पत्रकार सुरेश शर्मा हिंदी विश्‍वविद्यालय में राइटर-इन-रेजीडेंस

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पत्रकार, लेखक व फिल्‍म निर्देशक सुरेश शर्मा महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा में राइटर-इन-रेजीडेंस के रूप में जुड़ गए हैं। जेएनयू, नई दिल्‍ली से रघुवीर सहाय का काव्‍य विषय पर एमफिल व साठोत्‍तरी हिंदी कविता विषय पर डॉ.नामवर सिंह के निर्देशन में पीएचडी करने वाले सुरेश शर्मा आज साहित्‍य जगत की एक अज़ीम शख़्शियत हैं। उनके साहित्य में भारतीय समाज एवं संस्कृति का यथार्थ चित्र झलकता है।

उन्‍होंने रघुवीर सहाय का कविकर्म, यथार्थ यथास्थिति नहीं (रघुवीर सहाय के लेख संग्रह का संपादन), इस अकाल बेला में (राजकमल चौधरी की संपूर्ण कविताओं का संपादन), बेनीपुरी ग्रंथावली (8खंडों में), रघुवीर सहाय रचनावली (6 खंडों में), विमल राय का देवदास, चंद्रशेखर से संवाद,  सांसद चंद्रशेखर, जि़दगी का कारवां (चंद्रशेखर की जीवनी) हिंदी जगत के पाठकों को दी है।

करीब ढाई दशक से जनसत्‍ता, नवभारत टाइम्‍स व टाइम्‍स ऑफ इंडिया के हिंदी सांध्‍य दैनिक सांध्‍य टाइम्‍स से जुड़े शर्मा प्रभाष जोशी के लेखों के संग्रह का संपादन करते रहे। उनके कुशल संपादन से ही जीने के बहाने, लुटियन के टीलों का भूगोल, धन्‍न नरबदा मैया हो, खेल सिर्फ खेल नहीं है, जब तोप मुकाबिल हो, 21 वीं सदी का पहला दशक, आगे अंधी गली है, प्रभाष पर्व जैसी कृतियां रचना संसार में उपलब्‍ध हो पायी। कुलपति विभूति नारायण राय द्वारा विश्‍वविद्यालय में राइटर-इन-रेजीडेंस पद पर नियुक्ति पर खुशी जाहिर करते हुए उन्‍होंने कहा कि मैंने लेखनकार्य को ही अपना साथी समझा है। वे कहते हैं कि, यहां पर मैं फणीश्‍वरनाथ रेणु की रचित कहानी पर बनी फिल्‍म तीसरी कसम पर एक आलोचनात्‍मक पुस्‍तक लिखना चाहता हूं।

सर्वश्रेष्‍ठ फिल्‍म आलोचक के राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार से सम्‍मानित शर्मा शरतचंद्र के देवदास पर आधारित फिल्‍म पर विमल राय का देवदास नामक पुस्‍तक लिख चुके हैं। विश्‍वविद्यालय की अवधारणा पर चर्चा करते हुए उन्‍होंने कहा कि यह विश्‍वविद्यालय अपने मिशन और विजन में सफल हो रहा है। उन्‍होंने कहा कि यह विश्‍वविद्यालय अपने नाम के अनुरूप, पूरी तरह से अंतरराष्‍ट्रीय बन रहा है, जिस तरह प्राचीन काल में नालंदा अंतरराष्‍ट्रीय विश्‍वविद्यालय था, जहां पर विश्‍व के अनेक देशों से छात्र-अध्‍यापक अध्‍ययन-अध्‍यापन के लिए आते थे, उसी प्रकार यह विश्‍वविद्यालय भी सही मायने में अंतरराष्‍ट्रीय स्‍वरूप बनने की ओर है, क्‍योंकि अब यहां विदेशी विद्यार्थियों, अध्‍यापकों व विशेषज्ञों को बुलाया जा रहा है।

हिंदी विश्‍वविद्यालय में परंपरागत पाठ्यक्रमों से इतर मानविकी, समाजविज्ञान, प्रबंधन, आई.टी. जैसे विषयों में हिंदी माध्‍यम से उच्‍च स्‍तर पर अनुसंधान कार्य कराए जाने के संबंध में उन्‍होंने कहा कि इससे हिंदी का भूमंडलीकरण होगा। उन्‍होंने बताया कि महत्‍वपूर्ण उपन्‍यासकार के रूप में प्रसिद्ध हो चुके कुलपति विभूति नारायण राय हिंदी को तकनीक से जोड़ने में महारत हासिल है। यही कारण है कि वे हिंदी के संपूर्ण महत्‍वपूर्ण साहित्‍य को इंटरनेट पर उपलब्‍ध करा रहे हैं। विवि के तीव्र विकास पर प्रकाश डालते हुए उन्‍होंने कहा कि कुलपति जी ने न सिर्फ प्रशासनिक कुशलता व दूरदर्शिता से इसे एक नया मुकाम दिया है बल्कि अकादमिक गुणवत्‍ता के मामले में भी उन्‍होंने बेहतर सुविधाएं उपलब्‍ध कराई हैं।

रोमांस के शिखर शम्‍मी कपूर, संगीतकार रवि, फिल्‍म निर्देशक बी.आर.चोपड़ा जैसे फिल्‍मों के निर्माण में निर्देशन व पटकथा लेखन से सहयोग देने वाले शर्मा आशा जताते हुए कहते हैं कि यहां पारंपरिक विषयों के इतर समाज के यथार्थ को चित्रित करने के लिए स्‍त्री अध्‍ययन, फिल्‍म एवं नाटक, पत्रकारिता में अनुसंधानात्‍मक प्रवृति से पढाई हो रही है, यहां के विद्यार्थी एक बेहतर समाज के निर्माण में अपना अमूल्‍य योगदान दे सकेंगे। सुरेश शर्मा की नियुक्ति पर विश्‍व‍विद्यालय के अधिकारी, अध्‍यापक, कर्मी, शोधार्थी व विद्यार्थियों ने बधाई दी है।


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