''प्रभात खबर से पांच के इस्तीफा देने की खबर पूरी तरह सही नहीं है''

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यशवंत जी, आपके भड़ास पर खबर आयी है कि प्रभात खबर गिरिडीह को झटका, पांच पत्रकार भास्कर गए. यह खबर पूरी तरह सही नहीं है. अमरदीप (तीसरी), सतीश जायसवाल (डुमरी), विजय सिन्हा (मधुबन), रामकृष्ण (धनवार) और सुधीर सिन्हा के प्रभात खबर छोड़ने की बात भड़ास में आयी है. सच ये है कि सिर्फ दो लोगों अमरदीप (तीसरी) व सतीश जायसवाल (डुमरी) ने प्रभात खबर छोड़ा है. भास्कर से इन्हे बड़ा ऑफर मिला था.

ये दोनों प्रभात खबर पर बोझ थे. यहाँ एक नाम छूट गया है. प्रभात खबर के देवरी के रिपोर्टर मनोज कुमार भी भास्कर में गए हैं. धनबाद और गिरिडीह में प्रभात खबर का प्रतिद्वंद्वी होकर भास्कर जो कर रहा है, वो शायद प्रभात खबर का कोई दोस्त भी नहीं कर पाये. जी हाँ, प्रभात खबर के कचड़ों की सफाई कर रहा है भास्कर. विजय सिन्हा (मधुबन) व रामकृष्ण (धनवार) अब भी प्रभात खबर में है. इनदोनों को भी भास्कर से बड़ा ऑफर मिला है, मगर इन्होंने ठुकरा दिया. यही नहीं भास्कर के गिरिडीह ऑफिस में काम करनेवाले सोम्ब्रत झा को 4000 मिलते हैं, इन्हे 10000 का ऑफर मिला है, मगर इन्होंने ठुकरा दिया.

और हाँ, प्रभात खबर छोड़ने वालों में एक नाम गलत है- सुधीर सिन्हा. इस नाम का कोई रिपोर्टर प्रभात खबर, गिरिडीह में था ही नहीं. टीम बनाने के चक्कर में भास्कर मैनजमेंट पागल हो गया है. ब्लॉक और मुफ्फसिल के रिपोर्टरों को 5000-8000 का ऑफर दिया जा रहा है. ब्लॉक और मुफ्फसिल के रिपोर्टरों को इतनी बड़ी राशि लम्बे समय तक देना किसी अखबार के लिए संभव नहीं. रिपोर्टर मिल नहीं रहे तो भास्कर मैनजमेंट किसी तरह अखबार निकलने की रणनीति के तहत ये सब कर रहा है. जो रिपोर्टर ये समझ रहे हैं, वो भास्कर का ऑफर ठुकरा रहे हैं.

संजय कुमार

प्रभात खबर, धनबाद.


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Comments (5)Add Comment
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written by sombrat Jha, May 08, 2011
Prabhat Khabar par itni hai Toba Machaya Ja raha hai. Kise Kitna Mil Raha Hai, Kaun Chhod Kar gaya. Hai Toba Machane wale Wahi log Hain Jo Kabhi Prabhat Khabar Main The. Akhabar se Nikalne ki Tis Abhi Bhi unke dil main Hai. Prabhat Khabar ek Sanstha Hai. Ek-Do ke nikalne se yadi Akhabar Prabhawit Hone Lage to Roj Akhabar Band Honge. Jo log Baskar Main Gayen Hain Unhe Meri Shubhkamna. Par Itna Jaroor Hai yadi Bhaskar Ne Dhoka Diya To Kahan Jayenge.
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written by Rajesh kumar, May 07, 2011
Sanjay jee; wah aap ne to wafadari ki mishal kayam kar diya."PRABHAT KHABAR" ko yese hi wafadaron ki jarurat hai. :JAME RAHO MUNNA BHAI.: Sajeev jee ne apne comments main thik kaha hai ki PRABHAT KHABAR yadi 5000 aur 8000 apne repotron ko dena suru kiya hai to wakaye patrakaron ka din bahurne wala hai. likin aap ko aur aap ke prabhari ko kitna mil raha hai aap dil par hath rakh kar kahiyega. kyonki maine bhi prabhat khabar ko kafi karib se dekha hia.
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written by xyz, May 07, 2011
Chorkar jaane walon ko hamesha hi bojh kaha jaata hai. prabhat khabar achcha akhbaar zaroor hai lenik usme wo sabhi khamiyan hain jo ek akhbaar ke management me ho sakta hai.
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written by amarnath sinha , May 07, 2011
संजय बाबु आप तो बड़े बेबाक बोलते हैं , भले ही यशवंत जी के इस खबर में त्रुटिय रह गयी हो लेकिन यह सच है की प्रभात खबर को बड़ा झटका भास्कर ने दिया है.भले ही आज रामकृष्ण जी और बिजय जी ने भास्कर ज्वाइन करने के बाद फिर से घर वापसी की है लेकिन इसकी पूरी कहानी भी आपको बेबाकी भरे अंदाज में बताना चाहिए था.चलिए आप नहीं बताएगें भला कोई अपनी दही को खट्टा बताता है क्या? वैसे इस कहानी में काफी ट्विस्ट रहा है भास्कर के गिरिडीह में लौन्चिंग के बाद से ही यह कयास लगाया जाने लगा की गिरिडीह प्रभात खबर को बड़ा झटका लगेगा और वैसा हुआ भी. भास्कर आया तो सबसे पहले प्रभात खबर गिरिडीह की पूरी टीम का सबसे तेज पत्रकार सतीश जयसवाल ( जिसे आप बोझ कह रहे है) ने प्रभात खबर से तौबा बोला दरअसल ये पिछले कई माह से मुख्यालय के पत्रकारों के व्यवहार से नाराज थे.यही नाराजगी रामकृष्ण जी ,बिजय जी ,अमरदीप जी की भी रही है.मनोज और gandey का wishnu तो अपनी खबरों के नहीं छपने से परेशान था. भास्कर जब aaya तो ये सभी chale gaye inke jaate ही संजय बाबु आप और आपके wariyo की chul hil गयी.और suru हुआ आरजू minatoo का सिलसिला एक-एक कर सभी पत्रकारों से वापसी के लिए प्रभारी से लेकर संपादक tak ने guhar लगायी बिजय और रामकृष्ण घर jakar कई ghanto tak इनसे बात की गयी .khair रामकृष्ण और बिजय जी की घर वापसी हो गयी लेकिन shayad ही डुमरी जैसे उग्रवाद prabhawit ilake में सतीश की bharpai कोई कर paye.ये हम नहीं jile के सभी khabarnis कह रहे है वैसे yahan एक salah jarur de do (भले ही आप na ले)की आप और आपके कलिग नहीं सुधरे तो इससे भी बड़ा विद्रोह गिरिडीह में देखने को मिलेगा.
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written by Sanjeev, May 07, 2011
अगर भास्कर मैंनेजमेंट वाकई मुफस्सिल पत्रकारों को 5000 से 8000 तक आफर कर रहा है तो यह झारखंड में हिंदी पत्रकारिता के दिन बहुरने और पत्रकारों के लिए सम्मान के साथ सिर उठाकर चलने के दिन आने का संकेत है। इसके लिए दैनिक भास्कर को धन्यवाद। प्रभात खबर, धनबाद में संजय कुमार को कितने पैसे मिल रहे हैं, यह तो उन्हीं की आत्मा जानती होगी। लेकिन उन्होंने लिखा है कि जो लोग गिरिडीह में प्रभात खबर के लिए बोझ थे। दरअसल इन अखबारों में जो भी पत्रकार अपने हक की बात करता है वो बोझ बन जाता है। आप भी अगर जायज वेतन और अवकाश की मांग करें तो बोझ ही माने जायेंगे संजय जी। ध्यान रहे, मई महीना आ गया, इंक्रीमेंट की मांग न कर बैठना।

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Last Updated ( Saturday, 07 May 2011 13:14 )