भट्टा गांव में आई दुल्हन को अब भी पति का इंतज़ार

E-mail Print PDF

आरतीभारत में शहर हो, कस्बा हो या गाँव-खेड़ा, शादी-ब्याह वाले घर का नज़ारा देखते ही बनता है. नई दुल्हन का स्वागत, चुहलबाज़ी भरी रस्में, मुँह दिखाई, बाजा-गाजा और न जाने क्या-क्या. दुल्हन के दिल का हाल तो मत ही पूछिए. ऐसी ही एक बारात पिछले हफ़्ते नोएडा से सटे भट्टा गाँव के द्वारे भी लौटी और साथ ही लाई नई नवेली दुल्हन आरती को.

लेकिन इस दुल्हन को न तो स्वागत नसीब हुआ, न कोई उसे देखने आया और न ही उसे अब तक पति का साथ मिल पाया है. ये वही भट्टा गाँव जहाँ ज़मीन को लेकर हुई लड़ाई में कई किसान मारे जा चुके हैं. आरती अपने साथ न जाने कितने सपने, कितने अरमान संजोकर लाई थी. लेकिन उसे शायद अंदाज़ा नहीं था कि जिस सुबह उसके क़दम एक नए जीवन की ओर बढ़ रहे थे, वो सुबह गाँव के लिए कितना दर्द लेकर आने वाली है. सात मई को आरती दुल्हन बनकर भट्टा गाँव पहुँची तो बैंड बाजे और शहनाइयों की जगह गोलियों की धाँय-धाँय ने उसका स्वागत किया जिसने कई गाँववालों को मौत की नींद सुला दिया. घटना के चंद दिन बाद जब हम आरती की तलाश में भट्टा गाँव में उनके घर पहुँचे तो वो एक कमरे में दुबकी बैठी थी.

कुछ हिचकिचाते हुए मैने बात करने के लिए कहा तो उसने मना कर दिया फिर कुछ सोचा और मान गईं. दबी आवाज़ में उसने अपनी कहानी सुनानी शुरु की, “मेरे आने से पहले से ही गाँव का माहौल तनावपूर्ण था. ससुराल की दहलीज़ लाँघे चंद घंटे ही हुए थे कि पुलिस आ धमकी. पहले तो बाहर ही थी पुलिस लेकिन फिर घर में घुस आए. मेरे ससुर जी को ख़ूब पीटा. जेठ और देवर दोनों को पकड़ कर ले गए. नई बाइक आई थी वो भी तोड़ दी, गाली गलौच की.''

मन के अरमान : अपने पति का नाम न लेते हुए आरती बताती हैं, पुलिस उन्हें भी ले जाने लगी. मेरी जेठानी ने उन्हें बताया कि अभी अभी बारात आई है. तो जाकर उन्हें छोड़ा. आरती के पति को पुलिस ने छोड़ तो दिया लेकिन वो उसी दिन से अस्पताल में हैं. ससुर को गंभीर चोट लगी है तो जेठ और देवर जेल में बंद पड़े हैं. आरती की जेठानी बताती हैं कि उन्हें तो महसूस ही नहीं हो रहा है कि घर में शादी हुई है, या दुल्हन आई है. सब बेकार हो गया...ये कहते-कहते वे रुक जाती हैं. उस दिनों ज़ोरों की गर्मी थी और मैं कई किलोमीटर पैदल चल कर वहाँ पहुँच थी.

बात-बात करते शायद परिवारवालों की नज़र मेरे थके हुए चेहरे पर पड़ी होगी तो दुल्हन आरती मेरे लिए पानी का गिलास ले लाई. गिलास पकड़ते समय मैने आरती के हाथ देखे- हाथों की मेंहदी की लाली अभी गई नहीं थी. आगे कुछ न पूछने का मन हुआ न साहस. हिंसा और गोलीबारी के बाद पूरे गाँव में मातम का माहौल है, पति कब लौटेगा पता नहीं. लिहाज़ा दुल्हन अभी अपने मायके लौट रही है. शायद इस उम्मीद के साथ कि जब लौटेगी तो उसे दुल्हनों वाला वो सब लाड़-चाव मिलेगा जिसकी उसके मन में हसरत होगी.

बीबीसी संवाददाता वंदना की रिपोर्ट. इस रिपोर्ट को बीबीसी डॉट कॉम से साभार लेकर यहां प्रकाशित कराया गया है.


AddThis