सहारा से स्वतंत्र मिश्रा और अनिल अब्राहम सस्पेंड

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: उपेंद्र राय एंड कंपनी की ताकत बढ़ी : सहारा ग्रुप से दो बड़ी खबरें हैं. स्वतंत्र मिश्रा और अनिल अब्राहम को सस्पेंड कर दिया गया है. स्वतंत्र मिश्रा के बारे में पता चला है कि उन्हें 19 मई को ही सस्पेंड कर दिया गया था. उनके सहारा के किसी भी आफिस में प्रवेश करने पर पाबंदी लगा दी गई है. स्वतंत्र के पास कंपनी का जो कुछ सामान था, सभी ले लिया गया है.

अनिल अब्राहम के बारे में जानकारी मिली है कि उन्हें 27 मई को सस्पेंड किया गया. कल खुद अनिल अब्राहम ने अपना इस्तीफा भी प्रबंधन को सौंप दिया. स्तवंत्र मिश्रा राष्ट्रीय सहारा अखबार के प्रिंटर पब्लिशर रह चुके हैं. एक जमाने में लखनऊ में उनकी तूती बोलती थी और सहाराश्री के खासमखास माने जाते थे. बाद में उनका तबादला दिल्ली कर दिया गया और उनका कद बढ़ाते हुए उन्हें राष्ट्रीय दायित्व सौंपे गए. पर अचानक ही स्वतंत्र मिश्र को शंट करते हुए उन्हें सहारा मीडिया से बाहर सहारा की किसी अन्य कंपनी में भेज दिया गया. इससे उपेक्षित व खफा स्वतंत्र मिश्र काफी दिनों से सहारा के मेनस्ट्रीम में आने की कोशिश कर रहे थे पर उनकी रणनीति व योजना सफल न हो सकी.

सहारा प्रबंधन ने स्वतंत्र मिश्रा को हटाने का कड़ा फैसला ले लिया. अब देखना है कि स्वतंत्र मिश्रा निकाले जाने के बाद भी सहारा के प्रति निष्ठा निभाते हुए चुप्पी साधे रहते हैं या फिर अपना पक्ष व अपनी बात मजबूती से सबके सामने रखते हैं. उधर अनिल अब्राहम को निकाले जाने पर सहारा के कई लोग हैरत में हैं. सहारा मीडिया के हेड रहे इस शख्स को सहारा के जहाज वाली कंपनी से ट्रांसफर कर मीडिया में लाया गया. बाद में इन्हें मीडिया से हटा कर कोई और जिम्मेदारी दे दी गई. पर अचानक उन्हें सस्पेंड किए जाने के कारण को कोई समझ नहीं पा रहा है.

सूत्रों का कहना है कि दरअसल सहारा में इन दिनों सिर्फ और सिर्फ उपेंद्र राय की तूती बोल रही है. सहाराश्री सुब्रत राय सहारा जिस पर भी भरोसा करते हैं, कुछ वर्षों तक आंख मूंद कर भरोसा करते हैं और उसे पूरा अधिकार देते हैं. बताया जा रहा है कि उपेंद्र राय और उनके करीबी जन सहारा प्रबंधन को ये समझाने में कामयाब रहे कि मुश्किलों से घिरे सहारा ग्रुप को बचाने की बजाय कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी साजिशें कर सहारा को फंसाने और बदनाम करने की कोशिशें कर रहे हैं. इससे संबंधित कुछ प्रमाण भी सहारा श्री को दिखाए गए. सूत्रों के मुताबिक इसी के बाद सहाराश्री ने स्वतंत्र मिश्रा और अनिल अब्राहम को सस्पेंड कर देने का आदेश दिया.

सहारा के बारे में ये चर्चित है कि प्रबंधन जब किसी बड़े पद पर आसीन व्यक्ति से खफा होता है तो उनके घर का परदा, तकिया सब उठवा लेता है. ऐसा अतीत में भी हो चुका है कइयों के साथ. जानकारों का मानना है कि स्वतंत्र मिश्रा और अनिल अब्राहम को निपटाने के बाद उपेंद्र राय और ज्यादा ताकतवर होकर उभरे हैं. और, यह स्पष्ट संदेश भी सभी को चला गया है कि इस दौर में उपेंद्र राय का विरोध करने का मतलब है सहाराश्री का विरोध करना.

माना जा रहा है कि प्रवर्तन निदेशालय वाले प्रकरण में उपेंद्र राय के फंसने को सहारा ग्रुप ने अपना नाक का मुद्दा बना लिया है. जो कुछ भी उपेंद्र राय ने किया, वह सब प्रबंधन की जानकारी और मर्जी के मुताबिक किया. इसलिए इस मामले में उपेंद्र राय को कंपनी का पूरा सपोर्ट है और दो वरिष्ठों को निकाले जाने से स्पष्ट कर दिया गया है कि जो नीतियों के साथ नहीं चलेगा, छिपकर साजिशें करेगा, उन्हें बहुत देर तक अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. फिलहाल दो बड़ों के निलंबन से सहारा ग्रुप में चर्चाओं का बाजार कई दिनों से गर्म है. कोई इन चर्चाओं को निराधार बता रहा है तो कोई इन्हें पुष्ट घोषित कर रहा है.

भड़ास के पास भी इस बारे में कई दिनों से सूचनाएं आ रही थीं पर कहीं से आधिकारिक तौर पर कनफर्म नहीं हो पा रहा था. लेकिन अब स्पष्ट हो गया है कि इन दोनों स्वतंत्र व अनिल का सहारा में काम तमाम हो चुका है. इनके निपटने से उपेंद्र राय के कई दूसरे विरोधी खौफजदा हो गए हैं. इन लोगों को भी डर सता रहा है कि कहीं उनके दिन भी अब गिने चुने न रह गए हों.


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Last Updated ( Tuesday, 31 May 2011 11:56 )