आर्यन के आउटपुट हेड डा. अमरदीप का इस्‍तीफा

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बिहार के रिजनल न्‍यूज चैनल आर्यन टीवी से आउटपुट हेड डा. अमरदीप ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे काफी समय से आउटपुट संभाल रहे थे. बताया जा रहा है कि उनका कुछ मुद्दों पर प्रबंधन से विवाद हो गया था, जिसके चलते वे चार दिनों से ऑफिस नहीं जा रहे थे. अंतत: उन्‍होंने अपना इस्‍तीफा सीएमडी एवं चैनल हेड को भेज दिया.

चर्चा है कि पूरा मामला शिफ्ट इंचार्जी को लेकर हुए विवाद का था. आर्यन में काफी समय से मार्निंग शिफ्ट संभाल रहे रंजीत की जगह कुछ दिन पहले आर्यन ज्‍वाइन करने वाले अफरोज को शिफ्ट इंचार्ज बनाया गया था. जिसके बाद से चैनल में आंतरिक तनाव था. आउटपुट संभाल रहे डा. अमरदीप ने प्रबंधन से कुछ चीजों को बदलने को कहा, परन्‍तु प्रबंधन ने उनकी बातों पर ध्‍यान देने की बजाय रंजीत को सस्‍पेंड कर दिया. इसके बाद से ही वे कार्यालय नहीं जा रहे थे.


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Comments (3)Add Comment
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written by copy editor, July 03, 2011
gunjan jatiwadi hai.
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written by Ranjeet Kumar, June 19, 2011

dr sb ka jana tk ta tha kun ki channel head lobby chal rahi hai----------anil sb is lobby se bachiye -nahi to ye channel bh pichhe ho jayega
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written by Ajay Shukla, June 18, 2011
श्री संजय मिश्र ( चैनल हेड), श्री सर्वेश कुमार सिंह( स्टेट हेड), श्री राजेंद्र प्रसाद सिंह(बिजनेस डेवेलोपमेंट मैनेजर),श्री संजय कुमार( आउटपुट हेड), राजेश कुमार(असाइनमेंट) , शाशिकेश रंजन( प्रोग्रामिंग हेड) इकरामउल्लाह( प्रोग्रामिंग डिपार्टमेंट ) शशि भूषण(तेज तर्रार रिपोर्टर), विनीता (एंकर ) बंटी वालिया ( एंकर ) ऐसे ना जाने कितने लोग हैं जिन्होंने आर्यन छोड़ देने में ही अपनी भलाई समझी......जिन्हें भलाई समझ में नहीं आयी उन्हें समझा दिया गया ......बाहर का रास्ता दिखा कर....... जिन्हें फिर भी चैनल छोड़ना उचित नहीं समझा उनकी तनख्वाह रोक दी गयी......ताज़ा उदाहरण है चैनल का विज्ञापन विभाग....... उन्हें बिना कोई नोटिस दिए... जून महीने कि तनख्वाह नहीं मिली....... मैनेजमेंट के अन्दर अगर हिम्मत थी तो तनख्वाह देकर उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता........ उन्हें नहीं मालूम कि श्रम विभाग भी कोई चिड़िया का नाम है...... मीडिया हाउस चलाना और कंसत्रक्सन कंपनी चलाने में काफी अंतर है..... श्रीमान अनिल का इरादा ही यही है... दो चार महीने काम करवा कर उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दो.... एक आध महीने कि तनख्वाह तो बच ही जायेगी.......उन्हें शायद यह नहीं मालूम कि ____ छिलने से मुर्दा हल्का नहीं होता है..... अभी भी वक़्त है..... संभल जाएँ तो अच्छा हो.....

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