रोहित पाण्डेय चले गये

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रोहित पांडेयबीती रात को दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में पूर्वांचल के प्रखर युवा पत्रकार रोहित पाण्डेय की मृत्यु हो गयी. उनके जीवन में चालीसवां बसंत आने वाला था. रोहित के दोनों गुर्दे पिछले दो वर्षों से ख़राब हो गए थे. बीमारी में जाने से पहले रोहित गोरखपुर में हिंदुस्तान अखबार से जुड़े थे पर बाद में प्रबंधन ने उनकी सेवाएं लेना बंद कर दिया था.

इस उपेक्षा ने रोहित को तोड़ दिया और उनकी बीमारी और बढ़ गयी. रोहित उन बिरले पत्रकारों में थे जिन्होंने ईमानदारी के साथ न सिर्फ पत्रकारिता की बल्कि बीमारी से जूझते हुए भी अपनी ईमानदारी को बचाए रखा था. अजय श्रीवास्तव सरीखे साथियों ने समय-समय पर रोहित के इलाज के लिए संसाधन जुटाए पर अफ़सोस यह किसी काम नहीं आ सका. रोहित के पीछे उसकी पत्नी और दो नन्हे बच्चे हैं. साथियों से अपील है की रोहित के परिवार को इस विषम परिस्थिति से उबरने में मदद करें. मदद के इच्छुक साथी अजय श्रीवास्तव से 09935004949 पर संपर्क कर सकते हैं.

मूलत संतकबीर नगर के रहने वाले रोहित ने पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू किया. पिछले सात वर्षों से वे हिन्दुस्तान गोरखपुर से जुड़े थे. प्रतिभा के धनी रोहित पत्रकारिता में नेट उत्तीर्ण करने वाले गोरखपुर मंडल के प्रथम छात्र थे. वे गोरखपुर विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग द्वारा संचालित पत्रकारिता पाठयक्रम में भी बतौर शिक्षक अपनी सेवाएं दे रहे थे. रोहित वरिष्ठ पत्रकार प्रभाष जोशी के पत्रकारीय सफर पर शोध कर रहे थे. उनके निधन पर पत्रकार जगत में शोक की लहर है. गोरखपुर प्रेस क्लब व महराजगंज प्रेस क्लब में उनके निधन पर शोक सभा का आयोजन किया गया.

लखनऊ से उत्कर्ष सिन्हा की रिपोर्ट


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