साहित्‍य अकादमी के उपाध्‍यक्ष सतिंदर सिंह नूर का निधन

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नूरपंजाबी के वरिष्ठ साहित्यकार, आलोचक और साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष सतिंदर सिंह नूर का दिल्ली के अस्पताल में निधन हो गया। वे 70 वर्ष के थे तथा पंद्रह दिन से अस्वस्थ चल रहे थे। उनकी हालत में सुधार हो रहा था पर अचानक बढ़े रक्तचाप से उनकी तबीयत बिगड़ गई और डाक्टरों के प्रयास के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। पंजाब के कोटकपूरा जिले के रहने वाले नूर ने दिल्ली विश्वविद्यालय में 37 साल तक शिक्षक के तौर पर सेवाएं दीं। वे वहां पंजाबी के विभागाध्यक्ष भी रहे। पंजाबी के प्रसार-प्रसार में उनकी विशेष दिलचस्पी रही थी और उन्होंने अपना सारा जीवन इसी में लगाया।

वर्ष 2004 में उन्हें -कविता दी भूमिका- नामक पुस्तक पर साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी नवाजा गया था। उनकी अन्य पुस्तकों में -बिरख निपटारे, सरदल ते आर-पार, नाल-नाल तुरदियां, त चेरी दे फूल और सूरज ते मसीहा नामक प्रमुख है। वे आलोचक के साथ-साथ बेहतरीन कवि भी थे। उनके निधन से पंजाबी साहित्य जगत को ठेस लगी है। पंजाबी में साहित्य शिरोमणि पुरस्कार से सम्मानित डा. फूलचंद मानव और प्रो. योगेश्वर कौर ने आस्ट्रेलिया से नूर के परिवार को संदेश भेजकर दुख जताया है। उन्होंने कहा है कि नूर उनके अच्छे मित्रों में थे उनसे जब भी मुलाकात होती थी तो उसका मुख्य विषय पंजाबी भाषा के प्रचार और प्रसार को लेकर ही होता था। उन्होंने कहा कि पंजाबी साहित्य के लिए उन्होंने बहुत काम किया है जिसकी सराहना समय समय पर होती रही है।

महेन्‍द्र सिंह राठौड़ की रिपोर्ट.


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