प्रभात खबर ने हिंदुस्‍तान से गिराया शिवशंकर का विकेट

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आजकल बिहार में हिंदुस्तान और प्रभात खबर के बीच एक दूसरे के स्टाफ़ को बहला फ़ुसलाकर अपने यहां लाने का सिलसिला चल रहा है। शिवशंकर सिंह हिंदुस्तान, गया के सुपर स्ट्रिंगर थे। कल उन्होंने हिंदुस्तान को छोड़कर प्रभात खबर ज्वाइन कर लिया, कारण था हिंदुस्तान के द्वारा की गई उपेक्षा और गया स्थित मुख्य संवाददाता सतीश मिश्रा का व्यवहार।

शिवशंकर ने १९९४ में गया जिले के कोंच से हिंदुस्तान के रिपोर्टर के रुप में अपने कैरियर की शुरुआत की थी। २००२ में गया के हिंदुस्तान प्रभारी सुनील सौरभ के कार्यकाल में वे हिंदुस्तान के सुपर स्ट्रिंगर बनाये गये। २००४ में अवधेश ओझा हिंदुस्तान के प्रभारी बनकर गया आए और आने के साथ ही सुनील सौरभ का पता साफ़ कर दिया। अवधेश ओझा ने सतीश मिश्रा को सासाराम से गया बुलाकर उन्हें सुपर स्ट्रिंगर बनाया। २००९ में अवधेश ओझा के रिटायर्ड होने के बाद सतीश मिश्रा प्रभारी बन गये बाद में इनका कार्यालय संवाददाता के रूप में प्रमोशन हुआ और अभी दो माह पहले सतीश मिश्रा मुख्य संवाददाता बनाये गए हैं।

शिवशंकर को अपनी उपेक्षा खल रही थी लेकिन करते क्या। प्रभात खबर के गया प्रभारी कंचन खबर के बजाय प्रभात फ़ेरी पर ज्यादा ध्यान लगा रहे थे, मौका अच्छा था, आफ़र मिला और शिवशंकर ने हिंदुस्तान छोड़कर प्रभात खबर ज्वाइन करना सही समझा। शिवशंकर को प्रभात खबर में संपादकीय प्रभार मिलने की संभावना है। कंचन की वरीयता बरकरार रहेगी और वे वरीय प्रभारी रहेंगे। लेकिन अभी से यह कयास लगना शुरु हो गया है कि प्रभात खबर के इस चौके का जवाब हिंदुस्तान खबर कंचन को अपने यहां लाकर छक्के के रुप में देगा।

राष्ट्रीय सहारा के गणेश प्रसाद ने भी सहारा को बेसहारा कर के अभी ३-४ दिन पहले प्रभात खबर ज्वाइन किया है और उनका भी सहारा छोड़ने का कारण है उसके गया प्रभारी गोपाल सिंह का व्यवहार। वैसे गया के दैनिक अखबारों के वरीय पदों पर विराजमान लोगों के पास करने को कुछ खास काम तो होता नहीं। सुदूर देहात से आये समाचार को भेजकर आपसी लड़ाई में ही यहां के अधिकांश अखबारों के शीर्ष पर बैठे लोगों का समय व्यतीत होता है। यहां के पत्रकारों की कलम की धार कुंद पड़ गई है और उसका कारण है वर्षों से एक ही जगह जमे रहना।

गया से मदन कुमार तिवारी की रिपोर्ट.


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