रिलायंस कम्युनिकेशन में बंपर छंटनी, अब तक तीन हजार लोगों की छुट्टी

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देश के सभी छोटे बड़े मीडिया हाउसों को बंपर विज्ञापन देने वाली रिलायंस कंपनियों में से एक रिलायंस कम्युनिकेशन से खबर है कि यहां बड़े पैमाने पर छंटनी की जा रही है. अब तक पूरे देश से करीब 3000 लोगों को निकाला जा चुका है. इनमें से ज्यादातर लोग पूर्व सैनिक हैं जिन्हें रिलायंस कम्युनिकेशन में भर्ती किया गया था. पर इतनी बड़ी छंटनी को लेकर किसी अखबार में कोई बड़ी खबर नहीं दिख रही, किसी चैनल पर हो-हल्ला नहीं हो रहा.

इस छंटनी के खिलाफ आवाज उठी है बनारस से. निजी दूरसंचार आपरेटर रिलायंस कम्युनिकेशन द्वारा पूरे देश में की जा रही पूर्व सैनिकों की अवैधानिक छटनी एवं गैर जिम्मेदाराना व्यवहार के खिलाफ पूर्व सैनिक समाज, वाराणसी ने संघर्ष की घोषणा की है.

पूर्व सैनिक समाज वाराणसी के महासचिव सुधीर कुमार राय ने बनारस के पराड़कर स्मृति भवन में मंगलवार को एक प्रेस कांफ्रेंस की. इस पीसी में उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि पिछले 20 दिनों में रिलांयस कम्युनिकेशन ने यूपी ईस्ट सर्किल से एक-एक कर 37 लोगों को बिना किसी सूचना के भिन्न-भिन्न तरीकों से हटा दिया है और अब तक पूरे देश में तीन हजार लोगों को निकाला जा चुका है.

उन्होंने बताया कि पूर्व सैनिकों ने अपनी युवावस्था में ही सेना की नौकरी छोड़कर रिलायंस सरीखे बड़े संस्थान को सेवाएं दीं और उसके नये उद्यम रिलायंस कम्युनिकेशन को देश के कोने-कोने में दुर्गम एवं अगम्य स्थानों पर जाकर स्थापित किया. इस क्रम में उन्होंने कंपनी के ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस जैसे कार्यों को व्यवस्थित किया. दिलचस्प तो यह है कि हाल ही में कंपनी ने अपने इन कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र भी बांटे हैं. लेकिन नौ वर्षों की प्रशंसनीय सेवाओं के बाद उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना एवं आरोप लगाये अभद्र आचरण के बीच मुअत्तल कर दिया जा रहा है.

इन घटनाओं के बाद पूर्व सैनिक समाज अपने हक एवं जीविका की लड़ाई हर स्तर पर लड़ने को बाध्य हो गया है. सुधीर कुमार राय ने प्रेस कांफ्रेंस कर इस बड़ी और अवैधानिक छंटनी की सूचना तो दे दी लेकिन अखबारों ने इसे पहले पन्ने और आल एडिशन लायक खबर नहीं माना और चैनलों ने इस छंटनी के खिलाफ कोई मुहिम नहीं चलाई. क्यों मीडिया हाउसों की बोलती बंद है? सिर्फ इसलिए कि अंबानीज से पंगा लेकर कोई करोड़ों-अरबों को विज्ञापन क्यों बंद कराए... तीन-हजार लोग बेरोजगार हो जाते हैं तो होते रहें..... यही है आज की मीडिया का दर्शन.


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