''आरटीओ के कर्मचारियों ने की मेरे साथ मारपीट''

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: मुख्‍यमंत्री को पत्र भेजकर अलीगढ़ के पत्रकार ने लगाई न्‍याय की गुहार : मैं रूप किशोर राजपूत ऑल जर्नलिस्‍ट क्लब का राष्ट्रीय सचिव तथा दिल्ली एवं पटना से प्रकाशित हिन्दी समाचार पत्र दैनिक पंच-पत्रिका का अलीगढ़ का प्रभारी हूं। मैंने एक गाड़ी मारुति 800, माडल 1996, न. यूपी 14/ डी 7620 खरीदी थी, जिसके समस्त कागजात गाड़ी मालिक से कहीं गुम हो गये हैं। मैं आरटीओ विभाग में जब डुप्लीकेट कागज बनवाने के लिये गया, वहां पर देखा कि विभाग में बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता, जब अधिकारी काम नहीं करते तो मजबूर होकर दलालों के सम्पर्क में जाना पड़ता है, लेकिन दलाल के माध्यम से तरह-तरह के आरोप लगाकर मुंह मांगे पैसे मांगे जाते हैं।

मैं स्वयं जब फार्म लेने के लिये आरटीओ विभाग पहुंचा तो फार्म आरटीओ में थे ही नहीं, मैडम ने कह दिया फार्म हमने दलालों के पास रखवा दिये हैं, जहां पर दो रुपये के फार्म के 20 रुपये वसूले जा रहे थे। फार्म लेकर सिग्‍नेचर कराने के लिये मैं ट्रांसफर बाबू रामप्रकाश दुबे के पास गया तो बाबू ने अगले दिन आने को कहकर टाल दिया, जब अगले दिन मैं 23 दिसम्‍बर की सुबह गाड़ी के मालिक को लेकर गया तो रामप्रकाश दुबे ने मेरे कागज ही फेंक दिये। जब एक दलाल ने बताया कि बाबू बिना पैसे लिये आपकी फाइल को साइन नहीं करेगा तब दलाल के माध्यम से बाबू को दो सौ रुपये दिये, तब फाइल को साइन किया। उसके बाद फाइल को कम्प्यूटर में दर्ज कराने के नाम पर अजब सिंह नाम के बाबू, जो कि प्राइवेट कर्मचारी हैं,  500 रुपये लेकर फाइल को कम्प्यूटर में दर्ज किया।

फाइल निकलवाने के लिये रिकार्ड रूम के बाबू के पास गया तो उन्होंने फाइल निकालने के नाम पर 100 रुपये की मांग की, पैसे मिलने के बाद फाइल निकाल कर दी। इसके बाद फाइल को रामप्रकाश दुबे के पास दुबारा लेकर आया तो उन्होंने फीस जमा करने के लिये आदेश कर दिये, एकाउन्ट बाबू ने पहले दिन तो कागज ही फेंक दिये फिर एक दलाल ने बताया कि प्रत्येक कागज के 20 रुपये अलग से देने होंगे। तीन कागज रजिस्ट्रेशन, डुप्लीकेट आरसी, ट्रान्सफर फाइल 60 रुपये अलग से लेकर फीस जमा की। फाइल निकालने वाले बाबू के हस्ताक्षर होने थे, उन्होंने हस्ताक्षर करने के नाम पर 50 रुपये की मांग की और कागज अधूरे बताकर  भगा दिया। अगले दिन 50 रुपये देकर फाइल पर हस्ताक्षर किये, फिर फाइल को लेकर रामप्रकाश दुबे के पास पहुंचा, उन्‍होंने समस्त फारमेलिटीज पूरी करने के बाद आरआई कुलदीप सिंह के पास फाइल लेकर भेज दिया।

अगले दिन की कहकर कुलदीप सिंह ने टाल दिया, जब मैं दुबारा गया तो आरआई कुलदीप, रामप्रकाश दुबे, अजब सिंह ने मारपीट तथा गाली गलौज करते हुये कहा मुझे कमरे में बंद कर लिया और मेरी जेब से 6000 रुपये छीन लिये तथा फर्जी बीमा की छायाप्रति लगाकर रख दी और मुझे थाना बन्नादेवी में एफआईआर दर्ज कराने की धमकी देने लगे। सभी ने कहा कि तू साले फर्जी पत्रकार है, रोज-रोज आकर तू हमें परेशान करता है और तुझे फर्जी कागज, चोरी की गाड़ी के चक्कर में जेल भिजवा दूंगा। इस तरह आरटीओ विभाग में भ्रष्टाचार व्याप्त है और न जाने कितने लोगों को ठगी का शिकार होना पड़ता है, जबकि मालिक गाड़ी के समस्त कागजात आरटीओ विभाग में मौजूद हैं। भ्रष्टाचार निम्न निम्न प्रकार है -

1. दो रुपये के फार्म के 20 रुपये।

2. फीस जमा करने के नाम पर प्रति फार्म 20 रुपये अतिरिक्त।

3. लर्निंग लाइसेंस बनवाने की फीस 60 रुपये, अतिरिक्त 400 रुपये आरआई कुलदीप सिंह के द्वारा लिये जाते हैं।

4. परमानेंट लाइसेंस बनाने पर ओरिजनल फीस 60 रुपये के बजाय 450 रुपये प्रति लाइसेंस लिये जाते हैं।

5. फाइल ट्रान्सफर के 101 रुपये की बजाय 1500 रुपये।

6. बाहरी गाड़ी जैसे गाजियाबाद, नोएडा 100 रुपये के बजाय 2000 रुपये वसूले जाते हैं।

7. रजिस्ट्रेशन नाम कराने के नाम पर प्रति गाड़ी 1500 रुपये वसूले जाते हैं कार से।

8. एनओसी बाहर से लाने पर कोई सरकारी शुल्क जमा नहीं होता, इस‍के लिए 4 से लेकर 6 हजार रुपये वसूले जाते हैं।

9. डुप्लीकेट लाइसेंस निकलवाने के 35 रुपये के बजाय 200 रुपये वसूले जाते हैं।

10. प्रत्येक खिड़की पर दलाल ही नजर आते हैं, जबकि आरटीओ में दलालों का प्रवेश वर्जित है। यहां पूछताछ के नाम का कोई काउन्टर भी नहीं है।

11. प्रत्येक बाबू व अधिकारियों के नीचे 4 व्यक्ति प्राइवेट तौर पर काम करते हैं, जिनका संबंध सीधे दलालों से पैसा वसूल कर कुलदीप सिंह को देना है, जिनकी मेरे पास फोटो भी उपलब्ध है तथा इनके खिलाफ जॉंच कर कानूनी कार्रवाई की जानी अति आवश्यक है।

12. 1990-2005 तक की मॉडल गाड़ी कार, मोटरसाइकिलों के रजिस्ट्रेशन 1 जनवरी 2010 से 01 फरवरी 2010 तक की कागजों की जांच की जावे। लाखों रूपये का घोटाला उजागर होगा। इसी घोटाल की वजह से पहले आरटीओ में इन्हीं कर्मचारियों के द्वारा आग लगा दी गई थी, जिसकी आज तक जांच नहीं हो पायी है। आखिर किसने आग लगाई और क्यों लगाई इसकी भी जांच की जानी चाहिए।

13. आरटीओ विभाग में बैठे दलालों को वहां से भगाया जाये, जनता को जानकारी देने वाले कांउटर की व्यवस्था की जाये। दलालों द्वारा फार्मों को बेचने न दिया जाये। फर्जी डॉक्टर सर्टिफिकेट, फर्जी बीमा बनाने वालों को, जो कि कुलदीप सिंह, रामप्रकाश दुबे की छत्रछाया में बैठे हैं, उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जावे। प्राइवेट कर्मचारियों को आरटीओ विभाग से हटाया जाये और किस आधार पर रख रखा है, उनके खिलाफ भी जांच कर कानूनी कार्रवाई की जाये। पुरानी गाड़ी, बस, कार बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं, ये सब आरटीओ विभाग की मेहरबानी का कारण है। निर्धारित रेट लिस्ट आरटीओ में लगायी जाये, किसकी फीस कितनी है बोर्ड पर अंकित की जाये। आरआई कुलदीप के नीचे बैठे प्राइवेट काम करने वालों को हटाया जाये। यह मांग जनहित में सराहनीय है, जिससे आरटीओ विभाग में आने वाले लोगों को सुविधा मिल सके। इनकी जांच की जाए। अगर इन लोगों की जांच नहीं की गयी तो ऑल जर्नलिस्ट क्लब के लोग मुख्यमंत्री आवास लखनऊ पर जाकर धरना-प्रदर्शन करेंगे।

रूप किशोर राजपूत


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