हिंदुस्‍तान के कार्यकारी संपादक गोविंद सिंह इस्‍तीफा देकर प्रोफेसर बनेंगे

E-mail Print PDF

वरिष्‍ठ पत्रकार तथा हिंदुस्तान के कार्यकारी संपादक गोविंद सिंह अब मुख्‍यधारा की पत्रकारिता को अलविदा कहने वाले हैं. लगभग तीन दशक के अपने करियर में गोविंद सिंह ने पत्रकारिता के अलावा अनुवादक एवं हिंदी अधिकारी के रूप में भी काम किया. बेहद सरल स्‍वभाव के गोविंद सिंह अब उत्‍तराखंड मुक्‍त विश्‍वविद्यालय के साथ प्रोफेसर के रूप में जुड़ने जा रहे हैं. अभी ज्‍वाइन करने की तिथि एवं अन्‍य औपचारिकताएं बाद में तय होंगी.

गोविंद सिह मूल रूप से उत्‍तराखंड के पिथौरागढ़ रहने वाले हैं. उन्‍होंने करियर की शुरुआत अनुवादक के रूप में इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्‍चरल रिसर्च (आईसीएआर) से की थी. यहां से छलांग लगाकर मुंबई में टाइम्‍स के साथ ट्रेनी जर्नलिस्‍ट के रूप में जुड़ गए. वहां धर्मयुग और नवभारत के साथ काम किया. नवभारत से इस्‍तीफा देने के बाद आईडीबीआई, कोलकाता में हिंदी अधिकारी के रूप में चयनित होकर पहुंचे. वहां कुछ समय काम करने के बाद सन 1990 में इस्‍तीफा देकर नवभारत टाइम्‍स, दिल्‍ली में सहायक संपादक के रूप में जुड़ गए. सन 1999 में प्रिंट मीडिया से इलेक्‍ट्रानिक मीडिया की तरफ रुख किया और जी न्‍यूज की शुरुआती टीम में डिप्‍टी एडिटर बन गए. यहां से आजतक पहुंचे. यहां वे रिसर्च डिपार्टमेंट के हेड बनाए गए. आज तक को अलविदा कहकर आउट लुक पत्रिका में एसोसिएट एडिटर बन गए. यहां भी इनका मन नहीं रमा, इस्‍तीफा देकर अमेरिकन एंबेसी की हिंदी पत्रिका स्‍पैम के संपादक बन गए. 2005 में इन्‍होंने अमर उजाला ज्‍वाइन कर लिया. यहां इन्‍हें एसोसिएट एडिटर बनाया गया. फिर एक्‍जीक्‍यूटिव एडिटर बने. शशि शेखर के हिंदुस्‍तान जाने के बाद अमर उजाला के संपादक भी रहे, परन्‍तु कुछ समय बाद ही शशि शेखर इन्‍हें हिंदुस्‍तान के साथ जोड़ लिया.

सूत्रों का कहना है कि शीघ्र ही गोविंद सिंह हिंदुस्‍तान और पत्रकारिता की मुख्‍य धारा से हटकर शिक्षा की दुनिया में कदम रख देंगे. अब वे उत्‍तराखंड मुक्‍त विश्‍वविद्यालय के छात्रों को प्रोफेसर के रूप में शिक्षा देते नजर आएंगे. सारी औपचारिकताएं लगभग पूरी हो चुकी हैं, परन्‍तु अभी तक गोविंद सिंह के ज्‍वाइन करने की तिथि तय नहीं हुई है. फिलहाल उन्‍होंने अभी हिंदुस्‍तान को इस्‍तीफा नहीं दिया है, परन्‍तु अपने नए कार्य के लिए संस्‍थान को जल्‍द ही बाय कर देंगे.


AddThis
Comments (9)Add Comment
...
written by नीरेंद्र नागर, October 07, 2011
कुंअर प्रसून को पता नहीं है कि अखबार में संपादकीय किसी के नाम से नहीं जाता है। अगर शशि शेखर किसी अखबार के संपादक हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि हर संपादकीय वही लिखते हैं। हर अखबार में सहायक संपादकों की टीम होती है जो रोज़ संपादकीय लिखती है। इसलिए यह कहना कि गोविंद सिंह शशि शेखर के लिए संपादकीय लिखकर वेश्यावृत्ति जैसा काम कर रहे थे, गलत है। अगर आप सहायक संपादक हैं तो आपका काम ही है संपादकीय लिखना।
कॉमेंट करने से पहले हर व्यक्ति को स्थिति की सही जानकारी हासिल कर लेनी चाहिए।
...
written by kunwarprasoon, August 26, 2011
apne SHASHI SHEKHAR KE SAATH JAKAR BADI BHOOL KI. naukari AB SHAREEFON KI NEEYAT NAHI RAHI. suna hai AAP HI SHASHI KE LIYE EDITORAIL LIKHA KARTE THE. YAH KAM KISI pROSTITURE SE ALAG THODE HUA. KHAIR AAP BAizzat MUKT HUE.
BADHAIYAN
...
written by purushottam sharma, August 16, 2011
good sir acha laga padkar apko badahi ho
...
written by dilip k singh, August 15, 2011
acchi baat hai. dukh to lajmi hai, lekin unka margdarsan pakar aur log aayenge kushi is baat ki bhi hai.
...
written by anand parkash gautam, August 14, 2011
congratulation sir
...
written by कुबेरनाथ सिंह, August 13, 2011
सुन कर खुशी हो रही है, लेकिन दुख इस बात का हो रहा है कि उनके दूर जाने से एक मार्गदर्शक की कमी हमेशा खलेगी. पत्रकारिता में ऐसे लोग कम है.
...
written by Raju, August 11, 2011
Journalists ki nai khep ko govindji se sikhana chahiye patrakarita me bhavisya kya hai
...
written by Anil Pande, August 11, 2011
वाह क्या बात है !

भाग्यम फलति सर्वदा.
न चो विद्या, न चो पौरुषम !
...
written by M.K. Singh, August 11, 2011
Congratulations.

Write comment

busy