सुमन सौरभ प्रभात खबर, देवघर के नए आरई, जमशेदपुर भेजे गए कुमार सौरभ एवं प्रदीप जायसवाल का इस्‍तीफा

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: अपडेट : प्रभात खबर, रांची में हलचल है. पिछले काफी समय से जड़वत लोगों को इधर-उधर करके गतिशील बनाने का काम किया जा रहा है. प्रबंधन का निर्णय काफी दिनों से जमे-जमाए लोगों को रास नहीं आ रहा है. पिछले दिनों जमशेदपुर भेजे गए दो लोगों ने इस्‍तीफा देकर अपना बिजनेस चलाने का‍ निर्णय लिया है. इधर, प्रभात खबर, देवघर से सूचना है कि सुमन सौरभ को देवघर का नया आरई बना दिया गया है. पुराने संपादक संजय मिश्र होल्‍ड पर हैं.

रांची में तैनात सुमन सौरभ देवघर एडिशन के स्‍थानीय संपादक बना दिए गए हैं. सुमन काफी समय से रांची में जमे हुए थे. वे अब तक स्‍थानीय संपादक की भूमिका निभा रहे संजय मिश्र के ऊपर भेजे गए हैं. संजय मिश्र का तबादला नहीं किया गया है. बल्कि एक तरह से उन्‍हें होल्‍ड पर रख दिया गया है. दूसरी तरफ पिछले दिनों प्रमोट करके भेजे गए कुमार सौरभ और प्रदीप जायसवाल ने इस्‍तीफा दे दिया है. प्रबंधन ने रांची में डीएनई के पद पर कार्यरत कुमार सौरभ को एनई बनाकर जमशेदपुर भेजा था, परन्‍तु उन्‍होंने वहां जाने से इनकार करते हुए इस्‍तीफा दे दिया. चीफ सब से डीएनई बनाकर जमशेदपुर भेजे गए प्रदीप जायसवाल भी वहां ज्‍वाइन करने की बजाय इस्‍तीफा दे दिया. फिलहाल इन दोनों लोगों ने कहीं ज्‍वाइन नहीं किया है. इस संदर्भ में जब प्रदीप जायसवाल से बात की गई तो उन्‍होंने इस्‍तीफा के संबंध में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया.

इसी उथल-पुथल के बीच एक खबर और आ रही है कि प्रभात खबर के एक वरिष्‍ठ संपादकीय सहयोगी दूसरे जगह आशियाना तलाशने की कोशिश में जुटे हुए हैं. अगर सूत्रों की माने तो रविवार को उन्‍होंने एक प्रतिद्वंद्वी अखबार के स्‍टेट हेड के साथ लम्‍बी मुलाकात की है. अब इन लोगों के बीच क्‍या बात हुई है, इसकी जानकारी तो नहीं मिल पाई है, परन्‍तु समझा जा रहा है कि बात बन गई तो अगले कुछ दिनों में ये प्रभात खबर को अलविदा कह सकते हैं. फिलहाल इस मुलाकात को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं.


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Comments (10)Add Comment
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written by डीओजी डॉग, October 20, 2011
प्रभात खबर में ये सब काफी पहले से होता आ रहा है। फर्क इतना है कि अभी एक गुट विशेष के लोगों को किनारे किया जा रहा है और वो भी थोक के भाव में इसलिए नजर आ रहा है। लोगों को दीवार धराने की इस अखबार में पुरानी परंपरा रही है। किसी को काम न देकर शंट कर दिया जाता है, तो किसी का अच्छा काम लोगों की आंखों में इस कदर चुभता है कि लोग मिलकर उसकी वाट लगा देते हैं। जो खेल आज राजेंद्र तिवारी खेल रहे हैं, वही खेल इन भुक्तभोगियों ने काफी पहले खेला हुआ है। तिवारी जी भी इस खेल में विजेता थोड़े ही होंगे। एक न एक दिन ऐसा भी आयेगा, जब उनके साथ भी वही होगा, जो आज वो दूसरों के साथ कर रहे हैं। वैसे पूरे प्रकरण में इस संस्थान के अभिभावक का धृतराष्ट्री रवैया काफी उल्लेखनीय है। वैसे, झारखंड की पत्रकारिता जगत में यह चर्चा जोरों पर है कि ये सब जिन लोगों के द्वारा किया जा रहा है, उन्हें दरअसल सैलरी किसी और संस्थान से मिल रही है। उन्हें इसी मिशन पर भेजा गया है प्रभात खबर में कि वहां जाकर इस अखबार की ................. दो। अब देखिये कितने दिनों में अखबार की ...... है।
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written by डीओजी डॉग, October 20, 2011
प्रभात खबर में ये सब काफी पहले से होता आ रहा है। फर्क इतना है कि अभी एक गुट विशेष के लोगों को किनारे किया जा रहा है और वो भी थोक के भाव में इसलिए नजर आ रहा है। लोगों को दीवार धराने की इस अखबार में पुरानी परंपरा रही है। किसी को काम न देकर शंट कर दिया जाता है, तो किसी का अच्छा काम लोगों की आंखों में इस कदर चुभता है कि लोग मिलकर उसकी वाट लगा देते हैं। जो खेल आज राजेंद्र तिवारी खेल रहे हैं, वही खेल इन भुक्तभोगियों ने काफी पहले खेला हुआ है। तिवारी जी भी इस खेल में विजेता थोड़े ही होंगे। एक न एक दिन ऐसा भी आयेगा, जब उनके साथ भी वही होगा, जो आज वो दूसरों के साथ कर रहे हैं। वैसे पूरे प्रकरण में इस संस्थान के अभिभावक का धृतराष्ट्री रवैया काफी उल्लेखनीय है। वैसे, झारखंड की पत्रकारिता जगत में यह चर्चा जोरों पर है कि ये सब जिन लोगों के द्वारा किया जा रहा है, उन्हें दरअसल सैलरी किसी और संस्थान से मिल रही है। उन्हें इसी मिशन पर भेजा गया है प्रभात खबर में कि वहां जाकर इस अखबार की ................. दो। अब देखिये कितने दिनों में अखबार की ...... है।
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written by aapke SUTRON, October 20, 2011
mr. yashwant,
third pare me jab SUTRON par aapko hi vishwas nahi hai. to ye likh hi kyon rahe hain.
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written by Raju, October 20, 2011
ek tau global recession upar se price war,usme transfer posting aur employees ka chorna,kaha so raha hain usha martin management,is sankraman kaal mein transfer kitna khatarnak ho sakta hain prabhat khabar walo ke samajh se bahar ki baat hain,ye log number 1 jharkhand me us samay hue the jab market mein koin national player nahi tha, Bihar mein number two bhi nahin ho payenge aur Dainik Bhaskar aa jaye phir tau number 4 hone wale hain ye log,Deoghar unit chalana hi galat decision hain jab bhagalpur khul hi gaya tau deoghar ka kya matlab hain,yaha andher nagri aur chaupat raja hain, enhi ke bharose hain prabhat khabar,
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written by gaurav, October 19, 2011
harivansh jee, dekhiye aage-aage hota hai kya
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written by ravi, October 19, 2011
chalie saurav suman ko koi kaam to mila. nahi to ranchi main rah kar rajneeti hikar rahe the. rajendra tiwari ke ek banda to set ho gaya. ab bari satya prakash, brijendra dube ko set karne ki hai.
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written by anoop jha, October 19, 2011
sanjay mishra hold par nahi, special project par ranchi ja rahe hai.waise bhi ab bholenath ki unnhonain bahut puja kar li...ab rachi me kujh tathakathit mahanton ko prasad khilayenge.
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written by raja, October 19, 2011
deoghar ke ne banakar suman saurabh nahi saurabh suman bheje gaye hain. we kafi honhar hain aur story planning karne men unka koi sani nahi hai. saurabh suman ko re banana prabhat khabar ki bahut achi koshish hai. isse deoghar men prabhat khabar ko jarur labh hoga
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written by pankaj kumar yadav, October 19, 2011
akhbar ke dhandhe me editor ke advise or order se ab kaun aur kyu chalega ! option to har jagah khula hai ,,,agar band bhi ho jaye to cement ke dukan se behtar dhandha thode hai patrakarita
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written by SUNIL, October 19, 2011
prabhat khabar kee purani aadat hai . mehnat kare murga anda khye hawaldar. deoghar edition ke kahani koi nai nahee hai yaha aane wale sampadako ka kaam prabhandan ko raas nahi aata hai . tabhi to avnish jee se lekar rabi prakash tak kaa haal aap dekh rahe rai

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Last Updated ( Thursday, 20 October 2011 11:03 )