वरिष्ठ पत्रकार रामजी बाबू का निधन

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: आज अखबार से करियर शुरू किया था : हिन्दुस्थान समाचार में महाप्रबंधक रहे : आईआईएमसी में अध्यापन भी किया : नयी दिल्ली : बीते जमाने के प्रख्यात पत्रकार एवं भारत में हिन्दी समाचार एजेंसी पत्रकारिता के पुरोधा माने-जाने वाले श्री रामजी प्रसाद सिंह का निधन इसी बुधवार को हो गया। वह 80 वर्ष के थे और कई वर्षों से हृदय की बीमारी से ग्रस्त थे। पिछले करीब 15 महीने से वह बिस्तर पर थे। उनके परिवार में पत्नी, दो पुत्र एवं एक पुत्री हैं।

भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद के अत्यंत करीबी रहे रामजी प्रसाद सिंह अपनी ईमानदारी, कर्मठता एवं अपनी सरलता के लिये अपनी पीढ़ी के पत्रकारों एवं नेताओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय थे। रामजी बाबू के नाम से जाने-जाने वाले श्री रामजी प्रसाद सिंह की कानूनी एवं संसदीय मामलों पर गहरी पकड़ थी। वह जिन दिनों उच्चतम न्यायालय की रिपोर्टिंग करते थे उन दिनों कानूनी पत्रकारिता करने वाले इक्के-दुक्के पत्रकार थे। वह पिछले कई वर्षों से पत्रकार बिरादरी से कट गये थे, जिसके कारण उनके निधन की खबर उनके अत्यंत करीबी रहे पत्रकारों को भी नहीं लगी।

उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत 1953 में पटना में की। उन्होंने आरंभिक वर्षों में दैनिक आज में काम किया। इसके बाद उन्होंने कई अन्य समाचार पत्रों में भी काम किया। वह 1958 में समाचार एजेंसी ‘‘हिन्दुस्थान समाचार’’ से जुड़ गये और बाद में इस समाचार एजेंसी के महाप्रबंधक बन गये। वर्ष 1983 में ’’हिन्दुस्तान समाचार’’ छोड़ने के बाद वह कुछ साल तक नयी दिल्ली के भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) में अध्यापन किया।

नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स (एनयूजे) और दिल्ली पत्रकार संघ (डीयूजे) ने उनके निधन पर शोक जताया है। एनयूजे के राष्ट्रीय महासचिव रास बिहारी तथा डीजेए के अध्यक्ष मनोज वर्मा ने कहा कि आज रामजी प्रसाद सिंह जैसे ईमानदार, कर्मठ, सहृदय और सरल पत्रकार लुप्त हो गये हैं। उन्होंने ताउम्र आर्थिक तंगी का सामना किया लेकिन कभी भी पत्रकारिता के मूल्यों से समझौता नहीं किया। उन्होंने जिस तरह की पत्रकारिता की वह आज भी मिसाल है। अखिल भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ ने भी श्री रामजी प्रसाद सिंह के निधन पर शोक जताया है।


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