सुमंत भट्टाचार्य के पर कतरे, अखबार की संपादकी गई

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खबर है कि सुमंत भट्टाचार्य अब न्यूज एक्सप्रेस चैनल में अपनी सेवाएं देंगे. उनसे अखबार का काम ले लिया गया है. हमवतन नाम से जिस अखबार को लांच किया जाना था, उसे अब भोपाल से प्रकाशित किया जाएगा. प्रबंधन ने सुमंत को भोपाल जाने का आप्शन दिया पर सुमंत ने इससे मना कर दिया. अंततः उन्हें टीवी में भेज दिया गया. उनका पद एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर का रखा गया है.

कुछ ही महीनों के भीतर सुमंत के बारे में अलग-अलग सूचनाएं आती रहीं. पहले उन्हें अखबार का संपादक बताया गया. फिर खबर आई की अखबार भोपाल शिफ्ट कर दिया गया है लेकिन संपादक सुमंत ही बने रहेंगे. अब असली बात सामने आई है कि प्रबंधन ने सुमंत के पर कतरते हुए उन्हें अखबार से हटाकर टीवी में भेज दिया है. अखबार के नए संपादक की तलाश तेज हो गई है. ज्ञात हो कि वीओआई में भी सुमंत रहे हैं, जहां कई तरह के विवाद हुए. वीओआई के बाद सुमंत आउटलुक में गए. वहां भी आंतरिक राजनीति और विवाद चरम पर पहुंच गया. फिलहाल सुमंत ने न्यूज एक्सप्रेस में डेरा डाल दिया है. देखना है यहां कितने दिनों तक शांति बनी रहती है.


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Comments (15)Add Comment
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written by अनुराग रंजन, May 20, 2011
यशवंत जी , आपने सही लिखा है कि सुमंत ने न्यूज एक्सप्रेस में डेरा तो डाल दिया है लेकिन देखिए क्या क्या गुल खिलाते हैं . बड़े खिलाड़ी बनने के चक्कर में हमेशा रहे लेकिन बन नहीं पाए . इसका मलाल इन्हें है . सुमंत भट्टाचार्य ऐसे शख्स हैं जो अपने पर खुद ही लट्टू रहते हैं . ऐसे लोग किसी की तरक्की न सिर्फ जलते हैं बल्कि किसी को आगे बढ़ते देख नहीं सकते . अच्छा हुआ कि इन्हें अखबार की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया . अखबार का भी भला हुआ और इनके मातहत फंसे पत्रकारों का भी . भगवान करे सुमंत जी को होश आए और अपने को पहचानें . दूसरों को हिकारत की नजर से देखने की बजाय अपने गिरेबान में झांके तो इनका भला ही होगा .
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written by Punit, May 20, 2011
These insinuations against Sumant Ji by Bhadas clearly shows your frustrations Yashwant. You'd do better do some research before publishing your "views" on persons.

Sumant's contributions and his stories notwithstanding, even a junior beat reporter would rather crosscheck his/her facts before filing the copy which clearly you can not. Probably reason why your mainstream media career was rather short lived.
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written by kishore kumar, May 19, 2011
वाह सुमंत..आह सुमंत..खुद ही अपने पक्ष में फर्जी कमेंटस डाले जा रहे हो..या किसी को इसका ठेका दे दिया है. क्यो परेशान हो रहे हैं..करने दे कमेंटस. आपको कितने मशहूर हो, इसका पता लग रहा होगा. वैसे यशवंत भाई भी क्या करे..आपसे दोस्ती का निर्वाह कितना करे. खबर को दबा कर रखना ठीक नहीं था ना..सो लिख दिया. देर हुई लेकिन सौलिड लिखी भई. मान गए..यशवंत भाई किसी को नहीं छोड़ते. वैसे सुमंत को सच्ची खबर पर इतना बुरा क्यों लग रहा है. जब दूसरो की बुराई पर ठहाके लगाते हो गुरु तो अपनी भी झेलो. राजस्थान की आपकी कारस्तानियां आपके ही चेले गाते फिरते हैं. आपने वहां क्या क्या गुल खिलाएं हैं उसकी लिस्ट सबको पता है. लोग तो मनमोहन सिंह से भी पूछने वाले हैं कि उनके किस एनजीओ में आपने काम किया है. कब तक फर्जीवाड़ा करते रहोगे. पैसा तो दलाली से खूब बटोर लिया, अब थोड़ी इज्जत भी बटोर लो. ज्यादा चीं-चपड़ करोगे तो दबी हुई सारी कहानियां बाहर आ जाएंगी. सो मस्त रहो..फर्जीवाड़े के कमेंटस में मत पड़ो. जो नौकरी मिली है उसे संभाल लो, नहीं तो मुकेश कुमार का हृदय परिवर्तन होते देर नहीं लगेगी.
आपका क्या होगा जनाबे आली...
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written by ragurai, May 19, 2011
सुमंत भट्टाचार्य को मैं नहीं जानता और न ही कभी यशवंत सिंह से मिला हूं, लेकिन यह खबर पढ़कर लग रहा है कि वास्तव में यशवंत सिंह कभी पत्रकार थे ही नहीं. हां भड़ास जैसी नकारात्मक साइट चलाने के लिए वे बिल्कुल फिट हैं। सुमंत जिस प्रोजेक्ट के लिए आए थे अगर वह प्रोजेक्ट बंद हो गया तो सुमंत को बाहर निकाल देना चाहिए था, लेकिन संस्थान ने उन्हें दूसरी भूमिका में रखा तो यह पर करतना हुआ या इज्जत देना। अगर कल को भड़ास4मीडिया बंद हो जाता है ऐसे में अगर यशवंत के पास कोई और विकल्प होगा तो जाहिर है उन्हें दूसरा दायित्व देंगे. तो क्या इसे यह कहेंगे कि भड़ास के लोगों के पर कतर दिए गए। अगर आप आपसी मनमुटाव और अपनी भड़ास को व्यक्त करने के लिए ही साइट चलाते हैं तो ठीक है, लेकिन आप खुद को तो लिए लुकाठा हाथ वाली भूमिका में रखते हैं और खबर के नाम पर अपनी व्यक्तिगत भड़ास निकालते हैं. मसलन अगर जागरण वाले अपना कॉरपोरेट लोगो लॉन्च करते हैं तो आप लिखते हैं कि जागरण वाले बहुत बड़े कॉरपोरेट हो गए हैं। आपके यह लिख देने से क्या जागरण ने अपना कॉरपोरेट लोगो वापस ले लिया। हां आपकी नकारात्मक छवि जरूर जाहिर हुई। अगर आप इतनी ही स्वछंद पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं तो जब आप अखबार में थे तो यह स्वच्छंद लेखन क्यों नहीं करते थे। आज तो आप लाठीचार्ज की ..... चार्ज लिखकर और अश्लील हेडिंग लगाकर तर्क देते हैं कि दिगंबर नंगे ही रहा करते थे और उन्हें श्लील समझा जाता था तो क्या आप अपने घर में नंगे रहकर खुद को श्लील साबित करते हैं। क्या आप अखबार में अपनी दिगंबरी सोच दिखाते थे। जिस अखबार के संपादक के तौर पर सुमंत को लाया गया था अगर वह बंद हो गया तो संस्थान ने उन्हें दूसरी जिम्मेदारी देकर इज्जत बख्शी तो इसमें तो संस्थान की तारीफ करनी चाहिए. अफसोस आपके लेखन पर नहीं आप जैसे लोगों की सोच पर है. कुछ फ्रस्टेट और मुख्य़धारा की पत्रकारिता से लतियाए गए लोगों की वाहवाही का साथ आप जैसे छद्म पत्रकार को ही गढ़ सकती है.
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written by sanjeev, May 19, 2011
yeh bakwas karnewale sumant ji ke bare main nahi jante. verna is treh ki fhijul ki bate nahi karte. sumant ji kitne mahan hain agar bakwas karne wale rajasthan aajain to khud hi pata chal jayega. rajasthan main sumant ji ne jitna nam khada kiya hai, bakwas karne wale sat janam me bhi nahi kama sakte.
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written by राजेश कुमार, May 19, 2011
सुमंत भट्टाचार्य के बारे में एक लाइन कहना काफी है कि ये सचमुच एक चालाक और धूर्त आदमी हैं। और ये सच है कि वो जहां जाते हैं वहां लोगों में मनभेद पैदा कराते हैं। ये जनाब कोलकाता से आए थे, और दिल्ली में जनसत्ता में खूब पॉलिटिक्स किए। आपलोग जो इन्हें नहीं जानते वो भाग्यशाली हैं, नहीं तो सच यही है कि इनका काटा पानी भी नहीं मांगता। एक और लाइन सुन लीजिए इनके बारे में-ये फर्जी बुद्दिजीवी हैं जो बातें बना कर लोगों को बेवकूफ बनाते हैं।
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written by anil pande, May 19, 2011
"वह अकेले ऐसे पत्रकार है जिन्होंने अपनी शुरुआत जन सत्ता जैसे अख़बार से की और फिर एक सफल पारी इंडियन एक्सप्रेस जैसे अंग्रेजी अख़बार मे भी दी. वह ऐसे पत्रकार है जो हिंदी और अंग्रेजी माध्यमों मे सरलता से कार्य कर सकते है."

SIRF Delhi ME 100 Se Zyada Patrakar Hain, Jo Bi-lingual Hai. Jinhone Apni Life me Badi Story break Ki Hai.

Pure DESH ME TO HAZARON Bi-lingual , breaking story Dene wale journalist HONGE- JO at a time Urdu, English aur Hindi , ya fir English-Tamil, Telugu, Kannada, Malayalam me likhte rahe.

Faltu Me इंडियन एक्सप्रेस जैसे अंग्रेजी अख़बार Ka Taav Dikha Rahe Ho.
JHUTE AHANKAR MAT Palo Mitron!
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written by sukesh sharma bhopal , May 18, 2011
sharvan garg ke pd katre...
bhaskar ke chirkut bugurg smuh samapadk ke hrkato se pdesan hokar aakhirkar bhaskar balo ne sharvan garag ke bi pd katrte huye delhi buro wapis lekar lokal delhi buro ka charg de diya hai. bhainyo...inhe maliko ne bhopal me bula rakha hai..inki sari chutyai bata di gai hai..delhi buro ki mitting delhi me yatish gi lena suru kar diya hai...19 ko garg gi delhi off janenge...ye pahle g aditor honge bhainyo jo delhi ka lokal buro..ka charg lekar aapne aapko bhaskar ka g aditor bata kar patrkar bandhu ko banayenge....ab maliko ko kaun bataye delhi buro me ram raj aaur lokal delhi me ravan raj...
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written by Shweta Rashmi, May 18, 2011
जिस तरह से भड़ास ने सुमंत जी के पर कतरने सम्बन्धी खबर लगाई है, उससे तो भड़ास के विश्वसनीयता पर ही ? खड़ा हो गया है . कल तक तारीफों के पुल बांधने ने वाले आज उन्हें ही नीचा दिखने पर तुले है . कारण चाहे जो भी हो पर सुमंत जी भड़ास के मोह ताज नहीं है. पहली बात तो यह खबर बिना सिर पैर की है ऐसा लगता है की बिना प्रबंधन के बात किये बिना ही लगायी है . रोज मुकेश जी की एक खबर इस साइट पर ज़रुर दिख जाती है पर इस खबर की पुष्टि शायद उनसे भी नहीं की गई है . इस तरह की पत्रकारिता से भगवान ही बचाई . जहा तक एक पत्रकार के तौर पर मै सुमंत जी को जानती हू , वह अकेले ऐसे पत्रकार है जिन्होंने अपनी शुरुआत जन सत्ता जैसे अख़बार से की और फिर एक सफल पारी इंडियन एक्सप्रेस जैसे अंग्रेजी अख़बार मे भी दी. वह ऐसे पत्रकार है जो हिंदी और अंग्रेजी माध्यमों मे सरलता से कार्य कर सकते है. अब अगर उनको एक ज़िम्मेदार पद उस ग्रुप के आने वाले चैनल मे दिया गया है तो इसमे गलत क्या है. पता नहीं क्यों उनको वीओआई के साथ यह याद दिलाने की कोशिश की जा रही है की वीओआई की जो तस्वीर हमारे सामने आई है उसके ज़िम्मेदार सुमंत जी है. यह मीडिया की विडम्बना है की हर सफल इन्सान की टाँग खींचने मे कोई कसर नहीं, बाकी रखी जाती है. जो और मोटी मोटी मछलियाँ वीओआई के पतन का कारण बनी आज उसका कही जिक्र तक नहीं है. यहाँ बात outlook की भी की आंतरिक कलह की गई है . उसका कारण कौन है यह आप सब जानते है. छदम नाम से यह जो अनूप महाशय है वह कृपया अपना पूरा परिचय सब के सामने रखे . ऐसे परदे मे रह कर बात नहीं की जा सकती है
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written by harish, May 18, 2011
अनूपजी, आप शायद सुमंतजी को अच्छी तरह से नहीं जानते, वरना इस तरह की बातें नहीं करते। राजस्थान में आज जो दारासिंह उर्फ दारिया फर्जी एनकाउंटर का मामला चल रहा है और आईजी स्तर के अधिकारी की गिरफ्तारी हो चुकी है, वे इनकी बदौलत है। अगर सुमंतजी संपादक नहीं होते तो खबर ही नहीं लगती। ऐसे ही मुख्यमंत्री रहते हुए वसुंधरा राजे के खिलाफ कई खबरें उस समय न्यूज टुडे में लगाई, शायद और किसी की बसका नहीं था। रहा नौकरी का सवाल तो आपको ही ज्यादा पता होगा।
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written by sunil sharma, May 18, 2011
सुमंत भट्टाचार्य को आप जानते नहीं हैं लेकिन उनके साथ जयपुर से कोलकाता और दिल्ली तक काम कर चुके लोग जानते हैं कि वो कितने बड़े ......हैं । लफ्फाजी में उनका मुकाबला भारतीय पत्रकारिता में तो बहुत कम लोग ही कर पाएंगे । अपने आप को इतना महान समझते हैं कि पूछिए मत । कुछ दिन पहले तक शहर भर में सुमंत हांके फिर रहे थे कि वो ऐसा अखबार निकालेंगे कि दुनिया उन्हें याद रखेगी । जिस संस्थान में रहते हैं , वहीं राजनीति कर करके लोगों का जीना हराक कर देते हैं । हमने उन्हें कोलकाता में भी देखा है और जयुपर में उनके में सुना है । आउटलुक में भी वो अपने को नीलाभ मिश्रा के ऊपर ही मानते थे । हांकने -फेंकने में उनका कोई जवाब नहीं । प्रभाष जोशी के बाद जिन्हें वो इस देश में संपादक बनने लायक मानते हैं , उनमें वो अपना नाम सबसे पहले रखते हैं । बेहद चालाक और धूर्त् किस्म के ये सज्जन कुछ महीने टिक गए तो उसी मुकेश कुमार की कुर्सी में पलीता लगाएंगे , जो उन्हें वहां ले गए हैं । हमेशा राजनीति करना और एक दूसरे के खिलाफ लोगों को भड़काना इनके डीएनए में है । अच्छा हुआ ये बाबू साहब लांच होने वाले अखबार के संपादक नहीं बन पाए लेकिन अफसोस है कि भारतीय पत्रकारिता में एक मिसाल कायम होने से भी रह गया । देखिए कितने दिन सुमंत चैन से बैठते हैं और दूसरों को चैन से बैठने देते हैं । ऐसे लोगों की मुश्किल ये है कि न तो खुद मन लगाकर कहीं काम करते हैं , न ही काम करने लायक माहौल बनने देते हैं । झूठ बोलना और खुद को श्रेष्ठतम साबित करने में ही इनकी आधी जिंदगी बीत गई है , बाकी भी बीत जाएगी लेकिन मुकेश कुमार को सावधान रहने की जरूरत है ।
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written by pardeep kuamr , May 18, 2011
सुमंत जी के बारे में जो कुछ भी भड़ास पैर पर्काशित किया गया है वो गलत है, कर्प्या तथ्यों को जाँच ले. क्योकि जहा तक मुचे जानकारी है वो लोगो की नौकरी नहीं खाते है बल्कि लोगो को कम करने के लिए प्रोत्सहित करते है. सुमंत के पर नहीं कतरे गए है बल्कि उनको मौका दिया गया है और कम करने का. प्रभास जोशी की पाठशाला से निकला आदमी गलत नहीं होगा.
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written by aman, May 18, 2011
ye sach nahi hai
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written by aman , May 18, 2011
anup ji aise comment likhne se pahle yah to dekh le ki suman ji ne patrkarita me kitna kam kiya hai, aap lag raha hai kuch jante hi nahi hai.
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written by ANUP, May 18, 2011
सुमंत जैसे लोगों का यही हाल होता है, बहुतों की नौकरी खाई है अब खुद की बारी आई है। भड़ास ने सही खबर चलाई है, पर कतरे गए। चौबे गए थे छब्बे बनने दूबे बनकर लौटे हैं. चार लाइन लिखना नहीं आता लेकिन मुंह से तो प्रभाष जोशी से कम नहीं समझता खुद को.

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Last Updated ( Wednesday, 18 May 2011 14:27 )