राजस्‍थान पत्रिका, जोधपुर से मधु बनर्जी, सौरभ पुरोहित एवं गजेंद्र दहिया का तबादला

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राजस्‍थान पत्रिका जोधपुर से तीन पुराने रिपोर्टरो का तबादला कर दिया गया है. पिछले चौदह सालों से पत्रिका को जोधपुर में अपनी सेवाएं देने वाली मधु बनर्जी का तबादला प्रबंधन ने बांसवाड़ा के लिए कर दिया है. सूत्रों का कहना है कि मधु पिछले दिनों मैटर्निटी लीव पर भी रही थीं, उसके बावजूद पत्रिका प्रबंधन ने उन्‍हें बांसवाड़ा भेज दिया है. मधु का कुछ समय पहले भास्‍कर में बातचीत पक्‍की हो गई थी बावजूद इसके पत्रिका प्रबंधन ने तमाम वादा कर भास्‍कर ज्‍वाइन करने से रोक लिया था.

पिछले सात सालों से राजस्‍थान पत्रिका को जोधपुर में अपनी सेवाएं दे रहे सौरभ पुरोहित को अलवर भेजा जा रहा है. सौरभ मूल रूप से जोधपुर के ही रहने वाले हैं. सौरभ के साथ गजेंद्र दहिया को भी अलवर भेजा जा रहा है. ये भी पिछले काफी समय से जोधपुर में पत्रिका के साथ जुड़े हुए थे. सूत्रों का कहना है कि चार और पुराने लोगों के तबदला किए जाने की पूरी तैयारी कर ली गई है. इनका भी अगले कुछ दिनों में जोधपुर से दाना-पानी उठा दिया जाएगा.

सूत्रों का कहना है कि जानबूझकर ये तबादले किए जा रहे हैं ताकि लोग खुद ही अखबार छोड़ दें. इसके पीछे कारण है कि सरकार ने वेतन आयोग लागू करने के लिए दबाव बढ़ा दिया है, जिसके चलते पुराने कर्मचारियों से पीछा छुड़ाने के लिए अखबार अब उन्‍हें परेशान कर रहा है. सूत्रों ने बताया कि चौदह रिपोर्टरों वाले जोधपुर यूनिट में अब पांच रिपोर्टर ही रह गए हैं. प्रबंधन के इसी रवैये के चलते ही अचल सिंह और नरेश ने यहां से इस्‍तीफा दे दिया था.


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Comments (3)Add Comment
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written by ganesh, September 06, 2011
उपर वाली जानकारी में करेक्द्गान है टाइप नहीं हुआ मधु बैनर्जी को पऋिका वालों ने भास्कर जाने से नहीं रोका, किसी और ने रोका हो तो बात अलग है; उसे भास्कर ने ही नहीें लिया बात नहीं बनी;सारा स्टाफ जानता है उसने कितनों की नौकरी खाई है;
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written by ganesh, September 05, 2011
जिसने भी ये जानकारी दी है, गलत दी है, अपना उल्ल सीधा करने को, जिसने भी मुझे हकीकत बताई वो यह है कि गजेद्र दहिया का स्थानांतर क्यों हुआ इस बारे में वो स्वयं और पूरा स्टाफ जानता है; बताया गया है कि उसे पऋिका वालों ने भास्कर जाने से नहीं रोका, किसी और ने रोका हो तो बात अलग है; उसे भास्कर ने ही नहीें लिया बात नहीं बनी;सारा स्टाफ जानता है उसने कितनों की नौकरी खाई है; सुरेद्गा व्यास सहित दौलतसिंह चौहान का तबादला जो राजस्थान पऋिका ने अब किया ये काफी पहले हो जाते तो इतना नुकसान नहीं होता;कैंसर की गांठों को अलग करना भला कैसा गुनाह है हर प्रबंधन अपना अखबार बचाने के लिए करता है; वेतनमान के लिए करना होता तो द्गाायद यै पऋिका वाले
इनका तबादला नहीं करते निकाल ही देते; अचल पऋिका की नीति नहीं बल्कि विद्गवविदृयालय में नौकरी करने गए; नरेद्गा व प्रवीण सुुनील चौधरी व सुरुेद्गा व्यास के कारण गए; दौलत सिंह भी उन्ही के इन खास लोगों का पक्ष लेते थे, इसलिए लोग परेद्गाान थे; वैसे भी नौकरी करना है तो तबादले तो होंगे ही, वरना १० साल तक क्यों ठीकने देगी कोई कंपनी, वैसे भी जडे जमाने वाले इन लोगों चौकडी
ने वहां किसी को टिकने नहीं दिया, किसी को पागल कर के भगाया तो किसी को आरोप लगाकर या मैनेजमेंट को गलत रिपोर्ट बताकर व सबूत बनाकर भगाया देर आए दुरुस्त आए
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written by mohitsharma, September 05, 2011
rajasthan patrika ki to neeti hi sada se asi hi rahi he. isne kabhi apne ampoyeies ka bhala nahi kiya. ek waqkt tha jab yaha aadmi ki kadra hoti thi ab to yaha chaploosi chalati he. tabhi to log patrika ka sath chhodkar ja rahe he. koi yahaana nahi chahata. gulab kothari badi badi bbate karate he. lekin apne akhbar ko hi nahi sudhar paa rahe.

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