पत्रकार की साख पर लांछन लगाने वाले अधिकारी के खिलाफ मुकदमा

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मध्यप्रदेश के एक आला सरकारी अफसर के खिलाफ यहां अदालती आदेश पर मानहानि का मुकदमा दर्ज किया गया. इस अधिकारी ने भारतीय प्रेस परिषद के नोटिस के जवाब में एक स्थानीय पत्रकार की पेशेवर साख पर कथित रूप से लांछन लगाने वाली टिप्पणी की थी.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुपम श्रीवास्तव ने शहर के एक हिंदी दैनिक के संवाददाता सुधीर चिखलीकर की पुनरीक्षण याचिका मंजूर की. इसके बाद निचली अदालत ने तत्कालीन सहायक वाणिज्य कर आयुक्त डीके खरे के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 500 के तहत संज्ञान लिया और उन पर मानहानि का मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया.

चिखलीकर के वकील मुकेश देवल का कहना है कि खरे ने कथित साजिश के तहत उनके मुवक्किल के खिलाफ वर्ष 2008 में मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने का झूठा मामला शहर के संयोगितागंज थाने में दर्ज कराया था. उन्होंने बताया कि जब पत्रकार ने संबंधित घटनाक्रम की तस्वीरें पुलिस अधिकारियों को दिखाईं तो खरे और एक अन्य वाणिज्य कर अधिकारी दिनेशचंद्र करोडिया के खिलाफ भी मारपीट और अन्य संबद्ध आरोपों में मामला दर्ज किया गया था. देवल के मुताबिक चिखलीकर ने पूरे मामले की शिकायत करते हुए भारतीय प्रेस परिषद का दरवाजा खटखटाया. प्रेस परिषद के सचिव ने वाणिज्‍य कर अधिकारी को शिकायत के आधार पर नोटिस भेजा.


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