दैनिक जागरण लखनऊ को बड़ा झटका, आशीष मिश्रा ने इस्तीफा देकर इंडिया टुडे ज्वाइन किया

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आशीष मिश्रादैनिक जागरण, लखनऊ की हालत दिनोंदिन खराब होती जा रही है. शेखर त्रिपाठी ने इस अखबार को राजनीति का अखाड़ा बना दिया है. काम करने वालों की कद्र नहीं, आंतरिक राजनीति में जो न इनवाल्व हो उसे साइडलाइन कर दिया जाता है, प्रतिभाशाली लोगों को अपमानित किया जाता है, चापलूसों और मुंहदेखी बात करने वालों की जय जय है.

ऐसे माहौल में अच्छे लोगों का दैनिक जागरण, लखनऊ में रुकना-टिकना दिन ब दिन मुश्किल होता जा रहा है. जिसे जब जहां मौका मिल रहा है, निकल ले रहा है. ताजी सूचना के मुताबिक चीफ रिपोर्टर व चीफ सब एडिटर का काम देख रहे सिटी चीफ और कमिश्नरी डेस्क इंचार्ज आशीष मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है. आशीष करीब सात वर्षों से जागरण में थे. उन्होंने दैनिक जागरण से ही करियर की शुरुआत की थी.

उन्हें रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों कामों में महारत हासिल है. आशीष का चयन इंडिया टुडे मैग्जीन में हो गया है. वे लखनऊ में रहते हुए पूरी यूपी को कवर करेंगे. पद है प्रिंसिपल करेस्पांडेंट. फरजंद अहमद के रिटायर होने के बाद आशीष फिलहाल हिंदी और अंग्रेजी, दोनों इंडिया टुडे के प्रभारी बन गए हैं. 33 वर्षीय युवा व प्रतिभाशाली पत्रकार आशीष को पत्रकारिता विरासत में मिली है. अपने पिता लखनऊ के जाने माने पत्रकार बीर बिक्रम बहादुर मिश्र से पत्रकारिता के संस्कार आशीष ने सीखे. सिविल सर्विस की तैयारी करते वक्त अचानक आशीष का मन पत्रकारिता में रमा.

उन्हें स्वर्गीय विनोद शुक्ला ने दैनिक जागरण के जरिए पत्रकारिता के फील्ड में ब्रेक दिया तो आशीष ने विनोद शुक्ला को निराश नहीं किया और अपनी शानदार रिपोर्टिंग से कम समय में अच्छा नाम कमाया. आशीष को मेडिकल और जिला प्रशासन बीट का एक्सपर्ट माना जाता है. दैनिक जागरण, लखनऊ में सबसे ज्यादा एक्सक्लूसिव खबरें देने का रिकार्ड आशीष के नाम है. आशीष लोकल सिटी चीफ हुआ करते थे और डेस्क इंचार्ज के रूप में भी देर रात तक काम करते. पर पिछले कुछ महीनों से शेखर त्रिपाठी ने आशीष को साइडलाइन कर रखा था. तब आशीष ने नई जगह प्रयास करना शुरू किया और इंडिया टुडे से अच्छा मौका मिलने पर जागरण छोड़ने का फैसला कर लिया.

विनोद शुक्ला के कार्यकाल में भी एक बार आशीष ने दैनिक जागरण छोड़कर हिंदुस्तान ज्वाइन करने का फैसला ले लिया था और कुछ एक दिन काम भी किया पर विनोद शुक्ला आशीष को वापस दैनिक जागरण में ले आए. गोंडा के रहने वाले आशीष व उनका परिवार काफी समय से लखनऊ में रहने लगा है. आशीष का एकेडमिक करियर भी शानदार रहा है. उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी (इलेक्ट्रानिक्स) और एमसीसी (मैथ) की डिग्री ली और बीएससी-एमएससी दोनों में ही गोल्ड मेडलिस्ट रहे.


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Comments (12)Add Comment
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written by gagan, June 07, 2011
मै भी हरिशंकर जी की बात से सहमत हू, शेखर सर एक सज्जन आदमी है, उन पर राजनीति का आरोप बेबुनियाद है. असली राजनीति का केंद्र तो कही और है. साफ़ तौर पर कहू तो जब तक दैनिक जागरण लखनऊ में विनोद शील सर समाचार संपादक थे तब तक तो सब कुछ सही था. ये गिरावट तो शील सर के तबादले के बाद शुरू हुई है, . मै आशीष सर की बात से भी सहमत हू, यू किसी की नितांत निजी जानकारिया चोरी करना और उसका मनचाहा प्रयोग करना गलत है साथ में आईटी एक्ट के तहत अपराध भी है
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written by rksingh bareilly, June 05, 2011
शेखर त्रिपाठी ne jamen se judkar ka kiya hai.unper tika tippdi na insafi hai.wah Vinod ji ke chele hai.bure hohi nahi sakte.शेखर त्रिपाठी ke flag ke neeche akne wale ka swagat, jane wale ko badhai. RK SINGH Journalist Bareilly
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written by Harinath Kumar BHU, June 04, 2011
Sir! aap ki parichhain men maine do mahine internship kiya hai. yeh aap ke sath do mahine ka anubhav hame bahut prabhavit kiya hai. aapne jis prakar dainik jagaran lko chhodane ki jajba dikhai hai, main unmeed karta hu ki usi jajbe ke sath aap india today ko ek nai Prakhar aur Khari aavaj denge....
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written by ashu, June 03, 2011
yashwant ji....krapya lucknow kay hindustan paper main stingar ko diya jaa rahay bahut kam manaday kay baaray may bhi kuch likhay....college say journalism ki sirf degree laykar aanay walay fresher ko 12 say 15000 pm mil raha hay..wahin jo 5-7 years say kaam kar rahan hain unhay sirf 2 say 5000 diyaa ja rahain hain...fresher ko kuch aata bhi nahin hai wahin purano say raat 11 baje tak press relese aur news likhwayee jateen hai.....
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written by paritosh, June 03, 2011
bhadas mahaan hai bhaiyaaaaaaaaaa
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written by alokgupta, June 02, 2011
badhai ho bhai......alok gupta ,correspondent,,saharatv
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written by SP, June 02, 2011
Asheesh patrakarita ka ek bada khetihar aur is peshe ka dalal hai, Uske PITASHRI ki bhi yahi fitarat rahi hai, yah bat samoocha lucknow aur Avadh anchal to janta hi hai. Patrakarita roopi apni kheti ke utpad se usne apni yah marketing karwai hogi? Bhaiyon is-men chinta ya aash-chyarya ki koi bat nahin, aaj to har cheej-har bat, bade-bade karyakram, akhbar, patrikayen aur unke ank-dar ank prayojit ho rahe hain to bhadas to patrakarita ki yah fasal kat hi sakta hai; kyonki is-ka to janma hi bheeshan kuntha se hua hai.
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written by आशीष , June 02, 2011
जागरण में मेरा किसी से कोई विवाद नहीं। मैनें अपने करियर की बेहतरी के लिए इंडिया टुडे ज्‍वाइन किया है। जागरण में मैनें मेहनत और इमानदारी से कार्य किया और इंडिया टुडे में भी ऐसा ही करुंगा। मेरी अनुमति के बिना फेसबुक से फोटो व अन्‍य जानकारियां लेने से मैं आहत हुआ हूं।
आशीष मिश्र
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written by adarsh prakash singh, June 02, 2011
ashish ko meri taraf se dher sari badhai. tumhare kam ko achhi tarah janta hoon. tum aur unchai par jao yahi kamna hai.
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written by Ramesh kumar, June 02, 2011
यशवंत जी, पोताम्बरी की हद है, किसी एक पत्रकार के संस्थान छोड़ने की इतनी बड़ी खबर लगाने का औचित्य समझ नहीं आया, मई भी लखनऊ के एक छोटे अख़बार का प्रतिनिधि हू, मै भी मेडिकल बीट कवर करता हू, पर आशीष जी पत्रकारिता के पुरोधा हैं, ये आपके जरिये ही मालूम पड़ा, जहाँ तक आशीष मिश्र को साइड लाइन किये जाने की बात है तो जागरण की ये पुराणी परंपरा है, आशीष जब इंचार्ज बने होगे तब किसी और को साइड लाइन किया गया होगा, तो अब उनको बुरा नहीं लग्न चाहिए, आपने आशीष जी की पैदाइश से लेकर करियर तक की जानकारी तो दे ही दी है, बस उनके बीवी बच्चों के बारे में और बता देते तो एक किताब लिखी जा सकती थी..
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written by Harishankar Shahi, June 02, 2011
इस खबर से हमारा लेना देना तो कुछ खास है नही. क्योंकि ना तो हम बड़े पत्रकार हैं और ना ही जागरण और उसके राजीनीति से वाकिफ हैं. परन्तु यहाँ हम इसीलिए बोलने को मजबूर हुए हैं क्योंकि यहाँ एक ऐसे व्यक्ति का नाम आया है जो हमारे लिए काफ़ी आदरणीय हैं. शेखर त्रिपाठी जी के बारे में जो हमने महसूस किया है वह है उनकी सरलता. ऐसा नहीं कि यह स्वभाव उनका है उनके परिवार के लोगो से जो मिलने का सौभाग्य मिला उसमे भी वही सरलता की झलक मिली और खूब मिली. जागरण जैसे अखबार के संपादक होने के बावजूद घमंड का ना होना और सबसे प्रेम से मिलना यही शेखर सर का स्वभाव है और वह वैसे ही हैं. जिस अखबार के जिलों के पत्रकार अपने को सबसे ऊँचा मानने लगते हैं उसी अखबार के संपादक शेखर त्रिपाठी सर से हमने जब चाहा तब सीधे उनसे मिले. कभी भी उनसे कोई बात पूछी तो उन्होंने हमे अपने घर के व्यक्ति की तरह बिना लाग लपेट के समझाया. एक बार जब हमने बाबा रामदेव के भारत यात्रा के खिलाफ लेख लिखा था तो कई लोगो हमे उल्टा सीधा कहा. उस समय जब शेखर त्रिपाठी सर को हमने यह बताया तो उन्होंने कहा की अगर कोई परेशान करे तो हमे बताना. ऐसे सरल है त्रिपाठी सर. हमारे जैसे अनजाने नासमझ को हमेशा उन्होंने अपने करीब का माना है हमने उनसे कोई भी बात उनसे कही या कोई मदद मांगी तो उन्होंने उसे किया. जबकि हम उनके लिए क्या मायने रखते हैं, कुछ नहीं, हमारे जैसे कितने उनके आगे पीछे घूमते होंगे.
हम यहाँ यह कहना चाहते हैं कि शेखर त्रिपाठी सर जैसा सरल मनुष्य कोई विद्वेष की राजनीति तो नहीं कर सकता है. कोई उन्हें कुछ भी कहे वह एक सर्वोत्तम इंसान हैं और रहेंगे. ऐसे मनुष्य पर कुछ भी आरोप लगाने से पहले सोचना चाहिए.
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written by dr.s.k.rai, June 02, 2011
I,know Mr.Ashish he is gem in his action and profession.I admire him for his nature.God bless him for the new assingment.

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Last Updated ( Thursday, 02 June 2011 14:56 )