गोरखपुर गोलीकांड के लिए दिल्ली व लखनऊ से जांच टीमें भेजने का निर्णय

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: उत्तर प्रदेश में मजदूरों पर बढ़ते दमन और अलोकतांत्रिक माहौल पर न्यायविदों, नागरिक अधिकारकर्मियों तथा बुद्धिजीवियों ने चिंता जताई : मजदूरों पर दमन तेज होने पर प्रदेश सरकार के विरुद्ध व्यापक जन-असहयोग आंदोलन छेड़ने की चेतावनी : जांच व कार्रवाई में देरी के मसले पर अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी : नई दिल्ली, 8 मई। न्यायमूर्ति राजिन्दर सच्चर और पीयूसीएल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. विनायक सेन सहित देश तथा विदेश के न्यायविदों, नागरिक अधिकारकर्मियों, बुद्धिजीवियों तथा ट्रेड यूनियन नेताओं ने उत्तर प्रदेश में मजदूरों पर बढ़ते दमन और अलोकतांत्रिक माहौल पर चिंता जताते हुए प्रदेश शासन पर जन-दबाव बनाने की जरूरत पर बल दिया है।

इस बीच गोरखपुर गोलीकांड के संबंध में मुख्यमंत्री मायावती के नाम भेजी जा रही याचिका पर अब तक सैकड़ों जाने-माने सामाजिक कर्मी, न्यायविद, नागरिक अधिकार कार्यकर्ता, लेखक-बुद्धिजीवी और छात्र-युवा संगठनों के लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं और दिल्ली तथा पंजाब से स्वतंत्र जांच टीमें गोरखपुर भेजने का निर्णय किया गया है। पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स के के गौतम नवलखा ने पीयूडीआर तथा पीयूसीएल की साझा जांच टीम गोरखपुर भेजने की बात कही है।

दिल्ली में राजकीय दमन के मुद्दे पर चल रही राष्ट्रीय संगोष्ठी में आज भी उत्तर प्रदेश में मजदूर आंदोलनों के दमन का सवाल मंच से उठाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डा. विनायक सेन ने याचिका पर हस्ताक्षर करने की अपील की और उ.प्र. पीयूसीएल की महासचिव वन्दना मिश्र ने कानपुर में मजदूरों पर फर्जी मुकदमे थोपने तथा गोरखपुर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे मजदूरों पर गोली चलाने की कड़ी निंदा की। गोरखपुर में फायरिंग की घटना में 19 मजदूर गोली से घायल हो गये थे जिनमें से एक की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है।

इस बीच अनेक संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर जिला प्रशासन ने 9 मई से शुरू हो रहे मजदूर सत्याग्रह का दमन किया तो प्रदेश भर के मजदूर आंदोलनों और जनवादी संगठनों को साथ लेकर प्रदेश सरकार के विरुद्ध व्यापक जन-असहयोग आंदोलन छेड़ दिया जाएगा। कुछ संगठन इस घटना की न्यायिक जांच कराने तथा प्रदेश शासन को कार्रवाई का निर्देश देने की मांग को लेकर कुछ संगठन इलाहाबाद उच्च न्यायालय जाने की भी तैयारी कर चुके हैं।

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के नाम याचिका पर दिल्ली, लखनऊ, इलाहाबाद, लुधियाना, मुंबई आदि शहरों में हस्ताक्षर अभियान के साथ ही ऑनलाइन भी देश-विदेश से हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं। याचिका में घटना की न्यायिक जांच कराने, गोलीकांड के दोषियों को सजा देने, मजदूरों पर से फर्जी मुकदमे हटाने और बर्खास्त मजदूरों को बहाल कर दो कारखानों में तालाबंदी खत्म करने की माँग की गयी है।

याचिका पर हस्ताक्षर करने वालों में न्यायमूर्ति राजिन्दर सच्चर, डा. विनायक सेन, नर्मदा बचाओ आन्दोलन की नेता मेधा पाटकर, पीयूसीएल के राष्ट्रीय महासचिव पुष्कर राज, प्रख्यात फिल्मकार आनन्द पटवर्धन, ईपीडब्ल्यू पत्रिका के सहायक संपादक गौतम नवलखा, एसएसीडब्ल्यू यूके के संपादक हर्ष कपूर, छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नागरिक अधिकार कर्मी राजेंद्र सायल, इंडियन एसोसिएशन ऑफ पीपुल्स लॉयर्स के के.डी राव, उत्तर प्रदेश पीयूसीएल के उपाध्यक्ष रवि किरण जैन, प्रसिद्ध कवि एवं ‘अनहद’ की शबनम हाशमी, ‘पब्लिक एजेंडा’ के कार्यकारी संपादक मंगलेश डबराल, ‘समयान्तर’ पत्रिका के सम्पादक पंकज बिष्ट, कवि पंकज सिंह, आल इंडिया सेक्युलर फोरम के राम पुनियानी, लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति डा. रूपरेखा वर्मा, जिला बार एसोसिएशन लुधियाना के अध्यक्ष अशोक मित्तल, डेमोक्रेटिक लॉयर्स एसोसिएशन पंजाब के कुलदीप सिंह एवं नरिन्दर सिंह, एमसीपीआई पंजाब के हरविलास सिंह, वरिष्ठ पत्रकार अनिल चमड़िया, अजित साही, पाणिनी आनंद, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ईश मिश्र, प्रोफेसर पीके विजयन, हैदराबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बी.आर. बापूजी एवं डा. शुभदीप, कोलकाता के इतिहासकार देवब्रत बनर्जी, पंजाबी विश्वविद्यालय के प्रो. गुरभगवान गिल, सीटीयू वर्कर्स यूनियन, चंडीगढ़ के भूपिन्दर सिंह, चंडीगढ़ सबआर्डिनेट सर्विसेज इंप्लाइज़ फेडरेशन के रंजीत सिंह, एआईसीटीयू पंजाब के खुशविन्दर संधू, लोकायत, पुणे के नीरज जैन, फोरम फॉर डेमोक्रेटिक स्ट्रगल के विजय सिंह, पीयूसीएल, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष चितंरजन मिश्र एवं महासचिव वंदना मिश्र, प्रसिद्ध स्तंभकार एवं न्यू सोशलिस्ट इनिशिएटिव से जुड़े सुभाष गाताडे, जन संस्कृति मंच दिल्ली की भाषा सिंह, नेशनल कैंपेंन अगेंस्ट करप्शन के प्रो. वाई.के. रंजन, सीपीआई-एमएल न्यू डेमोक्रेसी की दिल्ली सचिव अपर्णा, पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट के एन. बाबैया, पीयूसीएल झारखंड के एस. आर. नाग, ह्यूमन राइट्स अलर्ट के बबलू ल्यूटैंगटन आदि प्रमुख हैं।

नई दिल्ली में 125वें मई दिवस की रैली में भाग लेकर लौटे मजदूरों पर गोलीबारी की घटना की विदेश में भी कड़ी निन्दा हुई है। जर्मनी की डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट पार्टी की कार्यकारिणी के सदस्य इलियट आइज़नबर्ग एवं आई. ओ’कैलाघन, रैडिकल विमेन, आस्ट्रेलिया की डेबी ब्रेनन तथा रैडिकल विमेन, अमेरिका की प्रतिनिधि एन्ने स्लेटर, कनाडा की विल्फर्ड लॉरियर युनिवर्सिर्टी फैकल्टी एसोसिएशन के डा. हर्बर्ट पिमलॉट, इंग्लैंड की सामाजिक कार्यकर्ता क्रिस्टीन टिकनर, लेबर स्टार्ट के संपादक एरिक ली, मलेशिया की सोशलिस्ट पार्टी के जीविन द्रान, पाकिस्तान मजदूर महाज के तुफैल अब्बास सहित अनेक ट्रेड यूनियन कर्मियों तथा बुद्धिजीवियों ने इसे भारत के लोकतंत्र के लिए शर्मनाक घटना बताया है।

इस बीच लखनऊ तथा गोरखपुर में विभिन्न संगठनों ने उत्तर प्रदेश में बढ़ते दमन-उत्पीड़न के खिलाफ साझा मोर्चा बनाकर व्यापक जनान्दोलन छेड़ने की तैयारी भी शुरू कर दी है। दिल्ली तथा पंजाब से कुछ जांच टीमें भी गोरखपुर जाने की तैयारी कर रही हैं।

कृते, 
गोरखपुर मजदूर आन्दोलन समर्थक नागरिक मोर्चा
सम्पर्कः 9936650658 / 9910462009 / 8447011935

प्रेस विज्ञप्ति


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