पत्रिका, रायपुर से राजेश वालिया और अनिल मिश्रा का इस्‍तीफा

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पत्रिका रायपुर से पलायन का दौर शुरू हो गया है। प्रबंधन की नीतियों के कारण लोग संस्‍थान को बाय बाय कर रहे हैं। राजस्थान पत्रिका के मालिक निहार कोठारी और समूह संपादक भुवनेश जैन की मौजूदगी में रायपुर संस्करण संपादकीय कोर टीम के दो सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने वालों में सिटी डेस्क इंचार्ज राजेश वालिया एवं विशेष संवाददाता अनिल मिश्रा हैं।

राजेश वालिया हिंदुस्तान, मेरठ से पत्रिका आए थे। वे एक बार फिर मेरठ रवाना हो गए हैं। वालिया संपादक गिरिराज शर्मा की कोर टीम में थे। संपादक के सभी काम-काज जैसे प्रजेंटेशन बनाना आदि का जिम्मा वालिया के पास रहता था। हालांकि नजदीकियों के कारण वालिया से रायपुर के स्थानीय पत्रकार खासा नाराज रहा करते थे। लोग लगातार यह कह रहे थे कि संपादक क स्थानीय लोगों पर भरोसा नहीं है। इसी के चलते भिलाई संस्करण में कुछ दिनों पहले बगावत हुई थी। यहां से ब्यूरो चीफ बृजेश चौबे के साथ चार लोग पत्रिका छोड़कर भास्कर रवाना हो गए थे।

विशेष संवाददाता अनिल मिश्रा पत्रिका ज्‍वाइन करने से पहले तहलका के स्टेट करेंसपाडेंट थे। इससे पहले नई दुनिया में लंबे समय तक दांतेवाड़ा के ब्यूरो चीफ रहे। पत्रिका में उनकी खबर 'पुलिस ने जलाई 300 आदिवासियों के घर'  काफी चर्चित रही। यहां वे स्टेट लेबल की खबरों का प्रकाशन कर रहे थे। अनिल दैनिक  भास्कर, रायपुर संस्करण में विशेष संवाददाता के पद के गए हैं। बताया जा रहा है कि वे संपादक से नाराज चल रहे थे। पत्रिका से तीन और लोगों के छोड़ने की संभावना है। इस संदर्भ में पत्रिका के संपादक गिरिराज शर्मा ने बताया कि दोनों लोगों ने अभी इस्‍तीफा नहीं दिया हैं, परन्‍तु वे दूसरे संस्‍थानों में जा सकते हैं.


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Comments (2)Add Comment
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written by lovely, June 14, 2011
Mr. Kothari u should control the situation otherwise no one can give u support. Your colleagues are not doing well with subordinate employees. If this situation is continue then a day will come when no one can join this group and as soon as option is there all the person working under this banner is also say goodby. Hope you will look into the matter and personaly meet your employees to solve their problems.
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written by पत्रकार साथी-रायपुर, June 10, 2011

पत्रिका प्रबंधन को अव्यवस्था दूर करने पर ध्यान देना चाहिए। अन्य अखबारों में नियमित कर्मचारी के रुप में काम कर रहे लोगों को अच्छे वेतन का प्रलोभन देकर पत्रिका ज्वाइन कराने के बाद न तो पीएफ का लाभ दिया जा रहा है। न ही कामकाजी माहौल। यही हाल रहा तो पत्रिका को रिपोर्टर नहीं मिलेंगे। ज्वाइनिंग के समय किए गए वादे को भी पूरा नहीं किया जा रहा है। अनेक पत्रकारों को बंधुवा मजदूर की भांति ठेका पद्धति से रखा गया है। जबकि, यहां सेवा देने से पहले पत्रकार अन्य संस्थान में नियमित कर्मचारी थे। उन्हें वेतन भत्ता और अन्य मूलभूत सुविधाएं मिल रही थी। अभी भी समय है, प्रबंधन खामियां दूर करें और उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों का अपने व्यवहार में परिवर्तन लाना चाहिए। नहीं तो लोग पलायन करते रहेंगे।

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