दैनिक जागरण, गोरखपुर में कई लोग होंगे इधर-उधर!

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दैनिक जागरण अब पुराने ढर्रो से हटकर नई लीक पर चलने की कोशिश कर रहा है. अखबार प्रबंधन बाबा आदम जमाने के सिस्‍टम को नई तकनीक और नए दौर के हिसाब से सेट करने की कवायद कर रहा है. खासकर पुराने यूनिटों में बदलाव की प्रक्रिया तेजी से शुरू कर दी गई है. इसी क्रम में अब गोरखपुर में भी बदलाव किए जाने की व्‍यूह रचना तैयार की जा रही है. यहां कई ब्‍यूरो के हेडों को भी इधर-उधर किए जाने की रणनीति बना ली गई है.

गोरखपुर में नए सिस्‍टम के हिसाब से अखबार को इनपुट और आउटपुट डेस्‍क में बांट दिया गया है. इनपुट का हेड केके शुक्‍ला को बनाया गया है, जबकि आउटपुट का प्रभार राजेश सिंह के पास है. सूत्रों का कहना है कि अब शैलेंद्र मणि त्रिपाठी का दखल संपादकीय में सीमित रहेगा. वे प्रसार एवं विज्ञापन की व्‍यवस्‍था को हेड करेंगे. संपादकीय पर इनपुट एवं आउटपुट हेडों का पूरा दखल रहेगा. प्रबंधक ओमप्रकाश जोशी को भी इधर उधर करके उनकी जगह सुनील लधू को मैनेजर बनाने की रणनीति पर विचार किया जा रहा है.

सूत्रों का कहना है कि धर्मेन्‍द्र पाण्‍डेय को ग्रामीण डेस्‍क से हटाकर इनपुट पर लाया जा रहा है. श्‍याम नारायण भट्ट को प्रादेशिक डेस्‍क इंचार्ज के पद से हटाकर ग्रामीण डेस्‍क का इंचार्ज बनाया जा रहा है. कुछ जिलों में भी फेरबदल की जा रही है. ब‍स्‍ती के प्रभारी आशुतोष मिश्र को वापस गोरखपुर बुलाया जाएगा. महाराजगंज के प्रभारी दिनेश कसेरा को आशुतोष की जगह बस्‍ती भेजा जाएगा. महाराजगंज की खाली कुर्सी पर महेंद्र त्रिपाठी की तैनाती की जाएगी. गोरखपुर में बस्‍ती का डाक पेज देखने वाले सतीश शुक्‍ल को प्रादेशिक डेस्‍क इंचार्ज बनाए जाने की तैयारी की जा रही है. सिद्धार्थनगर से बच्‍चा पाण्‍डेय को हटाकर देवरिया डेस्‍क देख रहे ब्रजेश पाण्‍डेय को भेजा जाएगा.

सूत्रों का कहना है कि अभी इन बदलावों पर निर्णय लिया गया है, सभी बदलाव जल्‍द ही मूर्त रूप ले लेंगे. यह बदलाव यूपी हेड रामेश्‍वर पाण्‍डेय एवं निदेशक सुनील गुप्‍ता की देखरेख में किए जा रहे हैं. प्रबंधन की योजना वर्षों से इस यूनिट में बैठे धूल को साफ करने की है. बताया जा रहा है जागरण नोएडा के निर्देशन में अखबार के कई यूनिटों पर जमे पुराने मठाधीशों को उखाड़ने के लिए ही सारी कवायद की जा रही है. इसी क्रम में आगरा और बरेली में बदलाव किया गया था, जिसके बाद आगरा से सरोज अवस्‍थी को रांची तथा बरेली से चंद्रकांत त्रिपाठी को गोरखपुर लाया गया है.


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