एंकर से मारपीट करने वालों के आगे पूंछ हिलाती रही दिल्ली पुलिस!

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यशवंत जी... भारत सरकार को चाहिए कि वो पुलिस को एक नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा करे... और इस पुरस्कार को देने के लिए लोगों के वोट या एसएमएस के माध्यम से फैसला करे... तो मैं दिल्ली पुलिस को एसएमएस करूंगा... अब देखिए ना कि भारत में कोई पुलिस इतनी तेज नहीं होगी जितनी दिल्ली पुलिस... दिल्ली पुलिस दिल्ली की जनता का भले ही ख्‍याल न करे, लेकिन दिल्ली के मंत्रियों और विधायकों का पूरा ख्‍याल रखती है...

अब मैं आपको एक घटना बताता हूं जो रात दो बजे के करीब ए2जेड न्यूज चैनल के सामने घटित हुई... हुआ ये कि ए2जेड के एंकर अपनी ड्यूटी पूरी कर घर के लिए ऑफिस से निकले कि गेट के पास कुछ रईसजादे घर के गुंडे आफिस के सामने अपने में ही भद्दी-भद्दी गालियां कर रहे थे... तभी एंकर ऑफिस की गाड़ी में बैठने के लिए जैसे बढ़े कि रईसजादों ने ड्राइवर से मारपीट शुरु कर दी... अब एंकर ने देखा कि रईसजादे ड्राइवर के साथ मारपीट कर रहे हैं तो मानवता के नाते एंकर ने उनको रोकने की कोशिश की... तो इन लोगों ने ड्राइवर के साथ एंकर से भी मारपीट और गाली-ग्‍लौज करने लगे... जब इसकी सूचना पुलिस को दी गई तो पीसीआर की गाड़ी कुछ मिनट में ही पहुंच गई... पीसीआर कुछ समझ पाती तब तक दो लालबत्ती लगी गाड़ियां वहां पहुंची... इन गाड़ियों में ही ये रईसजादे अपने मां-बाप का नाम रौशन करने के लिए रात में निकलते हैं...

ये गाड़ी थी दिल्ली के ही मशहूर एमएलए रामवीर सिंह बिधुरी की... मैं उनको जानता नहीं इस गाड़ी के पीछे लगे स्टीकर पर लिखा मैंने देखा... पीसीआर मारपीट कर रहे आठ लोगों को वहां से लेकर करोलबाग थाने पहुंचती है, लेकिन वहां पर पहुंचकर आरोपियों की संख्या घटकर 4 हो जाती है... अब बात होती है थाने में एफआईआर दर्ज करवाने की... लेकिन पहले पुलिस अपने धर्म के मुताबिक समझौता करवाना चाहती है... जब मामला सुलझता नहीं दिखता तब पुलिस शिकायत दर्ज करती है... शिकायत दर्ज करने के दौरान पुलिस बचे चार आरोपियों को थाने में चाय पिलाती है, ये मानवता के नाते नहीं बल्कि जो आरोपी शराब पिए हैं, वो मेडिकल में साबित न हो सके इसलिए ऐसा किया... हालांकि मेडिकल में डाक्टरों ने आरोपियों को शराब पीया मान लिया... शिकायत तो पुलिस ने दर्ज कर लिया लेकिन एफआईआर के लिए सुबह की बात करने लगी...

सुबह की कहानी... बात जब नेता की हो तो भला पुलिस बेचारी क्या करती... आखिर उसे भी तो अपनी नौकरी इन्हीं नेताओं के रहम पर करनी होती है... पुलिस ने गाड़ी पर लगी लाल बत्ती को हटवा दिया और जो दिल्ली विधान सभा के पार्किंग का वैद्यता खत्म स्टीकर लगा था उसे भी हटवा दिया... पुलिस ने ये बयान भी दिलवा दिया कि मीडिया वालों ने जबरदस्ती पहले तो मारपीट की और मैकेनिक बुलाकर लालबत्ती लगवा दी... आरोपियों को पुलिस ने अपने चोटी से एड़ी तक का पूरा जोर लगाकर आरोप से मुक्त करवाने में जुट गई है... यशवंत जी हम चाहते हैं कि यदि हो सके तो दिल्ली पुलिस को आप भी नोबेल पुरस्कार दिलवाने में जरुर सहयोग दें...

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए मेल पर आधारित.


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