उनकी हत्‍या हुई, ये पत्रकार मजे लेकर विरोध करेंगे!

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पत्रकार सुशील पाठक व उमेश राजपूत की हत्या के विरोध में 25 फरवरी को रायपुर में पत्रकारों द्वारा किया जाने वाला धरना-प्रदर्शन दंतेवाड़ा के कतिपय वरिष्ठ पत्रकारों के लिए चंदा उगाही का जरिया बना हुआ है। राजधानी रवाना होने के लिए श्रमजीवी पत्रकार संघ के जिला इकाई के कुछ पदाधिकारी इन दिनों दफ्तरों से लेकर एनएमडीसी, एस्सार व ठेकेदारों के द्वार दस्तक दे रहे हैं। अधिकारियों से कहा जा रहा है कि 25 को रायपुर में उनका कार्यक्रम है और जिले भर के पत्रकारों को रायपुर ले जाना है, इस बाबत सहयोग स्वरूप जो राशि बन पड़े स्वेच्छा से दान करें।

ऐसा दंतेवाड़ा के कतिपय व वरिष्ठ पत्रकार दफ्तरों से लेकर औद्योगिक कार्यालयों में जाकर यह राग अलाप रहे हैं। फिलहाल गुपचुप तरीके से हो रही वसूली की खबर पहले तो किसी और पत्रकार तक नहीं पहुंची लेकिन कार्यक्रम के ऐन दो दिन पहले दंतेवाड़ा के सक्रिय पत्रकारों को इसकी भनक लग गई है। अब इसकी चर्चा हो रही है। वहीं कई पत्रकार इस पर ऐतराज जता रहे हैं तो कुछ सिस्टम का हवाला देते इस पूरे ट्रिप में ऐश करने का जुगाड़ बता रहे हैं। शराब और बीयर के आदि कुछ पत्रकारों को चंदा उगाही बड़ा रास आ रहा है। और तो और वे अपने साथ कुछ साथी पत्रकारों को भी इस यात्रा पर चलने मान-मनौव्‍वल में लगे हुए हैं। ऐतराज सामने आने पर कह रहे हैं बड़ा मजा आएगा स्पेशल गाड़ी होगी साथ में बीयर और शराब की बोतलें भी होगी। रायपुर में तो चंद घण्टे बिताने हैं लौटते वक्त भी जश्र मनेगा।

रही बात उगाही कर रहे वरिष्ठ पत्रकारों की तो इससे पहले भी कई सम्मेलनों के दौरान उनके द्वारा इस तरह के कारनामे सामने आ चुके हैं, यह कोई नई बात नहीं है, लेकिन शर्म की बात यह है कि अपने हित के लड़ाई में ही वरिष्ठ पत्रकारों का यह कृत्य कल को कहीं उनके ही गले की फांस न बन जाए। रही बात दिवंगत पत्रकार सुशील पाठक और उमेश राजपूत की तो उन्हें न्याय और असल श्रद्धांजलि तभी मिलेगी जब पत्रकार अपनी हरकतों से बाज आते। उनकी इस लड़ाई में सच्चे सिपाही के रूप में खड़े होते।

दंतेवाड़ा से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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