रघुरमन दैनिक भास्कर, एमपी के स्टेट हेड बनाए गए

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करीब छह साल बाद वरिष्ठ पत्रकार एन रघुरमन की मध्य प्रदेश में वापसी हो रही है। पिछले 10 साल से भास्कर पत्र समूह से जुड़े रघुरमन जो अभी डीएनए मुंबई में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, को दैनिक भास्कर का मध्यप्रदेश स्टेट हेड बनाया गया है। रघुरमन ने नया दायित्व संभाल लिया है। उनका मुख्यालय इंदौर में रहेगा और स्टेट हेड के साथ ही फिलहाल उनके जिम्मे सबसे महत्वपूर्ण काम सिटी भास्कर को देशव्यापी बदलाव देने का है।

मध्यप्रदेश में सिटी भास्कर रघुरमन की ही पैदाइश है। अपने दैनिक कालम ''मैनेजमेंट फंडा'' के माध्यम से उन्होंने देश में अपनी एक अलग पहचान भी बनायी है। रघुरमन के पहले तक भास्कर के मध्यप्रदेश स्टेट हेड का दायित्व संभाल रहे अभिलाष खांडेकर को अब दिव्य मराठी में भेजते हुए महाराष्ट्र के स्टेट एडीटर का दायित्व सौंपा गया है। वे दिव्य मराठी के सर्वेसर्वा बनाये गए वरिष्ठ पत्रकार कुमार केतकर को रिपोर्ट करेंगे। खांडेकर को अखबार के दिनबदिन के कामकाज से मुक्त रखते हुए आपरेशन हेड की भूमिका में रहने के निर्देश दिये गये हैं।

तीन साल तक भास्कर के स्टेट हेड रहे खांडेकर ने अपने कार्यकाल में संपादकीय दायित्व निभाने से ज्यादा रूचि भास्कर समहू के लिए जनसंपर्क अधिकारी के रूप में काम करने में दिखायी। उनकी बड़े अफसरों से दोस्ती तथा उनके साथ रातें रंगीन करने में खास रूचि रहती है। दो साल पहले हार्ट की इंजियोप्लास्टी के बाद उनका यह शौक कुछ कम हो गया था। वे भास्कर में कल्पेश याज्ञनिक विरोधी खेमे का प्रतिनिधित्व करते हैं। श्रवण गर्ग से उनकी कभी पटी नहीं और डॉ भारत अग्रवाल के हर आदेश का पालन करने में उन्होंने कभी कोताही नहीं बरती।

उनके स्टेट एडीटर रहते ही राघवेंद्रसिंह, ऋषि पांडे तथा जयश्री पिंगले जैसे प्रतिभावन पत्रकारों ने भास्कर छोड़ा। विजय मनोहर तिवारी ने भाजपा जैसी बीट छोडक़र नेशनल न्यूज रूम में जाना पसंद किया और धंधेबाज लोगों की पौ बारह रही। साल भर पहले खजुराहो में हुई इन्वेस्टर्स समिट के दौरान खांडेकर के आचरण को भास्कर प्रबंधन ने बहुत गंभीरता से लिया था। तीन महीने पहले जब उन्हें मध्यप्रदेश के साथ ही दिव्य मराठी का काम भी सौंपा गया था तभी यह तय हो गया था कि वे अब मध्यप्रदेश में ज्यादा दिन के मेहमान नहीं। हालाकि खांडेकर ने यह कहकर लोगों को खूब भरमाया कि वे तो पदोन्नत किये गये हैं, उन्हें दोहरी सुविधाएं मिली हैं और मध्य प्रदेश का दायित्व भी उनके पास ही रहेगा।

नए स्टेट हेड रघुरमन को सुधीर अग्रवाल का नजदीकी माना जाता है। वे सुधीर के साथ उस टीम में काम करते रहे हैं जो समय समय पर भास्कर में बदलाव के लिए काम करती है। मालिक किस तरह का अखबार चाहते हैं, यह रंगीन तबीतय वाले रघुरमन अच्छी तरह जानते हैं और इसी लाईन को आगे बढ़ाते हुए काम करने का इनाम उन्हें मिला है। उन्हें इंदौर में बैठाने के पीछे सुधीर अग्रवाल का एक मकसद और है। वह यह कि भास्कर के इस प्राइम एडीशन में नेशनल एडीटर कल्पेश याज्ञनिक की दखल को कम किया जा सके। रघुरमन कल्पेश के पहले इंदौर के संपादक रह चुके हैं।

यह विश्लेषण एमपी से एक पत्रकार ने भेजा है. संभव है, कुछ आग्रह-दुराग्रह इसमें झलके. सो, अगर आप को कहीं कुछ गलत दिखे तो तुरंत नीचे के कमेंट बाक्स में अपनी बात रखें और विश्लेषण को बैलेंस बनाने की कोशिश करें.


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Comments (2)Add Comment
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written by kalu yadav, June 06, 2011
to call raghuraman a journalist is really a joke.
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written by अभिषेक, June 02, 2011
ये रघुरमण कब से पत्रकार हो गया..? ये मैनेज़र हो सकता है, जुगाड़ू हो सकता है, लेकिन पत्रकार नहीं. सुधीर अग्रवाल के लिए 'सब कुछ' प्रोवाइड कराना ही इसकी योग्यता है।

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