सुप्रिया जी के लिए मन भारी हो उठा है

E-mail Print PDF

पिछले साल मई में आलोक जी और सुप्रिया जी से इंदौर में मुलाकात हुई। हम सभी इंदौर प्रेस क्लब की तरफ से आयोजित एक सेमिनार में हिस्सा लेने गए थे। वे दोनों एक ऐसे दंपत्ति के तौर पर दिखे जिनमें जबर्दस्त आपसी समझ थी। देर रात तक सुप्रिया आलोक जी से कहती रहीं कि चलिए उज्जैन के महाकालेश्वर के दर्शन कर आएं, मेरा बड़ा मन है। आलोक जी साथ चल न सके। सुप्रिया जी हमारे साथ चलीं। हम कुल चार पत्रकार थे।

रात 11 से सुबह 8 तक दर्शन के बाद जब लौटे तो मैंने देखा कि एक विशु्द्ध भारतीय पत्नी की तरह सुप्रिया जी में अपने पति की मनोकामना का भाव कितना गहरा था। अब जब आलोक जी नहीं रहे तो सुप्रिया जी के लिए मन भारी हो उठा है। जिस हिम्मत के साथ उन्होंने इस दौर को पार किया है, वह हिम्मत आगे भी बनी रहे। आलोक जी एक यशस्वी पत्रकार के बीच हम सबके बीच हमेशा रहेंगे।

डा. वर्तिका नंदा

Dr Vartika Nanda

Head, Department of Journalism

Lady Shri Ram College, New Delhi

Blog: www.vartikananda.blogspot.com


AddThis