पत्रिका, बेंगलूरु के नए संपादकीय प्रभारी बने राजेंद्र सिंह नरुका

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आखिर राजस्थान पत्रिका के बेंगलूरु संस्करण की पत्रिका प्रबंधन ने सुध ले ही ली। बेंगलूरु संस्करण में राजेन्द्र सिंह नरुका ने बतौर संपादकीय प्रभारी प्रभार संभाल लिया है। बताया जा रहा है कि उनके प्रभार संभालने के बाद से ही नंदकिशोर तिवारी अवकाश पर चले गए।

सूत्रों के मुताबिक नंदकिशोर तिवारी के विवादों में घिरे रहने के कारण उनका संपादकीय प्रभारी का पद छीन लिया गया। इसके साथ ही अमित श्रीवास्तव का भी चेन्नई तबादला कर दिया गया है। सुरेन्द्र राजपुरोहित को वापस चीफ रिपोर्टर बना दिया गया है, जबकि नूरुद्दीन रहमान को सिटी/डाक डेस्क प्रभारी बनाया गया है। गौरतलब है कि अमित श्रीवास्तव पर भी कई तरह के आरोप लगते रहे हैं और कई लोगों ने उनको कारण बताते हुए अपना इस्तीफा प्रबंधन को दे दिया।


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Comments (4)Add Comment
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written by mukesh jain, June 13, 2011
प्रविण भाई, आप एक कदम पीछे है राजस्थान पत्रिका के बेंगलूरु संस्करण के सम्पादक मोतीसिहं नहीं उनका भतीजा सुरेन्द्र है जो यहां की समाजों के कार्यक्रमों में केमरा लेकर गुमता रहता है और अपने मतलब के लोगों को फोटों का एगल बता कर कहता है की आप की यह फोटों छापुगां.... और वही फोटो छपती है । और फिर क्या मंच संचालक सूरेन्द्र साहब को आवाज देता है कि राजस्थान पत्रिका के सम्पादक सूरेन्द्र साहब स्टेज पर पधारे.... उनका माला व साफा पहना कर स्वागत होता हैं । पत्रिका प्रबंधन चाहे तो कई समाजों से वह वीडियों और फोटो देख सकते हैं । खेर पत्रिका को क्या फर्क पड़ता है सम्पादक राजेन्द्र सिंह नरुका हो या नंदकिशोर तिवारी या मोतीसिहं या सूरेन्द्र साहब... नरुका - तिवारी तो आते - जाते रहेगें मोतीसिहं या सूरेन्द्र साहब अपने कमाऊ पुत है...
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written by rahul, June 13, 2011
indore mian bhi bhrastachar se ladne ke liye nihar bhai sab socho. indore patrika main charam par phuch gaya hai bharastachar. chity cheaf ko tuarant hatao
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written by PRAVEEN, June 13, 2011
राजस्थान पत्रिका के बेंगलूरु संस्करण के न तो नंदकिशोर तिवारी संपादकीय प्रभारी है और न ही राजेन्द्र सिंह नरुका बेंगलोर पत्रिका के सम्पादक है श्री मोतीसिहंजी राजपुरोहित है, यह मै नहीं कह रहा हूं यहां के पाठक कह रहे है । दरअसल श्री मोतीसिहंजी राजपुरोहित बेंगलोर में केवल राजस्थान पत्रिका विज्ञापन एजेन्ट हैं मगर जो लोगों को वे पत्रिका के सम्पादक कहते है इस बात कि जयपुर बार बार सिकायत की गई मगर पत्रिका प्रबंधन ने सुध नहीं ली गयी कारण कि वे राजस्थान पत्रिका को सबसे ज्यादा विज्ञापन देते हैं कारण की यहां की सभा - संगठनों यह भ्रम पैदा कर दिया गया कि केवल मोतीसिहं को विज्ञापन देगें तो ही आप की खबर छपेगी और होता भी एसे ही है ।
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written by dinesh, June 12, 2011
raipur & jabalpur ki shudh kab legi sansthan

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