सहारा इंडिया परिवार के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर विनीत मित्तल बर्खास्त

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सहारा समूह में उलटफेर का दौर जारी है. अनिल अब्राहम और स्वतंत्र मिश्रा के बाद विनीत मित्तल पर भी गाज गिरा दी गई है. विनीत मित्तल सहारा में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थे. इन पर वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे हैं. सहारा ने विनीत मित्तल को समूह से बाहर किए जाने की सूचना राष्ट्रीय सहारा अखबार में पहले पन्ने पर विज्ञापन प्रकाशित करके की है.

इस विज्ञापन में विनीत मित्तल के तस्वीर को भी चस्पा किया गया है. विज्ञापन में कहा गया है कि विनीत मित्तल ने संस्था के खिलाफ जो काम किए और जो वित्तीय हेराफेरी की है, इससे प्रमाण व सुबूत मिल चुके हैं और जांच में यह सब सही पाया गया है, इसी कारण उनको निकाला जा रहा है. विज्ञापन में यह भी लिखा गया है कि पहले भी विनीत पर आर्थिक गड़बड़ियों के आरोप लगते रहे हैं पर वे संदेह का लाभ लेकर बच जाते थे. पर इस बार उनके खिलाफ लगे आरोप सच पाए गए इसलिए उन्हें बर्खास्त किया जा रहा है. एमसीसी चीफ विनीत्त मित्तल को बाहर किए जाने के बाद चर्चा है कि सुब्रत राय ने एक नई कोर टीम बनाई है जिसके चीफ कोई सौरभ चक्रवर्ती बनाए गए हैं. ये कोर टीम पूरे सहारा ग्रुप के सभी विभागों यहां तक कि मीडिया को भी नियंत्रित करेगा और सीधे सुब्रत राय को रिपोर्ट करेगा.

पहले ये व्यवस्था विनीत्त मित्तल के नेतृत्व में एमसीसी करती थी. ये वही विनीत्त मित्तल हैं जिनके खिलाफ ईडी और सीबीआई एक इंस्टीट्यूट के मामले में पहले से जांच कर रही है. विनीत्त मित्तल अभी तक सबसे मजबूत माने जाते रहे हैं. सहारा के अंदर एमसीसी हमेशा से प्रभावशाली भूमिका में रही है. सारे विभाग अपनी रिपोर्ट एमसीसी के जरिए ही भेजता है और एक तरह से सुब्रत राय सहारा का पूरा कामकाज एमसीसी के जरिए ही देखते आए हैं. लेकिन ताजा घटनाक्रम ने सहारा की आंतरिक कलई खोल दी है. सहारा में आंतरिक तानाबाना बदला जा रहा है. कल शाम को ही इस तरह का एक सर्कुलर नोएडा कैंपस में टांगा गया है. पिछले एक साल में ये पहला मौका है जब सहारा के मालिक सुब्रत राय को इस तरह का सर्कुलर टांगना पड़ा है. विनीत मित्तल के निकाले जाने के कई निहितार्थ बताए जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि कुछ और बड़े लोगों का विकेट गिर सकता है या उनके पर-कद कतरे जा सकते हैं.


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Comments (3)Add Comment
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written by ramesh, June 07, 2011
भाई आप सही कह रहे हैं। पत्रकारिता के नाम पर उपेंद्र राय और उनके तमाम सहयोगियों ने जो कुछ किया वह सच में शर्मनाक है। लेकिन फिर भी पद पर बने है। सुब्रत जी को शायद ऐसे ही लोगों की जरुरत है। जो दलाली कर सकें और सहारा के माध्यम से लोगों को लुट सकें। आज उपेंद्र राय पर पुरा मीडिया जगत थु थु कर रहा है। इस माह की हिन्दी की मासिक पत्रिका हंस में भी उपेंद्र राय को लेकर कई सवाला उठाए गए हैं,लेकिन सुब्रत राय को इससे कोई फर्क थोड़े ना पड़ता है। उनकी तो दलाली चल रही है
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written by Ravi, June 06, 2011
अगर सहारा में सब चोर है तो सहारा लोगों के अरबों रुपये कैसे लौटाएगा? सहारा हाउसिन्ग जज़रों लोगों से अरबों ले चुका है पर मकान नहीं दे पा रहा है. एम एस ओ को भी पैसा नही दे पा रहा है सहारा ग्रुप. अभी हाल ये है की हैथवे ने सहारा के तमाम चैनल दिखाना बंद कर दिया है. डीजी केबल और एसीटी ने भी दो महीने तक चैनल नहीं दिखाए. सहारा के चेक बऔंस हो रहे हैं. कर्मचारियों को इंक्रीमेंट नहीं मिल रहे हैं, कर्मचारियों में भगदड़ मची है.
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written by raj srivastava , June 05, 2011
छोटी सोंच के छोटे लोगों के दरबार में ऐसा ही होता है. पहले घटिया लोगों को सर पर बिठाया जाता है , फिर उनकी उपयोगिता पूरी हो जाने पर जलील करके निकाल दिया जाता है. सुब्रतो राय ने ऐसा पहले कई बार किया है. उदाहरण के तौर पर, राजीव सक्सेना आज संपादक बना बैठा है, जिसे सुब्रतो राय ने बाकायदा अखबार में नोटिस चस्पा कर के बहार निकाला था क्योंकि इस सक्सेना पर सहारा के नाम पर पैसे उगाहने और कई अन्य घटिया हरकते करने का आरोप था. इसके बाद सक्सेना एक मैगजीन में चला गया था , पर वहां भी इसे ब्लेकमेल के आरोप में हवालात की हवा खानी पड़ी थी. अब इसे सुब्रतो राय ने फिर से सर पर बैठा लिया है.

पर इस दलाल टाइप के पत्रकार , सक्सेना के बारे में ज्यादा वक्त ख़राब करने का क्या फायदा जब सुब्रतो ने एक और बड़े दलाल , उपेन्द्र राय को इससे भी ऊपर बिठा रखा है. आपकी वेबसाइट पर जब मैंने उपेन्द्र की नीरा राडिया से बातचीत सुनी तो इसकी अशुध्द भाषा सुन कर शर्म आ गयी अपने की इसकी जमात में ( यानी पत्रकार) देख कर. यह उपेन्द्र तो एक अशिक्षित व्यक्ति है जो स्टोरी को `श्टोरी' कह रहा है राडिया से बात करते वक़्त. इस पूरी बातचीत में उपेन्द्र के IQ स्तर का साफ़ पता चलता है. अगर ऐसा आदमी सुब्रतो राय को न्यूज़ डिरेक्टर के पद लायक लगता है तो भाई, सक्सेना जैसे लोग तो मलाई खायेंगे ही. पत्रकारिता जाये भाड़ में .

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Last Updated ( Saturday, 04 June 2011 14:47 )