मौक़े पर एक बयान जारी करके कहा है, "मुक़दमे के दौरान ऐसा कोई भी सबूत नहीं आया जिससे किसी ग़लती का पता चलता और हमारे संवाददाता को सिर्फ़ पूरी तरह बरी करना ही हमें स्वीकार्य होगा." बीबीसी ग्लोबल न्यूज़ के निदेशक पीटर हॉरक्स ने इस मौक़े पर कहा कि बीबीसी उस्मानोव को पूरी सहायता देती रहेगी. हॉरक्स के अनुसार, "हमें उम्मीद है कि अपील के बाद उनकी प्रतिष्ठा एक लेखक और पत्रकार के रूप में फिर से स्थापित हो जाएगी."

उस्मानोव को 13 जून को गिरफ़्तार किया गया था. मुक़दमे के दौरान अदालत में उस्मानोव ने बताया था कि उन्हें हिरासत में पीटा गया था और सुरक्षाकर्मियों ने उनकी बाँह सिगरेट से जलाई थी. उन्होंने ये भी कहा था कि उनसे इक़बालिया बयान पर ज़बरदस्ती हस्ताक्षर करवाए गए थे. चार अन्य लोग भी दोषी पाए गए और उन्हें लंबे समय तक जेल की सज़ा सुनाई गई. उस्मानोव ने इस फ़ैसले के विरुद्ध ताजिकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का निर्णय लिया है. साभार : बीबीसी


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