बसपा विधायक के गुर्गों ने चार पत्रकारों को पेड़ से बांधकर पीटा

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: लखीमपुर के धरहरा क्षेत्र के विधायक बाला प्रसाद के गांव में हुई घटना : पत्रकारों की कार और कैमरे तोड़े गए : पुलिस मामला दर्ज करने में कर रही आनाकानी : लखीमपुर खीरी में छेड़छाड़ के एक मामले की कवरेज करने गए इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया के चार पत्रकारों को बसपा विधायक बाला प्रसाद के गांव के लोगों ने बुरी तरह मारा पीटा. उन्‍हें घसीटकर पेड़ से बांधा गया. उनके कैमरे तोड़ दिए गए. कार को क्षतिग्रस्‍त कर दिया गया. किसी तरह जान बचाकर आए पत्रकार इस समय ईशानगर थाने में मुकदमा दर्ज कराने के लिए बैठे हुए हैं. पुलिस मामला लिखने में हीलाहवाली कर रही है.

कुछ दिन पहले धरहरा से बसपा विधायक बाला प्रसाद के ड्राइवर तथा गनर पर एक दलित महिला से छेड़छाड़ का मामला दर्ज हुआ था. यह घटना विधायक के गांव बलतुआ में हुई थी. इसी खबर की कवरेज के लिए आईबीएन7 के राजीव सिंह, जैन टीवी के अशोक शुक्‍ला तथा जी न्‍यूज के डीके मिश्रा एंव शाहिद आज बलतुआ गए हुए थे. ये सभी लोग डीके मिश्रा  की मारूति 800 कार से पहुंचे थे. ये लोग विजुअल बनाने के बाद उक्‍त महिला से बाइट ले ही रहे थे कि अचानक काफी संख्‍या में ग्रामीण वहां जुट गए. इन लोगों ने विधायक को बेइज्‍जत करने का आरोप लगाते हुए पत्रकारों पर टूट पड़े.

अचानक इतने लोगों के हमला बोलने से चारों पत्रकार अपने कैमरे के साथ जान बचाकर वहां से भागने लगे. कथित तौर पर विधायक के इन आ‍दमियों ने इनका पीछा करना शुरू कर दिया. पत्रकार खेतों की तरफ भागे लेकिन गांव वालों ने सभी को पकड़ लिया. चारों को मारते-पीटते-घसीटते हुए गांव में लेकर आए. यहां उनको एक पेड़ से बांध दिया गया. इनकी कार को बुरी तरह क्षतिग्रस्‍‍त कर दिया गया. इनके कैमरे तोड़ दिए गए. विधायक के गांव वाले इनलोगों के आसपास सूखी घास रखकर जिंदा जलाने जा रहे थे, लेकिन कुछ लोगों ने बीच बचाव कर उन्‍हें रोक दिया.

चारों पत्रकारों को बुरी तरह मारने के बाद छोड़ा गया. शाहिद को काफी चोटें आई हैं. जब ये लोग ईशानगर थाने पहुंचे तो थानाध्‍यक्ष मामला दर्ज करने की बजाय टालमटोल करने लगा. पुलिस ने पत्रकारों पर ही आरोप लगाया कि विधायक के गांव वाले कह रहे हैं कि आपलोग दलित महिलाओं से छेड़खानी कर रहे थे. पुलिस पत्रकारों पर उल्‍टा दबाव बनाने की कोशिश कर रही थी. पत्रकार अभी थाने में ही मौजूद हैं.

घटना में घायल राजीव ने बताया कि हमलोगों पर हमला विधायक की शह पर हुआ है. बिना उनके सहयोग के ग्रामीण हमला नहीं कर सकते थे. पुलिस भी विधायक के दबाव में मामला दर्ज नहीं कर रही है. उल्‍टे हमलोगों को ही छेड़खानी के मामले का भय दिखाया जा रहा है. हमलोगों पर दबाव बनाया जा रहा है ताकि हम मुकदमा ही दर्ज नहीं कराएं.


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