दैनिक भास्‍कर से अजय उमट का इस्‍तीफा, टीओआई में सीनियर एडिटर बने

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दैनिक भास्‍कर, दिल्‍ली से नेशनल पॉलिटिकल एडिटर अजय उमट ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे अब टाइम्‍स ऑफ इंडिया से जुड़ गए हैं. उन्‍हें टाइम्‍स ऑफ इंडिया, अहमदाबाद का सीनियर एडिटर बनाया गया है. मूल रूप से गुजरात के रहने वाले अजय उमट पिछले ढाई दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं.

हिंदी, अंग्रेजी एवं गुजराती भाषा पर मजबूत पकड़ रखने वाले अजय उमट ने करियर की शुरुआत 1987 में जनसत्‍ता-लोकसत्‍ता से की थी. इसके बाद वे टाइम्‍स ऑफ इंडिया गुजराती, इंडिया टुडे गुजराती के साथ वरिष्‍ठ पदों पर रहे. यहां से इस्‍तीफा देने के बाद वे 1992 में गुजरात समाचार से रेजिडेंट एडिटर के रूप में जुड़ गए. 2003 तक यहां रहने के दौरान इन्‍होंने गुजरात दंगा, गुजरात भूकंप समेत कई बड़ी खबरों का कवरेज किया. 2003 में दिव्‍य भास्‍कर से जुड़ गए. दिव्‍य भास्‍कर को गुजरात में जमाने में इन्‍होंने अपना अहम योगदान दिया. बाद में इन्‍हें दिव्‍य भास्‍कर का स्‍टेट हेड बना दिया गया था. पिछले दिनों ही अजय उमट को प्रमोट कर दिव्‍य भास्‍कर से दैनिक भास्‍कर लाया गया था. इनकी राजनीतिक पकड़, जानकारी एवं विश्‍लेषण की क्षमता को देखते हुए इन्‍हें नेशनल पॉलिटिकल एडिटर बना दिया गया था.

बड़ौदा के एमएस यूनिवर्सिटी से बीएससी, एमसडब्‍ल्‍यू एवं एलएलबी करने वाले अजय उमट पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एवं मनमोहन सिंह के कई विदेशी दौरों में उनके साथ रहे हैं. अमेरिका, रुस, त‍जाकिस्‍तान, सीरिया, ब्राजील, मारीशस, थाइलैंड, केन्‍या, स्विटजरलैंड, तंजानिया, यूथोपिया, साउथ अफ्रीका समेत कई देशों की यात्रा कर चुके हैं. पिछले साल इन्‍हें बेस्‍ट एडिटर का हरेंद्र दवे पुरस्‍कार भी मिला है. इसके अलावा भी इन्‍हें कई पुरस्‍कारों से सम्‍मानित किया जा चुका है. माना जा रहा है कि गुजरात में बेहतर मौका मिलने के चलते इन्‍होंने भास्‍कर को बाय किया है.


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Comments (3)Add Comment
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written by om, August 01, 2011
आदरणीय सुधीर जी,

आप ये क्‍यों नहीं समझते हैं कि भास्‍कर की असली ताकत क्‍या है। वे कौन लोग थे जिन्‍होंने भास्‍कर को आगे पहुंचाया। क्‍या आपको नहीं लगता वे लोग भास्‍कर और उससे भी ज्‍यादा आपके लिए काम करते थे। क्‍यों, क्‍योंकि वे आपके साथ आपके सामने काम करते थे। आप प्रशंसा कर देते, वे खुशी से झूम उठते।
आपने कभी सोचा 5 , 10 या 15-20 साल काम करने वाला अचानक क्‍यों छोड कर चला जाता है। वो कौन सी टीम थी जिसने शुरु में काम किया। वे कौन सा और क्‍या काम करते थे। कैसा और किसके लिए करते थे। आप एक भी बार सोचेंगे तो अपने आप इसलिए समझ्‍ा जाएंगे क्‍योंकि आप भी उनके साथ काम करते थे। जिन्‍होंने अपने सालों साल आपको दिए उन्‍हें और उनके समर्पण को सुनिए - समझिए। लोग परेशान होंगे तो 10 या 20 हजार कम में भी काम कर लेंगे लेकिन आपका भास्‍कर आपका तो मूल और मन का काम है। कितने संघर्ष से आपने इसे इस काबिल बनाया है ये आप समझते हैं या आपके साथ तब काम करने वाले लोग।
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written by sunil agarwal, July 31, 2011
Its a major blow for Bhaskar in Gujarat. As TOI is all set to carryout their Gujarati Edition, and Umat will be very useful for them.
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written by anil gupta, July 30, 2011
yah news dekh kar bahut khushi hui.suna tha ki dr bharat unka patta katne ke phirak mai lage huye the par lagta hai ajay ko samya rahte samajh aa gaya ki unko delhi to bheja ja raha hai par khuch din mai dr apne gande khel par aa jayege. waise bhi bhaskar mai senior aur wafadar logo ki fajihat ki ja rahi hai. dr bharat itne insecure hai ki koi wo majboot editor aur na reporter chate hai.sudhir agarwal ko dr ne kaya dose de rakhi hai ki wah sab galat hone de rahe hai.suna hai ki aajkal bhaskar mai jo chal raha hai usko lekar sudhir aur girish mai matbhed kafi ho gaye hai. pariwar ki bethak hogi.bhagwan bhaskar ko sadbudhi de ki apna hi unke boat mai hole kar raha hai. dr hi ilaz karte karte khud bimari ban gaya hai bhaskar ke liye

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