न्‍यूज एक्‍सप्रेस को झटका, इनवेस्‍टीगेशन हेड रजत अमरनाथ ने इस्‍तीफा दिया

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रजत अमरनाथ लांचिंग से पहले ही न्‍यूज एक्‍सप्रेस को झटका लगना शुरू हो चुका है. वरिष्‍ठ पत्रकार एवं न्‍यूज एक्‍सप्रेस में इनवेस्‍टीगेशन हेड रजत अमरनाथ ने इस्‍तीफा दे दिया है.  वे प्रो. अरिंदम चौधरी की कंपनी प्‍लानमैन मीडिया के मैगजीन द संडे इंडियन से इस्‍तीफा देकर न्‍यूज एक्‍सप्रेस पहुंचे थे. रजत को खोजी पत्रकारिता का दिग्‍गज माना जाता है.

रजत ने अपने करियर की शुरुआत अठारह साल पहले दूरदर्शन से की थी. वे डीडी टू के लिए कार्यक्रम बनाते थे. इसके बाद वे जी न्‍यूज से जुड़ गए. जी न्‍यूज के लांचिंग टीम के सदस्‍य रहे. जी पर प्रसारित होने वाली इनसाइड स्‍टोरी के शुरुआत का श्रेय रजत अमरनाथ को ही जाता है. यहां से इस्‍तीफा देने के बाद 2002 में सहारा चले आए. यहां भी सहारा की लांचिंग टीम के हिस्‍सा रहे. यहां से इस्‍तीफा देने के बाद स्‍टार न्‍यूज ज्‍वाइन कर लिया था. यहां भी खोजी पत्रकारिता पर आधारित कई खबरें कीं. यहां से इस्‍तीफा देने के बाद द संडे इंडियन चले गए थे.

रजत ने फूलन देवी, जेसिका लाल, क्रिकेट सट्टेबाजी समेत कई विषयों पर खोजी पत्रकारिता की. आतंकवाद, लिट्टे, लश्‍कर-ए-तैयबा समेत कई खतरनाक संगठनों के काम करने, फंड जुटाने के तरीकों पर खोजी खबरें ब्रेक कीं. खोजी पत्रकारिता के लिए ये लगभग देश के सभी राज्‍यों यात्रा कर चुके हैं. एक खबर करते समय आजमगढ़ में इन पर कुछ लोगों ने हमला भी कर दिया था.

इस्‍तीफा दिए जाने के कारणों के बारे में जब रजत अमरनाथ से बात की गई तो उन्‍होंने कहा कि वे निजी कारण से इस्‍तीफा दे रहे हैं. काफी समय से स्‍वास्‍थ्‍य ठीक नहीं चल रहा था, जिसके चलते उन्‍होंने इस्‍तीफा दे दिया. उन्‍होंने कहा कि साल भर के लिए मीडिया से छुट्टी ले ली है. इस दौरान किसी मीडिया हाउस के साथ काम नहीं करूंगा. अब किसी मीडिया संस्‍थान को इनवेस्टिगेटिव स्‍टोरी नहीं चाहिए, बल्कि उन्‍हें अपने हिसाब की खबरें चाहिए. अब खुद का बिजनेस करने की योजना है.

रजत ने कहा कि अब मैं खुद की डिटेक्टिव एवं सिक्‍युरिटी एजेंसी चलाने जा रहा हूं. इनवेस्‍टीगेशन मेरा पैशन है यह चलता रहेगा. मैंने मीडिया से छुट्टी ली है पर मेरी कलम चलती रहेगी. उन्‍होंने कहा कि अब मैं बिजनेस करने जा रहा हूं कि अगर मेरे किसी पत्रकार साथी को मेरे बारे में कुछ भी गलत करने की जानकारी मिले तो वो बेहिचक मेरे से पूछे बिना छाप सकता है.


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Comments (2)Add Comment
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written by Harishankar Shahi, July 27, 2011
गुरुदेव आपने बहुत भारी शब्दों में व्याख्या की है. यह बहुत बड़े स्तर की बातें हैं तो आप कुछ भी कह सकते हैं. परन्तु हम यह कहेंगे की जरा यह भी देख लीजियेगा की मीडिया के गुरु लोग ही कुएं में गन्दगी भी भरते हैं. इसीलिए मीडिया के काम को छोड़ने की तुलना लोग जरायम पेशा छोड़ने से करने लगें हैं. परन्तु बड़े पत्रकारों की बड़ी माया.
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written by कुमार सौवीर, लखनऊ, July 27, 2011
रजत के इस जुझारू जज्‍बे को सलाम।
सलाम पर सलाम।
मुझे तो अक्‍सर यही लगता रहा है कि हम पत्रकार कुएं के मेंढक की तरह हैं, जो कुंए की जगत से ऊपर दिखते फलक से आगे देखने की हिम्‍मत जुटा ही नहीं पाते, जबकि दिन भर में ही सैकडों बाल्टियां पानी लेने के लिए कुंए में उतरती हैं और हमारे जैसे मेंढक उनमें उचक कर बैठकर बाहर निकलने का साहस ही नहीं जुटा पाते। हमें लगता है कि हमारी दाल-रोटी केवल इस कुंए के भीतर ही विधाता ने लिख दी है। बाहर निकल कर नये फलक खोजने का जज्‍बा ही हममें नहीं रह गया है।
वजह यह कि हमें डर लगता है कि हम बाहर निकल कर कहीं भीड़ में न खो जाएं, मर न जाएं। यह खोने-मरने का डर ही हमें सताता रहता है। हम बनते तो बड़े हैं, लेकिन छोटी समस्‍याओं के छोटे समाधान ही खोजने में खपा करते हैं।
बड़ी चुनौतियों के समाधान खोजने की तरफ हमारा दिमाग ही नहीं जाता। पौधे पर बैठ कर बड़े दरख्‍त पर चढ़ने का हौसला आ ही नहीं सकता।
फिलहाल, मेरी भी यही हालत है। लेकिन कोशिश में हूं कि ऐसे कुंए से जितनी जल्‍दी हो सके, निकल जाऊं।
कुमार सौवीर, लखनऊ

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Last Updated ( Wednesday, 27 July 2011 11:14 )