फर्जी इंटरव्यू प्रकाशित करने पर जागरण से राजेश की नौकरी गई

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फर्जी इंटरव्‍यू लेने के विशेषज्ञ पत्रकार राजेश श्रीवास्तव को आखिरकार जागरण समूह ने बर्खास्‍त कर दिया। हालांकि इस बर्खास्‍तगी के तरीके को इस्‍तीफे के तौर पर अमल में लाया गया है। लेकिन इस घटनाक्रम ने जागरण के दिग्‍गज माने जाने वाले पत्रकारों की कार्यशैली को उजागर तो कर ही दिया है। उधर इस घटना के बाद से ही जागरण की इस यूनिट में आपसी मनमुटाव और तेज हो गया है। उधर राजेश के समर्थक गुट का आरोप है कि राजेश का काम लगाया गया है।

मामला है लखनऊ यूनिट का। यहां पर मुख्‍य उप संपादक के पद पर तैनात राजेश श्रीवास्‍तव को संस्‍थान प्रबंधन ने इस्‍तीफा देने को कह दिया। वजह यह कि उनके कई साक्षात्‍कारों पर कडी आपत्ति जतायी जा चुकी थी। राजेश श्रीवास्‍तव फीचर डेस्‍क पर काम कर रहे हैं। इस डेस्‍क को सम्‍भालने के बाद से ही राजेश ने अपनी काबिलियत का डंका बजवाना शुरू कर दिया था। आम तौर पर अलभ्‍य समझे जाने वालों के ऐसे कई लजीज किस्‍म के साक्षात्‍कार उन्‍होंने लिये कि लोग दांतों तले उंगलियां दबा बैठे। ऐसे इंटरव्‍यूज की ताबडतोड बैटिंग के चलते उनका कद और सम्‍मान लगातार बढने लगा था।

लेकिन अचानक ही वे कैच आउट हो गये। इस यूनिट में एक गुट के खासमखास माने जाने वाले राजेश श्रीवास्‍तव को इस इल्‍जाम से निजात दिलाने के लिए थर्ड एम्‍पायर यानी ग्रुप समूह के शीर्ष प्रबंधन के पास गुहार लगायी गयी। लेकिन आखिरकार अब उन्‍हें बैक टू पवैलियन होना पडा। किस्‍सा कुछ यूं है। दरअसल, कुछ दिन पहले ही राजेश श्रीवास्‍तव ने महिलाओं के स्‍वास्‍थ्‍य मामलों पर कई बडी हस्तियों और चिकित्‍सकों-विशेषज्ञों के साक्षात्‍कार प्रकाशित किये थे। अचानक ही इस यूनिट के राजेश विरोधी गुट को खबर मिली कि राजेश ने अब तक जितने भी साक्षात्‍कार लिए हैं, उनमें से ज्‍यादातर फर्जी हैं। बस गुणाभाग शुरू हो गया।

राजेश को बर्खास्‍त करने की कोशिशें होते देख समर्थक गुट ने मामला ऊपर भेज कर कार्रवाई टालने की जुगत लगानी शुरू की, लेकिन सर्वोच्‍च शिखर पर भी वे राजेश को बचा नहीं सके लेकिन बर्खास्‍तगी के बजाय यह मामला इस्‍तीफे तक सुलट गया। और राजेश श्रीवास्‍तव को इस्‍तीफा देकर बाहर का रास्‍ता अख्तियार करना पडा। यहां बताते चलें कि जागरण सखी के ताजा अंक में राजेश श्रीवास्‍तव के नाम से प्रख्‍यात सिने अभिनेत्री माधुरी दीक्षित नेने का साक्षात्‍कार छपा है। बहरहाल, इस घटना के बाद से ही जागरण की लखनऊ यूनिट में दोनों गुट एक बार फिर खुलकर सामने आ गये हैं। लेकिन इस घटना ने जागरण में कामकाज के तरीकों की पोल तो खोल ही दी है।


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